World Bank China Loan: करीब 45 साल तक चीन को आर्थिक विकास के लिए कर्ज देने वाला वर्ल्ड बैंक (World Bank) अब अपने सबसे बड़े उधारकर्ताओं में शामिल इस देश को धीरे-धीरे फंडिंग बंद करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक ने नई 2026-2031 कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (Country Partnership Framework) के तहत फैसला किया है कि 2031 तक चीन को अधिकतम 2 अरब डॉलर का ही कर्ज दिया जाएगा और इसके बाद नई संप्रभु (Sovereign) लेंडिंग पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका लंबे समय से चीन को मिलने वाले वर्ल्ड बैंक के कर्ज का विरोध करता रहा है। सवाल यह है कि आखिर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को इतने वर्षों तक वर्ल्ड बैंक से कर्ज क्यों मिलता रहा और अब इसे बंद करने की नौबत क्यों आई?
चीन को वर्ल्ड बैंक से कर्ज कैसे मिलना शुरू हुआ?
चीन ने 1980 में वर्ल्ड बैंक की सदस्यता ली थी। उस समय उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर थी और वह कम आय वाले देशों की श्रेणी में आता था। 1981 में वर्ल्ड बैंक ने चीन को करीब 20 करोड़ डॉलर का पहला ऋण दिया था, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना था।
शुरुआती वर्षों में चीन को इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (IDA) के तहत बेहद कम ब्याज वाले ऋण मिलते थे। यह वही फंड है जो दुनिया के सबसे गरीब देशों को अनुदान और रियायती कर्ज देता है। 1980 से 1999 के बीच चीन ने IDA के जरिए लगभग 10 अरब डॉलर का कर्ज लिया। इन पैसों का इस्तेमाल सड़कें बनाने, बुनियादी ढांचा विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं में किया गया।
फिर भी चीन को कर्ज क्यों मिलता रहा?
1990 और 2000 के दशक में चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी और वह निम्न आय वाले देश से मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था बन गया। इसके बाद वह IDA से निकलकर इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) के तहत ऋण लेने लगा। IBRD ऐसे देशों को बाजार दर के करीब ब्याज पर कर्ज देता है, जिनकी आय बढ़ चुकी होती है लेकिन वे अभी पूरी तरह विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माने जाते।
1999 से 2011 के बीच चीन ने IBRD से लगभग 39.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त ऋण लिया। कुल मिलाकर 1980 से अब तक चीन ने वर्ल्ड बैंक समूह से 60 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज लिया, जिससे वह संस्थान के इतिहास के सबसे बड़े उधारकर्ताओं में शामिल हो गया।
दिलचस्प बात यह है कि चीन अब खुद IDA का पांचवां सबसे बड़ा दाता (Donor) है। यानी जो देश कभी गरीब देशों के लिए बने फंड से कर्ज लेता था, वही अब उस फंड में पैसा भी देता है। इसके बावजूद वह IBRD से लगातार ऋण लेता रहा।

अमेरिका लगातार विरोध करता रहा
अमेरिका लंबे समय से कहता रहा है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को विकासशील देशों के लिए बने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से कर्ज नहीं मिलना चाहिए। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का तर्क रहा है कि चीन के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से आसानी से पैसा जुटा सकता है और अब उसे विकास सहायता की जरूरत नहीं है।
अमेरिकी नेताओं का कहना है कि वर्ल्ड बैंक के सीमित संसाधनों का उपयोग उन देशों के लिए होना चाहिए जिन्हें वास्तव में वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। अमेरिका के अनुसार चीन को ऋण देने से गरीब देशों के हिस्से के संसाधन कम हो जाते हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा था कि जिन देशों ने वर्ल्ड बैंक से ऋण लेने की पात्रता लगभग पूरी कर ली है, उन्हें लगातार कर्ज देना उचित नहीं है। उनके मुताबिक इससे निजी निवेश बाजार भी प्रभावित होता है और विकासशील देशों के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो जाते हैं।
अब वर्ल्ड बैंक ने क्या फैसला लिया?
रिपोर्ट्स के अनुसार नई पांच वर्षीय योजना के तहत 2026 से 2031 के बीच चीन को कुल मिलाकर 2 अरब डॉलर से अधिक का नया कर्ज नहीं मिलेगा। इसके बाद 2031 से वर्ल्ड बैंक चीन को नई संप्रभु लेंडिंग पूरी तरह बंद कर देगा।
हालांकि वर्ल्ड बैंक इस फैसले को किसी सजा के रूप में नहीं बल्कि चीन के आर्थिक विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया मान रहा है। संस्थान का कहना है कि जैसे-जैसे कोई देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है, उसे विकास सहायता की बजाय वैश्विक पूंजी बाजार और अपने संसाधनों पर अधिक निर्भर होना चाहिए।
चीन ने इस फैसले पर क्या कहा?
चीन के वित्त मंत्रालय ने इन खबरों को लेकर कहा कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि उसका स्वरूप बदल रहा है। मंत्रालय के अनुसार अब चीन और वर्ल्ड बैंक के बीच संबंध वित्तीय सहायता से आगे बढ़कर ज्ञान साझेदारी (Knowledge Cooperation), नीति सहयोग और वैश्विक विकास संबंधी मुद्दों पर केंद्रित होंगे।

चीन का कहना है कि उसकी अर्थव्यवस्था और विकास की जरूरतें बदल चुकी हैं, इसलिए सहयोग का नया मॉडल स्वाभाविक है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि चीन उभरते देशों के विकास और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
क्या सिर्फ चीन के साथ ही ऐसा हो रहा है?
ऐसा नहीं है कि केवल चीन के लिए ही यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वर्ल्ड बैंक पहले भी आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके देशों को अपने नियमित ऋण कार्यक्रम से बाहर करता रहा है। हाल ही में पोलैंड के लिए भी चरणबद्ध तरीके से ऋण समाप्त करने की योजना बनाई गई है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का मामला अलग है क्योंकि वह अब दुनिया का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता (Bilateral Creditor) भी बन चुका है। यानी चीन स्वयं कई देशों को बड़े पैमाने पर कर्ज देता है। ऐसे में बहुपक्षीय विकास बैंक से लगातार ऋण लेना कई देशों और विशेष रूप से अमेरिका को उचित नहीं लगता।
इस फैसले का क्या असर हो सकता है?
2031 के बाद चीन को वर्ल्ड बैंक से सामान्य विकास ऋण नहीं मिलेगा, लेकिन दोनों के बीच तकनीकी सहयोग, जलवायु परिवर्तन, हरित विकास, ज्ञान साझेदारी और वैश्विक विकास कार्यक्रमों पर काम जारी रह सकता है।
दूसरी ओर, वर्ल्ड बैंक के संसाधनों का बड़ा हिस्सा अब उन गरीब और निम्न आय वाले देशों की ओर जा सकता है जिन्हें बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए वित्तीय सहायता की सबसे अधिक जरूरत है। कई विशेषज्ञ इसे वर्ल्ड बैंक की मूल भूमिका की ओर वापसी मान रहे हैं

निष्कर्ष
करीब चार दशक पहले वर्ल्ड बैंक ने चीन के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। चीन अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे बड़े निर्यातकों में से एक और कई देशों को कर्ज देने वाला प्रमुख वित्तीय खिलाड़ी बन चुका है। ऐसे में वर्ल्ड बैंक का 2031 तक ऋण समाप्त करने का फैसला केवल वित्तीय बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में आए परिवर्तन का भी संकेत माना जा रहा है।
FAQ
1. वर्ल्ड बैंक चीन को कर्ज देना क्यों बंद कर रहा है?
क्योंकि चीन अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और माना जा रहा है कि उसे विकास के लिए वर्ल्ड बैंक की वित्तीय सहायता की पहले जैसी जरूरत नहीं है।
2. चीन ने वर्ल्ड बैंक से अब तक कितना कर्ज लिया है?
1980 से अब तक चीन ने वर्ल्ड बैंक समूह से कुल 60 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज लिया है।
3. क्या 2031 के बाद चीन और वर्ल्ड बैंक का संबंध पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
नहीं। ऋण कार्यक्रम बंद होने की संभावना है, लेकिन तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझेदारी और वैश्विक विकास परियोजनाओं पर दोनों के बीच सहयोग जारी रह सकता है।
4. अमेरिका इस फैसले का समर्थन क्यों कर रहा है?
अमेरिका का मानना है कि वर्ल्ड बैंक के संसाधन गरीब देशों के लिए हैं और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को अब ऐसे विकास ऋण नहीं मिलने चाहिए।
5. क्या इसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वर्ल्ड बैंक के अधिक संसाधन अफ्रीका, एशिया और अन्य निम्न आय वाले देशों को उपलब्ध हो सकेंगे, जिन्हें विकास के लिए वित्तीय सहायता की अधिक जरूरत है।

