ईरान ने भारत को ऐसा क्या कहा जिसे दुनिया देखती रह गई? अमेरिका के दबाव के बीच Tehran का बड़ा संदेश

Iran India Relations

Iran Thanks India एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। अमेरिका द्वारा कथित तौर पर देशों से अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का बहिष्कार करने की अपील की खबरों के बीच भारत ने अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा। इसके बाद ईरान ने सार्वजनिक रूप से भारत सरकार और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह इस दोस्ती को कभी नहीं भूलेगा। यह घटनाक्रम सिर्फ एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि India Iran Relations, US Iran Relations और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर भी नई चर्चा छेड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

ईरान ने भारत का धन्यवाद इसलिए किया क्योंकि भारत ने अमेरिका के कथित कूटनीतिक दबाव के बावजूद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजा। ईरानी दूतावास ने इसे दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और मजबूत संबंधों का प्रतीक बताया। वहीं अमेरिका ने इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Iran Thanks India: ईरान ने भारत का धन्यवाद क्यों किया?

भारत की ओर से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तेहरान पहुंचे और अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी।इसके बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक संदेश साझा किया।दूतावास ने कहा कि भारत सरकार, भारतीय जनता और अंतिम संस्कार में शामिल हुए प्रतिनिधिमंडल का ईरान दिल से आभारी है।दूतावास ने कहा कि ईरान की जनता भारत की इस मित्रता, संवेदना और सम्मान को कभी नहीं भूलेगी। साथ ही इसे दोनों देशों के बीच दशकों पुराने रिश्तों को और मजबूत करने वाला कदम बताया।ईरान के अनुसार भारतीय राजनीतिक नेताओं, सांसदों, विद्वानों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है।

Iran India Relations

अमेरिका पर क्या आरोप लगे?

ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया कि अंतिम संस्कार से लगभग एक सप्ताह पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी राजनयिकों ने कई देशों से संपर्क किया।रिपोर्ट के मुताबिक उनसे कहा गया कि अगर वे तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो इसे अमेरिका के खिलाफ “अनफ्रेंडली एक्ट” माना जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ देशों को अमेरिकी सहायता कम करने की चेतावनी भी दी गई।तस्नीम के अनुसार कम से कम 13 देशों ने या तो अपना प्रतिनिधिमंडल वापस ले लिया या उसका स्तर घटा दिया। हालांकि इन दावों पर अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

India Iran Relations पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

भारत और ईरान के संबंध दशकों पुराने हैं। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह और पश्चिम एशिया में रणनीतिक सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की अहम कड़ी रहे हैं।ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है, भारत का तेहरान में प्रतिनिधिमंडल भेजना यह संकेत माना जा रहा है कि भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी कूटनीति में किसी एक पक्ष के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। यही वजह है कि भारत कई बार अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ समानांतर रिश्ते बनाए रखता है।

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद ईरान ने क्या कहा?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि यह अंतिम विदाई नहीं बल्कि अली खामेनेई के विचारों और रास्ते को आगे बढ़ाने की शपथ है।उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल और उसके सहयोगियों ने युद्ध के जरिए क्षेत्र को बदलने की कोशिश की, लेकिन इससे मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता और बढ़ी है।ईरान में खामेनेई के निधन के बाद सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई और देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 

क्या यह भारत की विदेश नीति का बड़ा संकेत है?

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का फैसला उसकी Strategic Autonomy यानी स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।भारत एक ओर अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान जैसे पुराने साझेदारों के साथ भी संवाद बनाए रखना चाहता है।यही संतुलन आने वाले समय में India International News, International Relations और Middle East News में अहम भूमिका निभा सकता है।

 

निष्कर्ष

Iran Thanks India केवल एक धन्यवाद संदेश नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत भी है। अमेरिका के कथित दबाव की खबरों के बीच भारत का तेहरान में प्रतिनिधित्व और उसके बाद ईरान का सार्वजनिक आभार दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दिखाता है। हालांकि अमेरिका पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उसने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी भी नहीं की है। ऐसे में यह घटनाक्रम आने वाले समय में भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर नजर रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।

FAQs:

ईरान ने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के लिए भारत सरकार और भारतीय जनता का धन्यवाद किया।

ईरानी मीडिया ने दावा किया कि अमेरिका ने कई देशों से अंतिम संस्कार में शामिल न होने की अपील की थी। हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद शामिल हुए।

यह दावा ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने किया है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को मजबूत करने और भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाने वाला कदम माना जा सकता है।