Dharmendra Pradhan resigns: छात्र आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफा, जानिए क्या है पूरा मामला

Dharmendra Pradhan Resign

Dharmendra Pradhan Resigns: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई वाली में छात्रों के Gen Z के देशव्यापी प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के दो संयोग जुड़ गए हैं। धर्मेंद्र प्रधान पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार में नॉट आउटमंत्री थे। धर्मेंद्र प्रधान कभी पेपर लीक पर प्रदर्शनकारी बने थे। 29 साल बाद वह प्रदर्शनकारियों के सामने ही झुके और इस्तीफा दे दिया।

दिल्ली में चल रहे से सीजेपी प्रोटेस्ट के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के साथ कांग्रेस और विपक्षी दल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए थे। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी आंदोलन के सामने सरकार के किसी मंत्री ने पद छोड़ा है। धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार के उन सात मंत्रियों में शामिल थे। जो 2014 से लगातार मंत्री के पद पर काबिज थे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ दो संयोग जुड़े हैं। वह मोदी सरकार में धर्मेंद्र प्रधान जुलाई, 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने थे। उनकी विदाई भी जुलाई के महीने में ही हुई।

Dharmendra Pradhan Resign
Image Credit : ANI

धर्मेंद्र प्रधान की कैसी रही पारी

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय-2014 से 2017

  • कैबिनेट मंत्रीपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय- 2017 से 2021
  • कैबिनेट मंत्रीकौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय-2017 से 2024
  • कैबिनेट मंत्रीइस्पात मंत्रालय-2019 से 2021
  • कैबिनेट मंत्रीशिक्षा मंत्रालय-2021 से 25 जुलाई, 2026

कितने दिन शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान पांच साल और 18 दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे। धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा है कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है। जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं। धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा है कि प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा।

पेपर लीक से चमके और इसी में गई कुर्सी

धर्मेंद्र प्रधान ने बतौर युवा नेता वर्ष 1997 में ओडिशा में हुए एक पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किया था। तक वे सुर्खियों में आए थे। यह महज संयोग है कि नीट यूजी परीक्षा 2026 के पेपर लीक में उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा सचिवालय के सामने लगभग 1500 छात्रों के साथ पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था। तब उनके धर्मेंद्र प्रधान को गंभीर चोटें और हाथ में फ्रैक्चर आया था। धर्मेंद्र प्रधान कुल 12 साल दो महीने और 18 दिन मंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे।धर्मेंद्र प्रधान 29 साल पहले पेपर लीक पर प्रदर्शनकारी बने थे। 2026 में वह 29 साल बाद एक बड़े आंदोलन के बाद प्रदर्शनकारियों के सामने झुके।

 

इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर क्या हुआ?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा होते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। सरकार को आशंका थी कि बढ़ते आंदोलन का फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं। इसी बीच कई प्रदर्शनकारी संगठनों ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए जारी रहेगी।

 

सरकार का अगला कदम क्या होगा?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही ऐसे विधेयक को मंजूरी दे चुका है जिसमें पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का प्रस्ताव है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और सरकार परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए आगे कौन-कौन से कदम उठाती है।

 

निष्कर्ष

Dharmendra Pradhan resigns भारतीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। NEET-UG विवाद, देशव्यापी छात्र आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच दिया गया यह इस्तीफा केवल एक मंत्री के पद छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग को भी नई दिशा देता है। आने वाले दिनों में सरकार के फैसले तय करेंगे कि छात्रों का भरोसा किस हद तक वापस लाया जा सकता है।

 

FAQs:

1. क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है?

हाँ। धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और इसकी घोषणा X पर जारी खुले पत्र के माध्यम से की।

 

2. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?

उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य, राष्ट्रीय एकता और बढ़ते आंदोलन के बीच किसी भी तरह के राजनीतिक या कानूनी टकराव से बचने के लिए उन्होंने यह फैसला लिया।

 

3. आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग क्या थी?

CJP और अन्य छात्र संगठनों की सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई थी।

 

4. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा कैसे की?

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खुला पत्र साझा कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी।

 

5. सरकार अब आगे क्या करेगी?

सरकार परीक्षा सुधार कानून लाने की तैयारी में है और जल्द नए शिक्षा मंत्री के नाम की घोषणा हो सकती है।