महाराष्ट्र के ‘Ghost Hostels’ ने खोली सरकारी सिस्टम की बड़ी पोल, बिना छात्रों के मिलते रहे करोड़ों रुपये

Maharashtra Ghost Hostels

Maharashtra Ghost Hostels मामला देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र में छह ऐसे हॉस्टल वर्षों तक सरकारी फंड लेते रहे, जहां एक भी छात्र नहीं रह रहा था। हैरानी की बात यह है कि इन गैर-कार्यरत हॉस्टलों को चार वर्षों में ₹1.62 करोड़ की राशि जारी की गई। रिपोर्ट में केवल फर्जी हॉस्टलों का ही नहीं, बल्कि सरकारी छात्रावासों में सुरक्षा, स्वच्छता, स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं की भी गंभीर कमियां उजागर हुई हैं।

CAG Report में क्या सामने आया?

10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश Compliance Audit Report 2024 के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग ने छह ऐसे हॉस्टलों को लगातार फंड जारी रखा जो वास्तविक रूप से संचालित ही नहीं हो रहे थे। राज्य में मार्च 2024 तक:

  • 443 सरकारी छात्रावास
  • 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त छात्रावास
  • 1.62 लाख से अधिक छात्रों के लिए व्यवस्था
  • ऑडिट अवधि में कुल ₹2,321 करोड़ का खर्च

इसके बावजूद कई हॉस्टलों में छात्र नहीं थे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मौजूदगी दिखाई गई।

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Maharashtra Ghost Hostels: आखिर कैसे हुआ करोड़ों रुपये का भुगतान?

CAG रिपोर्ट के अनुसार जालना जिले के मोदिखान हॉस्टल का भवन जर्जर और बंद मिला। मौके पर कोई छात्र नहीं था, लेकिन रिकॉर्ड में 38 छात्र और एक अधीक्षक दर्ज थे। इसके बावजूद चार वर्षों तक लगभग ₹18 लाख का मानदेय जारी किया गया।इसी तरह जाफराबाद के एक हॉस्टल में 24 छात्रों की क्षमता होने के बावजूद कमरे खाली मिले और बिस्तरों पर धूल जमी हुई थी।ऑडिट में ऐसे कुल छह Maharashtra Ghost Hostels पाए गए

  • जालना में 4
  • बुलढाणा में 1
  • लातूर में 1

यह मामला संभावित Maharashtra Hostel Scam और Government Hostel Scam की ओर इशारा करता है, जिसमें सरकारी धन का गलत उपयोग हुआ।सिर्फ Ghost Hostels ही नहीं, पूरी व्यवस्था में मिली कई गंभीर खामियां! CAG ने बताया कि कई सरकारी छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं थीं।

रिपोर्ट के अनुसार कई हॉस्टलों में:

  • डाइनिंग हॉल नहीं थे।
  • लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब नहीं थीं।
  • CCTV कैमरे नहीं लगे थे।
  • बिजली बैकअप की व्यवस्था नहीं थी।
  • नियमित मेडिकल जांच नहीं होती थी।
  • साफ पीने का पानी उपलब्ध नहीं था।
  • भोजन की गुणवत्ता खराब थी।
  • पर्याप्त रोशनी और स्वच्छ शौचालयों की कमी थी।

चार छात्रावासों में छात्रों को कुर्सी और मेज न होने के कारण जमीन पर बैठकर खाना खाना पड़ रहा था।

दिव्यांग छात्रों के नियमों का भी हुआ उल्लंघन

ऑडिट में पाया गया कि कुछ छात्रावासों में दिव्यांग छात्रों को ऊपरी मंजिलों पर कमरे दिए गए, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर कमरा मिलना चाहिए। अहिल्यानगर, धाराशिव, जालना और नागपुर के कुछ हॉस्टलों में यह अनियमितता सामने आई।

 

करोड़ों रुपये का बजट भी खर्च नहीं कर सकी सरकार

रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में सरकारी छात्रावासों के लिए आवंटित ₹487 करोड़ में से ₹56.65 करोड़ खर्च ही नहीं किए गए। इसके कारण:

  • 117 तालुकों के लगभग 8,930 छात्र छात्रावास सुविधा से वंचित रहे।
  • 49 सरकारी हॉस्टल बिना अधीक्षक के चल रहे थे।
  • पांच बालिका छात्रावासों में पुरुष अधीक्षक नियुक्त थे।
  • 280 हॉस्टलों में लगाए गए बायोमेट्रिक सिस्टम में केवल 46 ही काम कर रहे थे।

इसके अलावा 2020 तक 500 सरकारी हॉस्टल बनाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका। राज्य में केवल 443 सरकारी हॉस्टल ही स्थापित हो पाए।

 

छात्रों और Student Welfare Scheme पर क्या पड़ा असर?

जब सरकारी धन गैर-कार्यरत हॉस्टलों पर खर्च होता है, तो वास्तविक जरूरतमंद छात्रों तक सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं। इससे:

  • गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
  • छात्रावास की कमी के कारण कई छात्रों को शिक्षा छोड़ने तक की नौबत आ सकती है।
  • Student Welfare Scheme का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।
  • सरकारी योजनाओं पर लोगों का भरोसा भी प्रभावित होता है।

यही कारण है कि यह मामला केवल Public Fund Misuse नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।

 

निष्कर्ष

Maharashtra Ghost Hostels मामला केवल छह फर्जी हॉस्टलों तक सीमित नहीं है। CAG की रिपोर्ट ने यह दिखाया है कि छात्र कल्याण योजनाओं में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही की कितनी जरूरत है। यदि समय रहते ऐसी अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं होती, तो सरकारी योजनाओं का लाभ उन छात्रों तक नहीं पहुंच पाएगा जिनके लिए वे बनाई गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस रिपोर्ट के बाद क्या कार्रवाई करती है और दोषियों के खिलाफ कितनी सख्ती दिखाई जाती है।

FAQs:

CAG की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महाराष्ट्र के छह ऐसे हॉस्टल चार वर्षों तक सरकारी फंड लेते रहे, जहां एक भी छात्र नहीं रह रहा था।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपने Compliance Audit के दौरान भौतिक निरीक्षण और रिकॉर्ड जांच में इन हॉस्टलों का खुलासा किया।

रिपोर्ट के अनुसार चार वर्षों में इन गैर-कार्यरत हॉस्टलों को लगभग ₹1.62 करोड़ की सरकारी राशि जारी की गई।

इस मामले का खुलासा Comptroller and Auditor General (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।

फर्जी हॉस्टलों पर धन खर्च होने से हजारों जरूरतमंद छात्र छात्रावास सुविधा से वंचित रहे और छात्र कल्याण योजनाओं का लाभ प्रभावित हुआ।