Government Tech Fund के तहत भारत सरकार के ₹1 लाख करोड़ के Research, Development and Innovation (RDI) Fund की पहली फंडिंग में 22 निजी डीप-टेक कंपनियों को कुल ₹2,192 करोड़ के सॉफ्ट लोन मंजूर किए गए हैं। हालांकि, इस फंडिंग के बाद विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि चयनित 22 में से 15 कंपनियों का संबंध चयन समिति के 7 सदस्यों से जुड़ा पाया गया, जिन्हें कुल फंड का लगभग 62% यानी ₹1,377 करोड़ मिला। समिति के सदस्यों ने किसी भी अनियमितता से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने हितों का खुलासा (Disclosure) किया था और संबंधित मामलों से स्वयं को अलग (Recusal) कर लिया था।
Government Tech Fund क्या है?
Government Tech Fund भारत सरकार के ₹1 लाख करोड़ के Research, Development and Innovation (RDI) Fund का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य डीप-टेक, अंतरिक्ष, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, फार्मा और अन्य रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में निजी कंपनियों को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता देना है। पहली किस्त में 22 कंपनियों को ₹2,192 करोड़ स्वीकृत किए गए।

Government Tech Fund में विवाद क्यों खड़ा हुआ?
विवाद की वजह फंडिंग नहीं बल्कि हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा है। एक जांच में सामने आया कि
- कुल 22 चयनित कंपनियों में से 15 कंपनियों का संबंध चयन समिति के 7 सदस्यों से था।
- इन कंपनियों को लगभग ₹1,377 करोड़ यानी कुल राशि का करीब 62% मिला।
- कुछ कंपनियों में समिति सदस्यों या उनके निवेश फंड की हिस्सेदारी मौजूद थी।
इसी मुद्दे को कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने संसद में भी उठाया।
Government Tech Fund चयन प्रक्रिया पर क्या सफाई दी गई?
सरकार और चयन समिति दोनों ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार–
- सभी चयन मेरिट के आधार पर किए गए।
- जिन सदस्यों का किसी कंपनी से संबंध था, उन्होंने पहले ही इसकी जानकारी सरकार को दी थी।
- ऐसे मामलों में संबंधित सदस्य चयन प्रक्रिया से अलग रहे।
- अंतिम निर्णय में उनके मतदान या मूल्यांकन की कोई भूमिका नहीं रही।
विभाग ने कहा कि “Conflicted Members” संबंधित प्रस्तावों के मूल्यांकन और स्वीकृति प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रहे।
किन कंपनियों को सबसे अधिक फंड मिला?
पहले चरण में कई प्रमुख डीप-टेक कंपनियों को फंडिंग मिली, जिनमें शामिल हैं–
कंपनी | स्वीकृत राशि |
|---|---|
Ubifly Technologies | ₹285 करोड़ |
Tejas Networks | ₹250 करोड़ |
Ather Energy | ₹211.89 करोड़ |
Agnikul Cosmos | ₹200 करोड़ |
ideaForge Technology | ₹151 करोड़ |
QuNu Labs | ₹150 करोड़ |
BigEndian Semiconductors | ₹130 करोड़ |
Eyestem Research | ₹125 करोड़ |
Dhruva Space | ₹105 करोड़ |
इनके अलावा स्पेस टेक, रोबोटिक्स, मेडिकल टेक्नोलॉजी, बैटरी, सेमीकंडक्टर और बायोटेक क्षेत्र की कई कंपनियां भी चयनित हुईं।
हितों के टकराव (Conflict of Interest) पर क्या नियम हैं?
समिति के सदस्यों का कहना है कि RDI Fund के नियम पहले से स्पष्ट हैं। मुख्य नियम–
- संबंधित सदस्य को अपने निवेश की जानकारी पहले देनी होती है।
- ऐसी कंपनी के मूल्यांकन में भाग नहीं ले सकता।
- मतदान से स्वयं को अलग रखना अनिवार्य है।
- बैठक के रिकॉर्ड में Recusal दर्ज किया जाता है।
- कई मामलों में साधारण बहुमत के बजाय Super Majority से निर्णय लिया गया।
समिति के सदस्यों का कहना है कि यही प्रक्रिया अपनाई गई।
विपक्ष और विशेषज्ञों ने क्या सवाल उठाए?
राज्यसभा सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है, लेकिन सार्वजनिक धन के उपयोग में अतिरिक्त पारदर्शिता जरूरी है। उनके अनुसार–
- सार्वजनिक धन के मामलों में कॉरपोरेट दुनिया से भी अधिक कड़े मानक होने चाहिए।
- चयन समिति में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की भूमिका अधिक हो सकती है।
- केवल निष्पक्ष प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि प्रक्रिया निष्पक्ष दिखाई भी देनी चाहिए।
सरकार के लिए यह फंड कितना महत्वपूर्ण है?
RDI Fund को भारत के डीप-टेक सेक्टर के लिए एक बड़ी पहल माना जा रहा है। इसका उद्देश्य–
- भारतीय स्टार्टअप्स को लंबी अवधि की पूंजी उपलब्ध कराना।
- अंतरिक्ष, रक्षा, बैटरी, ड्रोन, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर और बायोटेक जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना।
- निजी निवेश को आकर्षित करना।
- भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाना।
समिति के सदस्यों का कहना है कि डीप-टेक क्षेत्र छोटा है, इसलिए अनुभवी विशेषज्ञों का इस उद्योग से जुड़ा होना स्वाभाविक है।
निष्कर्ष
Government Tech Fund भारत के डीप-टेक सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है, लेकिन पहली फंडिंग के साथ ही हितों के टकराव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सरकार और चयन समिति का दावा है कि सभी नियमों का पालन किया गया, सभी हितों का खुलासा किया गया और संबंधित सदस्य निर्णय प्रक्रिया से अलग रहे। वहीं विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक धन के मामलों में पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। आने वाले समय में इस फंड की विश्वसनीयता उसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर निर्भर करेगी।
FAQs
- ₹2,192 करोड़ की राशि किस योजना के तहत मंजूर की गई है?
यह राशि भारत सरकार के Research, Development and Innovation (RDI) Fund के तहत मंजूर की गई है।
- Government Tech Fund का मुख्य उद्देश्य क्या है?
डीप-टेक, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, बायोटेक और अन्य रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में निजी कंपनियों को वित्तीय सहायता देना।
- 62% राशि पैनल से जुड़ी कंपनियों को क्यों मिली?
जांच में पाया गया कि चयनित 15 कंपनियों का संबंध चयन समिति के 7 सदस्यों से था। समिति का कहना है कि संबंधित सदस्यों ने हितों का खुलासा किया और निर्णय प्रक्रिया से अलग रहे।
- किन कंपनियों को इस फंड से लाभ मिला है?
Tejas Networks, Ather Energy, Agnikul Cosmos, Dhruva Space, ideaForge, QuNu Labs, Eyestem Research, BigEndian Semiconductors सहित कुल 22 कंपनियों को फंड मिला।
- Government Tech Fund चयन समिति की भूमिका क्या है?
समिति आवेदन करने वाली कंपनियों का तकनीकी और व्यावसायिक मूल्यांकन कर फंडिंग के लिए चयन करती है।
- क्या सरकार ने किसी गड़बड़ी की पुष्टि की है?
नहीं। सरकार का कहना है कि सभी चयन मेरिट के आधार पर हुए और हितों के टकराव से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों का पालन किया गया।

