India Pakistan Prisoner Exchange :भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंध भले ही लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हों, लेकिन कुछ ऐसे मानवीय (Humanitarian) समझौते हैं जो आज भी दोनों देशों के बीच नियमित रूप से लागू होते हैं। ऐसा ही एक समझौता 2008 का Consular Access Agreement है, जिसके तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिकों और मछुआरों की सूची (Prisoner List) का आदान-प्रदान करते हैं।
इसी समझौते के तहत 1 जुलाई को भारत और पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने-अपने यहां बंद नागरिकों और मछुआरों की सूची एक-दूसरे को सौंपी। इसके साथ ही दोनों देशों ने अपने-अपने नागरिकों की जल्द रिहाई, स्वदेश वापसी (Repatriation) और कांसुलर एक्सेस (Consular Access) की मांग भी दोहराई। हालांकि यह प्रक्रिया नियमित है, लेकिन भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव के बीच इसका अलग ही कूटनीतिक और मानवीय महत्व माना जाता है।

क्या है 2008 का Consular Access Agreement?
भारत और पाकिस्तान ने 21 मई 2008 को Agreement on Consular Access पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों को कानूनी और मानवीय सहायता उपलब्ध कराना है।
इस समझौते के तहत दोनों देशों को साल में दो बार यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपने यहां बंद दूसरे देश के नागरिकों, कैदियों और मछुआरों की सूची साझा करनी होती है। इसके अलावा यदि किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया जाता है तो संबंधित देश के उच्चायोग (High Commission) को इसकी सूचना देना, कांसुलर एक्सेस उपलब्ध कराना और सजा पूरी होने के बाद जल्द से जल्द स्वदेश भेजना भी इसी समझौते का हिस्सा है।

इस बार भारत और पाकिस्तान ने क्या जानकारी साझा की?
भारत ने पाकिस्तान को अपनी जेलों में बंद 386 पाकिस्तानी नागरिक कैदियों और 53 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची सौंपी। यानी भारत की हिरासत में कुल 439 पाकिस्तानी या पाकिस्तानी माने जाने वाले लोग हैं।
वहीं पाकिस्तान ने भारत को 52 भारतीय नागरिक कैदियों और 198 भारतीय मछुआरों की सूची दी। यानी पाकिस्तान की जेलों में कुल 250 भारतीय या भारतीय माने जाने वाले लोग मौजूद हैं।
हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों और पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों में अलग-अलग आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया, लेकिन दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों द्वारा आधिकारिक रूप से जारी जानकारी के अनुसार यही आंकड़े वर्तमान आदान-प्रदान का हिस्सा हैं।
भारत ने पाकिस्तान से क्या मांग की?
भारत सरकार ने इस अवसर पर पाकिस्तान से कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। भारत ने कहा कि जिन 188 भारतीय नागरिकों और मछुआरों की सजा पूरी हो चुकी है, उन्हें बिना किसी देरी के रिहा कर भारत भेजा जाए।
नई दिल्ली ने पाकिस्तान से उन 13 भारतीय नागरिकों को भी तत्काल कांसुलर एक्सेस देने की मांग की, जिन्हें अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। भारत का कहना है कि इन लोगों की भारतीय नागरिकता होने की संभावना है और उनकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कांसुलर एक्सेस जरूरी है।
इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान से सभी भारतीय कैदियों और मछुआरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय अधिकारों का पूरा ध्यान रखने की भी अपील की।
पाकिस्तान ने भारत से क्या कहा?
पाकिस्तान ने भी भारत से अपने नागरिकों की जल्द रिहाई की मांग की। इस्लामाबाद ने कहा कि भारत में बंद 97 पाकिस्तानी कैदी, जिनमें 64 नागरिक और 33 मछुआरे शामिल हैं, अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि भी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।
पाकिस्तान ने यह भी आग्रह किया कि भारत उसकी नागरिकता वाले सभी संभावित कैदियों को कांसुलर एक्सेस उपलब्ध कराए ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके और उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेज हो सके।
मछुआरे सबसे ज्यादा क्यों गिरफ्तार होते हैं?
भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा (Maritime Boundary), विशेषकर सर क्रीक (Sir Creek) क्षेत्र, आज भी पूरी तरह तय नहीं है। अरब सागर में मछली पकड़ने के दौरान कई बार दोनों देशों के मछुआरे अनजाने में समुद्री सीमा पार कर जाते हैं।
अधिकांश मछुआरों के पास आधुनिक नेविगेशन सिस्टम नहीं होता, इसलिए वे यह समझ ही नहीं पाते कि वे दूसरे देश के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। इसके बाद संबंधित देश की समुद्री सुरक्षा एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार कर लेती हैं। यही कारण है कि दोनों देशों की जेलों में सबसे बड़ी संख्या मछुआरों की होती है।
कांसुलर एक्सेस क्यों महत्वपूर्ण होता है?
कांसुलर एक्सेस का अर्थ है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसके देश के दूतावास या उच्चायोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी जाए। इससे संबंधित देश अपने नागरिक की पहचान की पुष्टि कर सकता है, उसे कानूनी सहायता दिला सकता है और उसकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच अक्सर कई कैदियों की नागरिकता स्पष्ट नहीं होती। ऐसे मामलों में कांसुलर एक्सेस बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सजा पूरी होने के बाद क्या नियम है?
2008 के समझौते के अनुसार यदि किसी कैदी की राष्ट्रीयता की पुष्टि हो चुकी हो और उसकी सजा पूरी हो गई हो, तो दोनों देशों को एक महीने के भीतर उसकी रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए।
हालांकि यदि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद या अन्य संवेदनशील कारणों से जुड़ा हो तो संबंधित देश अपने कानूनों के अनुसार अलग फैसला लेने का अधिकार रखता है।
भारत अब तक कितने नागरिकों को वापस ला चुका है?
भारत सरकार के अनुसार वर्ष 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरों और 78 भारतीय नागरिक कैदियों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
इनमें केवल 2023 से अब तक 500 भारतीय मछुआरे और 20 भारतीय नागरिक कैदी पाकिस्तान से भारत लौटे हैं। भारत का कहना है कि वह अपने नागरिकों की जल्द वापसी के लिए लगातार पाकिस्तान के साथ राजनयिक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है।
दोनों देशों के संबंधों के बावजूद यह प्रक्रिया क्यों जारी रहती है?
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2019 के बाद से पूर्ण राजनयिक संबंध सामान्य नहीं हैं और दोनों देशों में अब केवल Chargé d’Affaires स्तर के अधिकारी ही मिशनों का संचालन कर रहे हैं। इसके बावजूद कैदियों की सूची का आदान-प्रदान लगातार जारी है।
इसका कारण यह है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय आधार पर आधारित है। दोनों देशों के बीच चाहे जितना भी तनाव हो, जेलों में बंद आम नागरिकों और मछुआरों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह समझौता आज भी लागू है।
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच India Pakistan Prisoner Exchange केवल कैदियों की सूची साझा करने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच बची हुई कुछ महत्वपूर्ण मानवीय व्यवस्थाओं में से एक है। हर छह महीने में होने वाला यह आदान-प्रदान उन सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आता है, जिनके अपने लोग वर्षों से सीमा पार जेलों में बंद हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दोनों देश समझौते के अनुरूप सजा पूरी कर चुके कैदियों और मछुआरों की रिहाई तथा स्वदेश वापसी की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी करते हैं।
FAQs
- भारत और पाकिस्तान कैदियों की सूची का आदान-प्रदान क्यों करते हैं?
दोनों देश 2008 के Consular Access Agreement के तहत हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपनी-अपनी जेलों में बंद नागरिकों और मछुआरों की सूची साझा करते हैं। - इस बार भारत और पाकिस्तान ने कितने कैदियों की जानकारी साझा की?
भारत ने 386 नागरिक कैदियों और 53 मछुआरों की सूची पाकिस्तान को दी, जबकि पाकिस्तान ने 52 नागरिक कैदियों और 198 भारतीय मछुआरों की सूची भारत को सौंपी। - Consular Access Agreement क्या है?
यह 2008 में हुआ द्विपक्षीय समझौता है, जिसके तहत गिरफ्तार विदेशी नागरिकों को दूतावास से संपर्क, कानूनी सहायता और नागरिकता सत्यापन जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। - भारत ने पाकिस्तान से क्या मांग की है?
भारत ने 188 भारतीय कैदियों और मछुआरों की जल्द रिहाई, 13 भारतीय नागरिकों को कांसुलर एक्सेस और सभी भारतीय कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। - भारत और पाकिस्तान की जेलों में सबसे ज्यादा मछुआरे ही क्यों होते हैं?
अरब सागर और सर क्रीक क्षेत्र में समुद्री सीमा स्पष्ट न होने तथा अनजाने में सीमा पार कर जाने के कारण बड़ी संख्या में मछुआरे गिरफ्तार हो जाते हैं।

