भारत में चुनावी राजनीति से जुड़ा एक बड़ा बदलाव चर्चा में है। Minimum Age to Contest Elections for Lok Sabha को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने की मांग अब आधिकारिक रूप से उठाई जा रही है। तेलंगाना सरकार अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। यदि यह प्रस्ताव भविष्य में स्वीकार होता है तो देश के लाखों युवाओं के लिए राजनीति में प्रवेश का रास्ता पहले से अधिक आसान हो सकता है।
तेलंगाना सरकार ने क्या प्रस्ताव रखा है?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि तेलंगाना सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें केंद्र सरकार से Lok Sabha Elections और Assembly Elections लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने की मांग की जाएगी। यह प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा ताकि इस विषय पर केंद्र सरकार और संसद विचार कर सके। मुख्यमंत्री का कहना है कि देश की बड़ी आबादी युवा है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी बेहद सीमित है। ऐसे में युवाओं को कम उम्र में राजनीति में अवसर मिलना चाहिए।

Minimum Age to Contest Elections for Lok Sabha क्या है?
वर्तमान भारतीय कानून के अनुसार चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु इस प्रकार है–
- लोकसभा चुनाव: 25 वर्ष
- विधानसभा चुनाव: 25 वर्ष
- राज्यसभा चुनाव: 30 वर्ष
- विधान परिषद: 30 वर्ष
- राष्ट्रपति: 35 वर्ष
- उपराष्ट्रपति: 35 वर्ष
हालांकि, मतदान करने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, जिसे 1989 में 61वें संविधान संशोधन के जरिए 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया गया था।
Election Age Limit in Lok Sabha बदलने की मांग क्यों उठ रही है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का तर्क है कि भारत की लगभग 30% आबादी Gen Z की है, लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 1% से भी कम है। उन्होंने कहा कि–
- 21 वर्ष की आयु में युवा IAS और IPS अधिकारी बनने की पात्रता रखते हैं।
- इसी उम्र में मेयर और जिला परिषद अध्यक्ष जैसे पदों पर चुनाव लड़ सकते हैं।
- ऐसे में सांसद और विधायक बनने के लिए 25 वर्ष की शर्त उचित नहीं मानी जानी चाहिए।
उनका मानना है कि इससे Young Politicians को आगे आने का अवसर मिलेगा और भारतीय लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
क्या इसके लिए Constitutional Amendment जरूरी होगा?
हाँ। Election Age Limit में बदलाव केवल राज्य सरकार के प्रस्ताव से संभव नहीं है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की आयु भारतीय संविधान और Representation of the People Act, 1951 से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे बदलने के लिए संसद द्वारा Constitutional Amendment और आवश्यक कानूनी संशोधन करने होंगे। तेलंगाना विधानसभा केवल एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिश भेज सकती है। अंतिम निर्णय संसद और केंद्र सरकार के स्तर पर होगा।
रेवंत रेड्डी ने किन देशों का उदाहरण दिया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई देशों में युवाओं को कम उम्र में शीर्ष राजनीतिक पदों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। उन्होंने दावा किया कि–
- जर्मनी और ब्रिटेन में कम उम्र के लोग प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की पात्रता रखते हैं।
- सिंगापुर में 21 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनने की पात्रता का उदाहरण भी उन्होंने दिया।
इसी आधार पर उन्होंने भारत में भी Electoral Reforms की जरूरत बताई।
NEET आंदोलन से क्या है इस प्रस्ताव का संबंध?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने यह घोषणा NEET पेपर लीक के मुद्दे पर आयोजित कैंडल मार्च के दौरान की। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उन्हें संसद तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस संसद में NEET आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग उठाएगी। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, कई मंत्री, CPI नेता और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।
क्या बदल सकती है भारतीय राजनीति?
यदि भविष्य में यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं–
- युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ सकती है।
- Political Eligibility से जुड़े नियम अधिक समावेशी बन सकते हैं।
- संसद और विधानसभाओं में युवा प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।
- Indian Democracy में नई पीढ़ी की भागीदारी मजबूत हो सकती है।
- Election Reforms और Electoral Reforms पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो सकती है।
हालांकि, यह फिलहाल केवल तेलंगाना सरकार का प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।
निष्कर्ष
Minimum Age to Contest Elections for Lok Sabha को 21 वर्ष करने की मांग भारतीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। तेलंगाना सरकार का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इसे लागू करने के लिए संसद द्वारा संवैधानिक एवं कानूनी संशोधन आवश्यक होंगे। यदि भविष्य में यह बदलाव होता है, तो भारत की चुनावी राजनीति में युवा नेतृत्व की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
FAQ
- तेलंगाना सरकार चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष क्यों करना चाहती है?
तेलंगाना सरकार का कहना है कि देश की बड़ी युवा आबादी के बावजूद संसद में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। इसलिए 21 वर्ष के युवाओं को भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
- वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु क्या है?
वर्तमान नियमों के अनुसार लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
- इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए क्या संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा?
हाँ। चुनाव लड़ने की आयु बदलने के लिए संसद द्वारा संविधान और संबंधित चुनावी कानूनों में संशोधन करना होगा।
- क्या यह प्रस्ताव पूरे देश पर लागू होगा?
अभी नहीं। फिलहाल यह केवल तेलंगाना सरकार का प्रस्ताव है। इसे पूरे देश में लागू करने का अधिकार संसद और केंद्र सरकार के पास है।
- तेलंगाना विधानसभा में यह प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह में विशेष विधानसभा और विधान परिषद सत्र बुलाकर यह प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

