उत्तराखंड में Rishikesh Four Lane Project एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस परियोजना के तहत ऋषिकेश-भानियावाला मार्ग को फोर-लेन बनाने का काम चल रहा है, लेकिन अब स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इसका खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह सड़क एक संवेदनशील Elephant Corridor से होकर गुजरती है और इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
Rishikesh Four Lane Project क्या है?
Rishikesh Four Lane Project के तहत ऋषिकेश-भानियावाला सड़क को चार लेन में बदला जा रहा है ताकि यातायात सुगम हो सके और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। इस परियोजना का उद्देश्य सड़क क्षमता बढ़ाना और आवागमन को तेज बनाना बताया गया है।हालांकि, विरोध कर रहे लोगों का दावा है कि जिस मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है, वह राजाजी टाइगर रिजर्व से जुड़े महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

हाथी कॉरिडोर और पेड़ों की कटाई पर क्यों उठे सवाल?
Citizens For Green Doon (CFGD) से जुड़े हिमांशु अरोड़ा ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई ऐसे समय में की जा रही है जब इस मामले से जुड़े कुछ मुद्दे अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए यह स्पष्ट किया था कि हाथी कॉरिडोर और पेड़ों की कटाई से जुड़े मुद्दे पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मौजूदा कार्रवाई न्यायिक निर्देशों के अनुरूप है।अरोड़ा के मुताबिक, इस मामले में आगे कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
पर्यावरणविदों का दावा- जंगल बंटे तो बढ़ेगा इंसान और हाथियों का टकराव,CFGD की इरा चौहान का कहना है कि यह केवल एक Highway Project नहीं बल्कि उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों में से एक का भविष्य तय करने वाला फैसला है। उनके अनुसार यदि जंगलों का बड़े स्तर पर विभाजन हुआ तो हाथियों और अन्य वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित होगी। इसका सीधा असर मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता और व्यापक जनभागीदारी जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने भी उठाया बड़ा सवाल
ऋषिकेश निवासी दिनेश सेमवाल ने कहा कि वे वर्षों से इस सड़क का उपयोग कर रहे हैं और उन्हें कभी ऐसा ट्रैफिक जाम नहीं मिला जिससे फोर-लेन सड़क की तत्काल जरूरत महसूस हो।उनका कहना है कि स्थानीय लोग लंबे समय से वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाकर रह रहे हैं, लेकिन यदि जंगलों का और अधिक विभाजन हुआ तो हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है।
मानसून में पेड़ों की कटाई पर भी विवाद
Social Development for Communities Foundation के अनूप नौटियाल ने सवाल उठाया कि मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बरसात का मौसम आमतौर पर वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने का समय माना जाता है। ऐसे समय में बड़े स्तर पर पेड़ काटना पर्यावरण और सार्वजनिक नीति दोनों के लिहाज से चिंताजनक है।उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में लगातार वन भूमि को विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ रहा है।
विरोध प्रदर्शन और ‘Black Harela’ का ऐलान
परियोजना का विरोध कर रहे नागरिकों ने देहरादून स्थित NHAI कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।साथ ही उन्होंने इस वर्ष हरेला पर्व को “Black Harela” के रूप में मनाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई और जंगलों के नुकसान की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा।
क्या कह रहे हैं प्रदर्शनकारी?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले सभी संभावित वैकल्पिक मार्गों का वैज्ञानिक और पारदर्शी मूल्यांकन किया जाए। उनका मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसी परियोजनाएं पर्यावरण और वन्यजीवों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
निष्कर्ष
Rishikesh Four Lane Project अब केवल सड़क चौड़ीकरण की परियोजना नहीं रह गई है, बल्कि यह विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। एक ओर सरकार और NHAI सड़क अवसंरचना को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नागरिक संगठन हाथी कॉरिडोर, जंगलों और जैव विविधता की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसले देखने को मिल सकते हैं।
FAQs:
यह परियोजना ऋषिकेश-भानियावाला सड़क को चार लेन में विकसित करने के लिए शुरू की गई है ताकि यातायात सुगम बनाया जा सके।
विरोध करने वालों का कहना है कि सड़क एक महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर से होकर गुजरती है और इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है।
नागरिक चाहते हैं कि परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले सभी वैकल्पिक मार्गों का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन किया जाए।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार हाथी कॉरिडोर, जंगल, जैव विविधता और मानव-वन्यजीव संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है।
उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से इस विरोध पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
परियोजना का उद्देश्य सड़क क्षमता बढ़ाना, यातायात सुगम बनाना और भविष्य की परिवहन जरूरतों को पूरा करना है।
हां। नागरिक संगठनों ने हाथी कॉरिडोर, जंगलों के विभाजन, पेड़ों की कटाई और जैव विविधता पर संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।

