Indian Teen Drug Abuse: क्या भारत के किशोर तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं? नई स्टडी ने बढ़ाई चिंता

Indian Teen Drug Abuse

Indian Teen Drug Abuse को लेकर सामने आई एक नई स्टडी ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। देशभर के 108 स्कूलों के 6,000 से अधिक किशोरों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि हर 5 में से 1 भारतीय किशोर नशे की लत (Substance Use) के मध्यम या उच्च जोखिम में है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में और गंभीर हो सकती है।

भारतीय किशोरों में नशे का खतरा कितना बड़ा है?

नई स्टडी के अनुसार, भारत के 108 स्कूलों के 6,000 से अधिक किशोरों पर किए गए अध्ययन में 21.4% किशोरों में नशे की लत का मध्यम या उच्च जोखिम पाया गया। इनमें 10.3% मध्यम जोखिम और 11.1% उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल थे, जबकि 78.6% किशोर कम जोखिम वाले पाए गए।

Indian Teen Drug Abuse

स्टडी में क्या सामने आया?

यह अध्ययन AIIMS गोरखपुर, JIPMER पुडुचेरी और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। अध्ययन में शामिल स्कूल इन छह जिलों से थे

  • गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) 
  • कामरूप/गुवाहाटी (असम) 
  • नागपुर (महाराष्ट्र) 
  • राजकोट (गुजरात) 
  • देवघर (झारखंड) 
  • पुडुचेरी 

शोध में WHO के Alcohol, Smoking and Substance Involvement Screening Test (ASSIST) का उपयोग कर किशोरों में नशे के जोखिम का आकलन किया गया।

किन राज्यों के किशोरों में सबसे ज्यादा जोखिम मिला?

स्टडी के अनुसार

  • गुवाहाटी (असम) और देवघर (झारखंड) के स्कूलों में सबसे अधिक किशोर हाई और मॉडरेट रिस्क श्रेणी में पाए गए। 
  • वहीं नागपुर और पुडुचेरी के अधिकांश छात्र लो-रिस्क श्रेणी में रहे। 

शोधकर्ताओं के अनुसार गुवाहाटी और नागपुर के बीच जोखिम में 35.1 प्रतिशत अंक का अंतर देखा गया। इसमें लगभग 40% अंतर सामाजिक, आर्थिक, स्कूल के माहौल और व्यक्तित्व से जुड़े कारकों के कारण पाया गया।

 

किशोरों में नशे का खतरा बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?

स्टडी में कई ऐसे कारण सामने आए जिन्हें बदला जा सकता है। मुख्य कारणों में शामिल हैं

  • नशीले पदार्थों तक आसान पहुंच। 
  • मोबाइल और सोशल मीडिया का अधिक उपयोग (Digital Exposure) 
  • नशे के प्रति सकारात्मक सोच या स्वीकार्यता। 
  • जोखिम भरा सामाजिक और व्यवहारिक माहौल। 

शोध में यह भी पाया गया कि सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी (Social Engagement) किशोरों को नशे से दूर रखने में मददगार साबित होती है।

 

क्या डिजिटल एक्सपोजर भी बढ़ा रहा है खतरा?

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन किशोरों का डिजिटल एक्सपोजर अधिक था, उनमें नशे की ओर झुकाव भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन कंटेंट और साथियों का प्रभाव किशोरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि डिजिटल मीडिया साक्षरता (Media Literacy) पर भी ध्यान देना जरूरी है।

 

क्या लड़के ज्यादा जोखिम में हैं या लड़कियां?

इस अध्ययन में एक रोचक तथ्य सामने आया। शोध के अनुसार, लड़कों में लड़कियों की तुलना में उच्च नशे के जोखिम की संभावना कम पाई गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर और विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता भी बताई है।

 

विशेषज्ञों ने क्या समाधान सुझाए हैं?

शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल सामान्य जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने सुझाव दिए हैं

  • नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सख्त नियंत्रण। 
  • स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करना। 
  • डिजिटल मीडिया साक्षरता को बढ़ावा देना। 
  • Community Based Peer-Led Intervention (CPLI) जैसे मॉडल को स्कूल हेल्थ प्रोग्राम में शामिल करना। 
  • किशोरों को सामाजिक और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना। 

 

यह अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में किशोरों के बीच नशे के जोखिम पर अलग-अलग राज्यों में एक साथ किया गया यह अपनी तरह का महत्वपूर्ण अध्ययन है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग क्षेत्रों में किस प्रकार की रणनीति अपनाई जाए ताकि किशोरों को नशे की लत से बचाया जा सके।

 

निष्कर्ष

Indian Teen Drug Abuse पर सामने आई यह स्टडी संकेत देती है कि भारत के हर पांच में से एक किशोर में नशे का मध्यम या उच्च जोखिम मौजूद है। शोध में डिजिटल एक्सपोजर, नशीले पदार्थों की उपलब्धता और सामाजिक वातावरण को प्रमुख कारण बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी नीतियां, स्कूल आधारित कार्यक्रम और परिवार की सक्रिय भूमिका इस बढ़ते खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

 

FAQs

  1. भारतीय किशोरों में नशे की लत पर हालिया अध्ययन में क्या सामने आया है?

नई स्टडी के अनुसार भारत के 21.4% किशोर नशे की लत के मध्यम या उच्च जोखिम में हैं।

 

  1. भारत में किशोरों में नशे की लत बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?

नशीले पदार्थों तक आसान पहुंच, अधिक डिजिटल एक्सपोजर, नशे के प्रति सकारात्मक सोच और जोखिम भरा सामाजिक माहौल इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।

 

  1. किन आयु वर्ग के बच्चों पर यह अध्ययन आधारित है?

यह अध्ययन भारत के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले किशोर (Adolescents) पर आधारित है। अध्ययन में 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को शामिल किया गया।

 

  1. किशोरों में सबसे अधिक कौन-कौन से नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है?

इस अध्ययन का उद्देश्य नशे के समग्र जोखिम का आकलन करना था। इसमें किसी विशेष नशीले पदार्थ के उपयोग का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।

 

  1. नशे की लत के शुरुआती संकेत क्या होते हैं?

व्यवहार में अचानक बदलाव, पढ़ाई में रुचि कम होना, सामाजिक दूरी बनाना, चिड़चिड़ापन, बार-बार झूठ बोलना, मानसिक तनाव और संदिग्ध मित्र मंडली नशे की लत के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।