Rahul Gandhi Five Demands: छात्रों के समर्थन में PM आवास के बाहर धरना, राहुल-प्रियंका हिरासत में; केंद्र के सामने रखीं पांच मांगें

Rahul Gandhi Five Demands

Rahul Gandhi Five Demands: NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को दिल्ली की सियासत गरमा गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस सहित विपक्ष के कई नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के पास धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रदर्शन में शामिल कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

हिरासत में रहते हुए राहुल गांधी ने एक वीडियो बयान जारी कर केंद्र सरकार के सामने पांच मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लेने, पुलिस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री से माफी, संसद में विस्तृत चर्चा तथा शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार की मांग शामिल थी।

यह प्रदर्शन Cockroach Janta Party यानी CJP के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन और 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के समर्थन में आयोजित किया गया था। पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, परीक्षाओं की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर केंद्र बनाम विपक्ष की बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन गया है।

छात्र आंदोलन के समर्थन में अचानक PM आवास पहुंचा विपक्ष

मंगलवार को कांग्रेस नेताओं की गतिविधियां सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम की तरह शुरू हुई थीं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन के अवसर पर उनके आवास पर एकत्र हुए थे। इसके बाद नेता अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास की ओर रवाना हो गए।

विपक्षी नेताओं के इस कदम की जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी। इससे सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया को भी प्रदर्शन की योजना की भनक नहीं लग सकी। राहुल गांधी और दूसरे नेता लोक कल्याण मार्ग के पास पहुंचे और सड़क पर बैठकर छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगाने लगे।

कांग्रेस का आरोप था कि एक दिन पहले संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। विपक्ष ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हुआ था और कई लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं।

राहुल और प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लिया

धरना समाप्त कराने के लिए दिल्ली पुलिस ने पहले विपक्षी नेताओं से स्थान खाली करने को कहा। प्रदर्शन जारी रहने पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी प्रियंका से मिलने पुलिस स्टेशन पहुंचीं। राहुल और प्रियंका को रात करीब नौ बजे रिहा कर दिया गया।

राहुल गांधी को पुलिस द्वारा धरनास्थल से हटाए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। कांग्रेस ने इसे शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध को दबाने की कार्रवाई बताया, जबकि सरकार और भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक प्रदर्शन में बदल रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत ने छात्र आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।

 

हिरासत से राहुल गांधी ने रखीं पांच मांगें

हिरासत में रहते हुए राहुल गांधी ने वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार के सामने पांच मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि मामला केवल एक परीक्षा या एक पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में छात्रों के विश्वास से जुड़ा है।

राहुल गांधी की पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की थी। उन्होंने शिक्षा मंत्री को परीक्षा व्यवस्था में कथित विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया। गृह मंत्री का इस्तीफा मांगते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल छात्र आंदोलन को दबाने के लिए किया गया।

दूसरी मांग 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित रूप से हमला करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की थी। राहुल गांधी ने कहा कि अपनी शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उठाने वाले विद्यार्थियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की थी। राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

चौथी मांग संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस कराने की थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन, छात्रों की शिकायतों और पुलिस कार्रवाई पर पूरी चर्चा होनी चाहिए।

पांचवीं मांग शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में जल्द से जल्द व्यापक सुधार करने की थी। इसमें परीक्षाओं की गोपनीयता, पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करने की बात शामिल थी।

इन पांच मांगों के माध्यम से राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन को परीक्षा विवाद से आगे बढ़ाकर केंद्रीय मंत्रियों की जवाबदेही, पुलिस कार्रवाई और संसदीय बहस से जोड़ दिया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग CJP आंदोलन पहले से कर रहा था, लेकिन अमित शाह का इस्तीफा और प्रधानमंत्री से माफी की मांग जोड़कर कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया।

 

शिक्षा व्यवस्था पर राहुल ने उठाए चार बड़े सवाल

अपने वीडियो बयान में राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली कमजोर क्यों हो रही है, परीक्षा के पेपर लगातार लीक क्यों हो रहे हैं, शिक्षा इतनी महंगी क्यों है और बच्चों को पढ़ाने के लिए परिवारों को आर्थिक रूप से टूटने जैसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ता है।

राहुल गांधी ने कहा कि ये छात्रों और उनके परिवारों से जुड़े वैध सवाल हैं तथा इन्हें उठाने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है।

राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद में इस विषय को उठाता रहेगा। उनका कहना था कि केंद्र सरकार को केवल किसी एक परीक्षा की जांच तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के घटते भरोसे पर जवाब देना चाहिए।

 

पेपर लीक से देशव्यापी आंदोलन तक पहुंचा विवाद

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताएं और पेपर लीक के मामले हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद से लाखों विद्यार्थी प्रभावित हुए और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे।

इसी असंतोष के बीच Cockroach Janta Party एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में सामने आई। बाद में यह शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोजगारी और परीक्षा सुधार की मांग करने वाले युवा आंदोलन में बदल गई। CJP ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च का आह्वान किया था। पुलिस की रोक के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक दिल्ली में जमा हुए।

छात्रों और पुलिस के बीच टकराव के बाद आंदोलन को विपक्षी दलों का खुला समर्थन मिलने लगा। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। विपक्ष का कहना है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवाद युवाओं के भविष्य और भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े हैं।

 

धरनास्थल पर राहुल से मिले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

राहुल गांधी के धरने के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह प्रदर्शनस्थल पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी से करीब आधे घंटे तक बातचीत की और उनकी मांगें सुनीं।

मुलाकात के बाद जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार NEET और छात्र आंदोलन से जुड़े विषयों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने राहुल गांधी पर अपने पहले के रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया।

जितेंद्र सिंह के अनुसार शुरुआत में राहुल गांधी संसद में बहस की मांग कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को प्रमुख मांग बना दिया। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ नेता का अपनी बात बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।

सरकार की ओर से इस बातचीत को समाधान तलाशने का प्रयास बताया गया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि केवल चर्चा का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और सरकार को जिम्मेदारी तय करनी होगी। राहुल गांधी के प्रदर्शनस्थल पर केंद्रीय मंत्री का पहुंचना यह संकेत भी था कि सरकार छात्र आंदोलन और उससे बन रहे राजनीतिक दबाव को पूरी तरह नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं थी।

 

धर्मेंद्र प्रधान बोले- छात्रों के समाधान नहीं, सुर्खियां चाहता है कांग्रेस

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार रात राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विस्तृत संसदीय चर्चा के लिए सहमति जताई थी, लेकिन कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस के स्थान पर राजनीतिक प्रदर्शन चुना।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य छात्रों के लिए समाधान खोजना नहीं, बल्कि टकराव पैदा कर राजनीतिक सुर्खियां हासिल करना है। उन्होंने राहुल गांधी पर छात्रों का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

शिक्षा मंत्री ने इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था और छात्रों की वास्तविक चिंताओं पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि सरकार ने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री से माफी, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा छात्रों के विरुद्ध सभी मामले वापस लेने जैसी मांगों को स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं दिया।

भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस छात्र आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का कहना है कि जब पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा हो, तब राजनीतिक दलों का चुप रहना संभव नहीं है।

 

संसद तक पहुंची केंद्र और विपक्ष की लड़ाई

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर बहस चाहता है। बुधवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

विरोध के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और सरकार पर बहस कराने का दबाव बढ़ा। शिक्षा मंत्री ने चर्चा और सुधारों की बात कही, लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया कि वह केवल सामान्य आश्वासन से संतुष्ट नहीं होगा।

इस विवाद के कारण संसद के भीतर दो समानांतर मुद्दे खड़े हो गए। पहला मुद्दा परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और पेपर लीक रोकने का है। दूसरा मुद्दा प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस के व्यवहार और राजनीतिक जवाबदेही का है।

सरकार बहस और परीक्षा सुधार की बात कर रही है, जबकि विपक्ष केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे तथा प्रधानमंत्री से माफी पर जोर दे रहा है। इसलिए दोनों पक्षों के बीच तत्काल समझौते की संभावना कम दिखाई देती है।

 

विपक्ष के भीतर भी प्रदर्शन को लेकर मतभेद उभरे

राहुल गांधी के PM आवास के बाहर धरने को लेकर विपक्ष के कुछ दलों के बीच मतभेद भी सामने आए। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाया कि सरकार ने राहुल गांधी के धरने के कुछ समय बाद ही केंद्रीय मंत्री को बातचीत के लिए भेज दिया, जबकि CJP और सोनम वांगचुक के लंबे आंदोलन को उतनी जल्दी प्रतिक्रिया नहीं मिली।

AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्रदर्शन मूल छात्र आंदोलन को कमजोर कर सकता है। कांग्रेस समर्थकों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी की भागीदारी से छात्रों की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई।

इस राजनीतिक खींचतान से यह भी स्पष्ट हुआ कि विपक्ष छात्र आंदोलन के समर्थन में तो है, लेकिन आंदोलन के नेतृत्व, रणनीति और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर सभी दलों की राय समान नहीं है।

 

युवाओं की नाराजगी ने सरकार के सामने बढ़ाई चुनौती

CJP का आंदोलन किसी पारंपरिक राजनीतिक दल या छात्र संगठन से शुरू नहीं हुआ था। यह सोशल मीडिया पर उभरा और धीरे-धीरे परीक्षा व्यवस्था तथा बेरोजगारी से नाराज युवाओं का मंच बन गया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आंदोलन का प्रभाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में शहरी, शिक्षित और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा शामिल हैं। यही वर्ग लंबे समय तक भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन आधार माना जाता रहा है।

पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा कराने और नौकरी की कमी से जुड़ी निराशा अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है। विपक्ष इसे युवा मतदाताओं से सीधे जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

राहुल गांधी का धरना और हिरासत इस आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ बनकर सामने आया। इससे पहले आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे थे, लेकिन अब यह संसद और प्रमुख विपक्षी दलों के एजेंडे में शामिल हो गया है।

 

पांच मांगों ने कांग्रेस की रणनीति की दिशा साफ की

कांग्रेस ने आने वाले दिनों की अपनी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी परीक्षा सुधार की मांग के साथ-साथ अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही, प्रधानमंत्री की माफी और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को आगे बढ़ाएगी।

कांग्रेस की कोशिश छात्र आंदोलन को व्यापक युवा असंतोष से जोड़ने की है। पार्टी शिक्षा की बढ़ती लागत, बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में देरी जैसे मुद्दों को सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में पेश कर रही है।

सरकार दूसरी ओर चर्चा, कानूनी कार्रवाई और परीक्षा सुधारों की बात करते हुए इस्तीफे की मांग को राजनीतिक करार दे रही है। दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि यह विवाद एक दिन के धरने या हिरासत के साथ समाप्त नहीं होगा।

 

FAQ

 

1. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने कौन-सी पांच मांगें रखीं?

राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों पर कथित हमला करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और छात्रों के खिलाफ मामले वापस लेने, प्रधानमंत्री से माफी, संसद में विस्तृत चर्चा तथा शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार की मांग की।

 

2. राहुल गांधी को हिरासत में क्यों लिया गया?

राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के पास दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे। पुलिस ने निषिद्ध और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रदर्शन जारी रखने के कारण उन्हें तथा कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।

 

3. कांग्रेस का धरना किस मुद्दे को लेकर था?

कांग्रेस का धरना NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं और 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था।

 

4. सरकार ने राहुल गांधी की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्र सरकार ने संसद में NEET और छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की मांग खारिज करते हुए कांग्रेस पर छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल करने और समाधान के बजाय राजनीतिक टकराव पैदा करने का आरोप लगाया।

 

5. इस विरोध प्रदर्शन का राजनीतिक महत्व क्या है?

इस प्रदर्शन ने छात्र आंदोलन को संसद और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंचा दिया। कांग्रेस और विपक्ष इसे युवाओं की शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े संकट के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है।

 

6. राहुल गांधी के साथ किन नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया?

राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और कुछ अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भी छात्र आंदोलन की मांगों का समर्थन किया।