देशभर में पेपर लीक के मामलों के बीच अब उत्तराखंड से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Uttarakhand Technical University Paper Leak के कारण वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) को दो सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक बाहरी पेपर सेटर ने परीक्षा से पहले ही छात्रों के साथ वही सवाल साझा कर दिए थे, जो बाद में प्रश्नपत्र में पूछे गए। विश्वविद्यालय की जांच में प्रथम दृष्टया यह मामला सही पाया गया है, जिसके बाद संबंधित प्रोफेसर को सात वर्षों के लिए विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही, उन्हें उनके संस्थान से तत्काल प्रभाव से सेवा से भी हटा दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी. के. पटेल के अनुसार, विश्वविद्यालय को Machine Learning for Internet of Things विषय की परीक्षा को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले बाहरी विशेषज्ञ ने परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्न उपलब्ध कराए थे।
जांच के दौरान पाया गया कि:
- प्रश्नपत्र में शामिल कई सवाल पहले से छात्रों के साथ साझा किए गए थे।
- सवाल संस्थान के आंतरिक पोर्टल और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए थे।
- वही प्रोफेसर दूसरे विषय का प्रश्नपत्र भी तैयार कर रहे थे, जिसके लीक होने की आशंका जताई गई।
इसके बाद दोनों परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया गया।

Uttarakhand Technical University Paper Leak में कौन-कौन सी परीक्षाएं रद्द हुई हैं?
विश्वविद्यालय ने निम्नलिखित दो विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं:
- Machine Learning for Internet of Things (ML-IoT)
- Electromagnetic Field Theory
इन परीक्षाओं का प्रभाव विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 संस्थानों के छात्रों पर पड़ेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित छात्रों को तुरंत इस निर्णय की जानकारी दें, ताकि वे दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
छात्रों को सवाल कैसे मिले?
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक डॉ. टी. एस. सिद्धू के अनुसार, संबंधित सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले लगभग 50 प्रश्न छात्रों के साथ एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि:
- साझा किए गए कई प्रश्न हूबहू परीक्षा पत्र में मौजूद थे।
- संस्थान को 8 जुलाई को शिकायत प्राप्त हुई थी।
- 10 जुलाई को जांच समिति गठित की गई।
- 13 जुलाई को समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- विश्वविद्यालय ने 22 जुलाई को प्रोफेसर को दोषी मानते हुए कार्रवाई की।
दोषी प्रोफेसर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पेपर लीक मामले को गंभीर पेशेवर और नैतिक उल्लंघन मानते हुए संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ कई कठोर कदम उठाए गए हैं। कार्रवाई के तहत:
- उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
- अगले सात वर्षों तक उन्हें विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा संबंधी गतिविधि में शामिल नहीं किया जाएगा।
- संस्थान ने पहले ही उन्हें तीन वर्षों तक प्रश्नपत्र तैयार करने से प्रतिबंधित कर दिया था।
- विश्वविद्यालय ने बाद में इस अवधि को बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया।
दोबारा परीक्षा कब आयोजित होगी?
विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि दोनों रद्द की गई परीक्षाओं का पुनः आयोजन अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में किया जाएगा। छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बातें:
- नई परीक्षा तिथि जल्द जारी की जाएगी।
- सभी संबद्ध संस्थानों को छात्रों को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- छात्रों को दोबारा परीक्षा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
उत्तराखंड में पहले भी सामने आ चुके हैं पेपर लीक के मामले
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई भर्ती और परीक्षा विवाद सामने आ चुके हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
- UKPSC पटवारी और अकाउंटेंट परीक्षा पेपर लीक मामला।
- उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती परीक्षा विवाद।
- भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर राज्यव्यापी प्रदर्शन।
इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने नकल और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून भी लागू किए थे।
निष्कर्ष
Uttarakhand Technical University Paper Leak का यह मामला एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विश्वविद्यालय द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षाएं रद्द करना और दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि परीक्षा सुरक्षा से कोई समझौता लाखों छात्रों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है। अब छात्रों की निगाहें अगस्त में होने वाली पुनः परीक्षा और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
FAQs
Q1. उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में पेपर लीक का मामला क्या है?
आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक बाहरी पेपर सेटर ने परीक्षा से पहले छात्रों को वही प्रश्न साझा कर दिए थे, जो बाद में परीक्षा में पूछे गए।
Q2. किन परीक्षाओं को रद्द किया गया है?Machine Learning for Internet of Things और Electromagnetic Field Theory विषयों की परीक्षाएं रद्द की गई हैं।
Q3. पेपर लीक की पुष्टि कैसे हुई?
विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थान द्वारा गठित जांच समितियों ने शिकायत की जांच के बाद प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि की।
Q4. क्या इस मामले में किसी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में FIR दर्ज होने का उल्लेख नहीं किया गया है।
Q5. रद्द की गई परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब होगा?
विश्वविद्यालय ने अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है।
Q6. पेपर लीक के लिए किसे जिम्मेदार माना जा रहा है?
विश्वविद्यालय ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले संबंधित सहायक प्रोफेसर को जिम्मेदार मानते हुए सात वर्षों के लिए परीक्षा संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया है।

