मणिपुर हिंसा मामलों में SC का बड़ा प्लान! CBI-NIA केसों के लिए बनेंगी स्पेशल कोर्ट?

Manipur Violence

मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े मामलों में सुनवाई तेज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने Special Courts for Manipur Ethnic Violence का प्रस्ताव रखा है। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से CBI और NIA द्वारा जांच किए जा रहे मणिपुर हिंसा के मामलों के लिए अलग-अलग विशेष अदालतें गठित करने की संभावना पर विचार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि इन मामलों की सुनवाई रोजाना के आधार पर हो, ताकि लंबे समय से लंबित आपराधिक मुकदमों में तेजी लाई जा सके। अदालत ने इस संबंध में अगली सुनवाई तक स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है।

Special Courts for Manipur Ethnic Violence क्यों जरूरी हुईं?

सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ी चिंता मामलों की संख्या के साथ-साथ बड़ी संख्या में गवाहों के लंबित होने की है। CBI की जांच वाले मामलों में कुल 904 गवाह हैं, जिनमें से 891 गवाहों की अभी गवाही दर्ज नहीं हुई है। इसी स्थिति को देखते हुए अदालत ने कहा कि मणिपुर से जुड़े CBI और NIA मामलों की विशेष अदालतों में विशेष रूप से सुनवाई की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। बाकी मामलों को अन्य अदालतों में भेजा जा सकता है, ताकि विशेष अदालतें केवल मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

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CBI और NIA के कितने मामलों की जांच चल रही है?

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को ताजा स्थिति रिपोर्ट की जानकारी दी। इसके मुताबिक, CBI ने मणिपुर हिंसा से जुड़े 31 मामलों की जांच की है। इनमें से 27 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। इनमें 22 चार्जशीट और 5 क्लोजर रिपोर्ट शामिल हैं, जबकि 4 मामले अभी जांच के स्तर पर हैं। 22 चार्जशीट वाले मामलों में से 20 में अदालत संज्ञान ले चुकी है। इनमें केवल एक मामला मजिस्ट्रेट के स्तर पर सुनवाई योग्य है, जबकि बाकी मामलों में गंभीर अपराध शामिल हैं और उनकी सुनवाई सेशन कोर्ट में होनी है। वहीं, NIA ने कुल 30 मामलों की जांच की है। इनमें 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अन्य 15 मामले अभी जांच के अधीन हैं।

मणिपुर हिंसा मामलों की सुनवाई में देरी पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट पहले ही CBI से जुड़े मामलों को मणिपुर से गुवाहाटी ट्रांसफर कर चुका है। अब Special Courts for Manipur Ethnic Violence का प्रस्ताव इसी प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया था कि जांच में ऐसा पर्याप्त साक्ष्य सामने आना चाहिए जिससे आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित किया जा सके। मामलों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और सामूहिक बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। इन घटनाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग लगातार उठती रही है।

 

याचिकाकर्ता ने उठाया ट्रायल में देरी का मुद्दा

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने आपराधिक मुकदमों की धीमी गति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों के बावजूद ट्रायल में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मणिपुर हिंसा मामलों की जांच और सुनवाई के लिए एक विस्तृत व्यवस्था तय कर चुका है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पिछले तीन वर्षों से इस मामले की निगरानी कर रहा है और कई निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसलिए पुराने मुद्दों को दोबारा उठाना उचित नहीं है।

 

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह देखने को कहा है कि क्या CBI और NIA से जुड़े मणिपुर मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाई जा सकती हैं। इन अदालतों में मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई कराए जाने की संभावना है। अगली सुनवाई में अदालत को इस प्रस्ताव पर स्थिति रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। यदि विशेष अदालतों की व्यवस्था लागू होती है, तो बड़ी संख्या में लंबित गवाहियों और मुकदमों को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

 

निष्कर्ष

मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों में न्याय की प्रक्रिया को तेज करना इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है। Special Courts for Manipur Ethnic Violence का प्रस्ताव बड़ी संख्या में लंबित गवाहियों और गंभीर आपराधिक मामलों को देखते हुए महत्वपूर्ण हो सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि गुवाहाटी हाईकोर्ट इस व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या विशेष अदालतों के जरिए वर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आती है।

 

FAQs

1. सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों के लिए विशेष अदालतों का प्रस्ताव क्यों दिया?

बड़ी संख्या में मामले और गवाहियों के लंबित होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की तेज और रोजाना सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की संभावना पर विचार करने को कहा है।

 

2. विशेष अदालतों में किन मामलों की सुनवाई होगी?

प्रस्ताव के तहत CBI और NIA द्वारा जांच किए गए मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की विशेष रूप से सुनवाई की जा सकती है।

 

3. CBI ने मणिपुर हिंसा से जुड़े कितने मामलों की जांच की है?

CBI ने 31 मामलों की जांच की है। इनमें 22 चार्जशीट और 5 क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हो चुकी हैं, जबकि 4 मामले जांच के अधीन हैं।

 

4. NIA कितने मामलों की जांच कर रही है?

NIA ने कुल 30 मामलों की जांच की है। इनमें 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है और 15 मामले अभी जांच में हैं।

 

5. मणिपुर हिंसा मामलों में कितने गवाह लंबित हैं?

CBI मामलों में कुल 904 गवाह हैं, जिनमें से 891 की गवाही अभी दर्ज नहीं हुई है। यही लंबित गवाहियां विशेष अदालतों के प्रस्ताव की एक प्रमुख वजह हैं।