UN Hunger Report: भारत ने 42% घटाई भूख, पाकिस्तान में 37% बढ़ी! आखिर पड़ोसी देश के करोड़ों लोग क्यों हैं भूखे?

UN Hunger Report

संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम UN Hunger Report ने भारत और पाकिस्तान की विकास यात्रा के बीच बड़ा अंतर उजागर किया है। जहां भारत ने पिछले दो दशकों में कुपोषण और भूख से जूझ रहे लोगों की संख्या में लगभग 42% की कमी दर्ज की है, वहीं पाकिस्तान में यही संख्या लगभग 37% बढ़ गई है। रिपोर्ट के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि जब दुनिया भूख कम करने में सफल हो रही है, तब पाकिस्तान इस मामले में एक चिंताजनक अपवाद बनकर उभरा है।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की प्राथमिकताएं उसके विकास के आंकड़ों में दिखाई देती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों, रक्षा खर्च और मानव विकास के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

UN Hunger Report में भारत को लेकर क्या कहा गया?

संयुक्त राष्ट्र की “State of Food Security and Nutrition in the World 2026″ रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने भूख और कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्य आंकड़े:

  • 2004-2006 में भारत में 24.39 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार थे।
  • 2023-2025 तक यह संख्या घटकर 14.25 करोड़ रह गई।
  • यानी लगभग 41.6% की कमी दर्ज की गई।
  • भारत में भूख की दर अब 10% से नीचे पहुंच चुकी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की खाद्य सुरक्षा योजनाओं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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भारत में भूख कम होने के पीछे क्या कारण हैं?

भारत की सफलता के पीछे कई सरकारी योजनाओं और नीतिगत प्रयासों का योगदान माना जा रहा है।
इनमें प्रमुख हैं:

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम
  • कृषि क्षेत्र में उत्पादकता वृद्धि
  • गरीब परिवारों को मुफ्त राशन वितरण
  • पोषण और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम

वर्तमान में लगभग 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है।

पाकिस्तान में भूख क्यों बढ़ रही है?

UN Hunger Report के अनुसार, पाकिस्तान में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। मुख्य आंकड़े:

  • 2004-2006 में पाकिस्तान में 2.96 करोड़ लोग कुपोषित थे।
  • 2023-2025 में यह संख्या बढ़कर 4.04 करोड़ हो गई।
  • यानी लगभग 37% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • स्वस्थ भोजन का खर्च वहन न कर पाने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान एशिया के उन देशों में शामिल है जहां कुपोषण की स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है।

 

क्या पाकिस्तान का रक्षा खर्च और भूख का संकट जुड़े हुए हैं?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट सीधे तौर पर यह नहीं कहती कि पाकिस्तान में भूख बढ़ने का कारण उसका सैन्य खर्च है। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों के आधार पर कई विश्लेषकों ने यह तर्क दिया है कि पाकिस्तान ने मानव विकास की तुलना में रक्षा और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं को अधिक महत्व दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  • पाकिस्तान ने 2026-27 के लिए लगभग 10.8 अरब डॉलर का रक्षा बजट घोषित किया है।
  • रक्षा बजट में लगभग 18% की वृद्धि की गई है।
  • रक्षा खर्च GDP के लगभग 2.9% के बराबर है।
  • पाकिस्तान दुनिया की सबसे बड़ी स्थायी सेनाओं में से एक रखता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रक्षा खर्च और भूख के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध स्थापित करना एक जटिल आर्थिक और नीतिगत विषय है, जिस पर विशेषज्ञों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।

 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किन चुनौतियों से जूझ रही है?

पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रमुख समस्याएं:

  • IMF सहायता कार्यक्रम पर निर्भरता
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
  • उच्च मुद्रास्फीति
  • खाद्य महंगाई
  • कमजोर आर्थिक विकास
  • बढ़ता वित्तीय घाटा

इसी बीच पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक एवं सुरक्षा मुद्दों में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसने उसकी नीतिगत प्राथमिकताओं पर भी चर्चा को जन्म दिया है।

 

UN Hunger Report वैश्विक स्तर पर क्या कहती है?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार:

  • वर्ष 2025 में विश्व की लगभग 7.8% आबादी भूख का सामना कर रही थी।
  • यह आंकड़ा 2024 की तुलना में कम है।
  • वैश्विक स्तर पर लगातार तीसरे वर्ष भूख में गिरावट दर्ज की गई है।
  • एशिया में भूख की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
  • भारत और चीन जैसे देशों ने करोड़ों लोगों को कुपोषण से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

विशेषज्ञ पाकिस्तान को लेकर क्या कहते हैं?

पाकिस्तान के कई पूर्व राजनयिकों, पत्रकारों और लेखकों ने वर्षों से यह तर्क दिया है कि देश को शिक्षा, रोजगार सृजन और मानव विकास पर अधिक निवेश करने की आवश्यकता है।पूर्व पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी, पत्रकार अहमद राशिद और लेखिका आयशा सिद्दीका जैसे विशेषज्ञों ने अपनी पुस्तकों और लेखों में पाकिस्तान की विकास प्राथमिकताओं और सैन्य प्रभाव को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।उनका मानना है कि आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए संस्थागत सुधार तथा मानव संसाधनों में निवेश अत्यंत आवश्यक है।

 

निष्कर्ष

UN Hunger Report यह स्पष्ट करती है कि पिछले दो दशकों में भारत ने भूख और कुपोषण के खिलाफ महत्वपूर्ण प्रगति की है, जबकि पाकिस्तान को अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी देश की दीर्घकालिक सफलता केवल उसकी सैन्य या कूटनीतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के जीवन स्तर, पोषण, शिक्षा और आर्थिक विकास से तय होती है। आने वाले वर्षों में पाकिस्तान अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं में क्या बदलाव करता है, यह उसके विकास की दिशा तय करेगा।

FAQs:

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले दो दशकों में कुपोषण और भूख से प्रभावित लोगों की संख्या में लगभग 42% की कमी दर्ज की है।

खाद्य सुरक्षा योजनाओं, मुफ्त राशन वितरण और कृषि क्षेत्र में सुधारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट में आर्थिक चुनौतियों और खाद्य असुरक्षा के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। विभिन्न विशेषज्ञ मानव विकास और आर्थिक नीतियों को महत्वपूर्ण कारक मानते हैं।

रिपोर्ट मुख्य रूप से भूख और खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित है। रक्षा खर्च से संबंधित विश्लेषण विभिन्न आर्थिक अध्ययनों और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर किए जाते हैं।

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई “State of Food Security and Nutrition in the World” रिपोर्ट है।