Assam Floods: असम में बाढ़ से 31 मौतें, 5.65 लाख लोग प्रभावित; सरकार देगी ₹4 लाख मुआवजा

Assam Floods

असम में लगातार बारिश और नदियों के उफान ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 22 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 24 घंटे में 31 लोगों की मौत हुई, जिससे इस साल बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 31 पहुंच गई। 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, 872 गांव पानी में डूब गए और 24 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की तत्काल सहायता देने की घोषणा की।

शिवसागर में सबसे ज्यादा तबाही, एक दिन में गईं 13 जानें

बाढ़ से हुई 31 मौतों में सबसे ज्यादा 13 लोग शिवसागर जिले में मारे गए। मृतकों में चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे। चराइदेव में पांच लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे थे। गोलाघाट में दो और जोरहाट में एक महिला की जान गई। अचानक बढ़े पानी और तेज बहाव के कारण कई लोग अपने घरों से सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच सके।

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शिवसागर इस बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा, जहां करीब 3.59 लाख लोग संकट में फंसे। इसके बाद जोरहाट में लगभग 87,662 और चराइदेव में 72,646 लोग प्रभावित हुए। सोमवार तक लगभग 3.63 लाख लोग प्रभावित थे, लेकिन एक दिन के भीतर यह संख्या बढ़कर 5.64 लाख से अधिक हो गई।

बिस्वनाथ, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, कार्बी आंगलोंग, नगांव, शिवसागर और तिनसुकिया सहित कई जिलों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया। गांवों, सड़कों और खेतों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

 

मुख्यमंत्री बोले- प्रभावित परिवार इस संकट में अकेले नहीं

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपर असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का दौरा किया। शिवसागर में पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और सरकार राहत, पुनर्वास तथा आजीविका दोबारा खड़ी करने के हर चरण में प्रभावित लोगों के साथ रहेगी।

उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि तत्काल देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन परिवारों के जरूरी दस्तावेज बाढ़ में बह गए या खराब हो गए हैं, सरकार उन्हें दोबारा जारी कराने की व्यवस्था करेगी।

चराइदेव के एक राहत शिविर में लोगों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने गंभीर बीमार, बुजुर्ग और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को अस्पताल पहुंचाने का आश्वासन दिया। उनके मुताबिक मेडिकल टीमें और आवश्यक सेवाएं प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।

 

पानी में घिरे गांवों तक राहत पहुंचाना बनी सबसे बड़ी चुनौती

कई प्रभावित लोगों ने भोजन और राहत सामग्री समय पर नहीं मिलने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि पानी में पूरी तरह डूबे गांवों तक पहुंचने में प्रशासन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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कई जगह सड़क संपर्क टूट चुका है और नाव या दूसरे साधनों से भी घरों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अनेक इलाकों तक अब तक नहीं पहुंच सका है, लेकिन पानी कम होते ही वहां राहत भेजी जाएगी। सरकार के अनुसार राहत शिविरों तक पहुंच चुके लोगों के लिए भोजन और जरूरी सामान की कमी नहीं है।

 

273 राहत केंद्रों में हजारों लोगों ने ली शरण

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार दस जिलों में कुल 273 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे थे। इनमें 71 राहत शिविरों में 12,284 विस्थापित लोगों को ठहराया गया, जबकि 202 केंद्रों के जरिए प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही थी।

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 5,011.07 क्विंटल चावल, 956.53 क्विंटल दाल, 265.18 क्विंटल नमक और 20,115.42 लीटर सरसों का तेल वितरित किया गया। राहत सामग्री के साथ पीने का पानी, दवाइयां, बच्चों का भोजन और पशुओं के लिए चारा पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है।

 

सेना से लेकर NDRF तक, बचाव अभियान में उतरीं कई एजेंसियां

भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, पुलिस और नागरिक प्रशासन संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं।

चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर सहित अलग-अलग इलाकों से 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। नावों और अन्य बचाव साधनों के जरिए बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता के आधार पर निकाला गया।

प्रशासन ने सेना और वायुसेना को भी जरूरत पड़ने पर व्यापक निकासी अभियान के लिए तैयार रहने को कहा है। रेल पटरियों पर पानी भरने के कारण कई रेल सेवाओं को रद्द, डायवर्ट या बीच रास्ते तक सीमित करना पड़ा। दूरसंचार विभाग ने शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में मोबाइल कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए 24 जुलाई तक इंट्रा-सर्किल रोमिंग सुविधा सक्रिय की।

 

872 गांव पानी में, 24 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद

राज्यभर में 872 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। लगभग 24,210.35 हेक्टेयर फसल क्षेत्र डूब गया, जिससे धान और दूसरी मौसमी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

कई जिलों में तटबंध टूटे या क्षतिग्रस्त हुए हैं। सड़कों, पुलों, बिजली व्यवस्था और ग्रामीण संपर्क मार्गों को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का असर केवल लोगों पर ही नहीं, बल्कि पशुधन पर भी पड़ा है। करीब 1,85,029 पालतू पशु और पक्षी प्रभावित बताए गए।

फसल और पशुधन की क्षति से बाढ़ उतरने के बाद भी ग्रामीण परिवारों के सामने आजीविका का संकट बने रहने की आशंका है। सरकार ने पानी कम होने के बाद नुकसान का विस्तृत सर्वे कराने और पुनर्वास सहायता देने का भरोसा दिया है।

 

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं कई नदियां

ब्रह्मपुत्र नदी नीमातिघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। उसकी सहायक बूढ़ी दिहिंग खोवांग में और धनसिरी नदी गोलाघाट तथा नुमालीगढ़ में खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गई।

शिवसागर में दिखौ नदी और नांगलामुराघाट में दिसांग नदी अपने सर्वोच्च बाढ़ स्तर से भी ऊपर बह रही थीं। नदियों में लगातार बढ़ते पानी और आसपास के राज्यों से आने वाले तेज प्रवाह ने निचले इलाकों में स्थिति को और गंभीर बनाया।

 

अगले कई दिन भारी बारिश का खतरा

भारतीय मौसम विभाग के क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 23 जुलाई को असम और मेघालय के लिए बहुत भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली और तेज हवा की चेतावनी जारी की। 24 से 29 जुलाई तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग की चेतावनी के कारण प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, कमजोर तटबंधों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश होने पर पहले से पानी में डूबे इलाकों में जलस्तर और बढ़ सकता है तथा राहत अभियान प्रभावित हो सकता है।

 

असम में बार-बार बाढ़ की नौबत क्यों आती है?

असम ब्रह्मपुत्र और बराक जैसी बड़ी नदी प्रणालियों के बीच बसा है। मानसून के दौरान असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और भूटान के ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी तेजी से घाटी की ओर आता है।

ब्रह्मपुत्र नदी अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद लाती है। इससे नदी का तल ऊपर उठता है और पानी फैलने की क्षमता बढ़ जाती है। नदी के कटाव, तटबंधों की कमजोरी, निचले इलाकों में बस्तियों का विस्तार और जल निकासी की सीमित व्यवस्था बाढ़ के प्रभाव को और गंभीर बना देती है।

इस बार भी लगातार भारी बारिश, ऊपरी इलाकों से आए पानी और कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ी।

 

राहत के बाद पुनर्वास की लंबी चुनौती

तत्काल चुनौती लोगों की जान बचाने, भोजन और दवाइयां पहुंचाने की है, लेकिन पानी उतरने के बाद असली कठिनाई पुनर्वास की होगी। हजारों परिवारों के घरों, खेतों, पशुओं और जरूरी दस्तावेजों को नुकसान हुआ है।

टूटी सड़कों और पुलों की मरम्मत, तटबंधों को मजबूत करना, खेतों से रेत और गाद हटाना, पशुधन की क्षति की भरपाई और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में गंदा पानी जमा रहने के कारण डायरिया, त्वचा रोग, मलेरिया और दूसरी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए राहत शिविरों में स्वच्छ पानी, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता जरूरी होगी।

 

FAQ

1. असम में बाढ़ से कितने लोगों की मौत हुई?

ASDMA की 22 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटे में 21 लोगों की मौत हुई और इस वर्ष बाढ़ से कुल मृतक संख्या 31 पहुंच गई थी।

 

2. बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?

रिपोर्ट के अनुसार 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 872 गांव बाढ़ के पानी में डूबे थे।

 

3. सरकार ने कितनी राहत राशि की घोषणा की है?

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बाढ़ में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को ₹4 लाख देने की घोषणा की है।

 

4. सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन-से हैं?

शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित था, जहां करीब 3.59 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए। इसके बाद जोरहाट और चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल रहे।

 

5. NDRF और SDRF की क्या भूमिका है?

NDRF और SDRF सेना, पुलिस, फायर सर्विस तथा नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को पानी से निकालने, सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने का काम कर रहे हैं।

 

6. बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?

लगातार भारी बारिश, ऊपरी इलाकों से तेजी से आया पानी, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का खतरे के निशान से ऊपर बहना तथा कई निचले इलाकों में जल निकासी की सीमित व्यवस्था इसके प्रमुख कारण हैं।