Indonesia Tsunami Alert: इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का भूकंप, 5 की मौत: जानिए यहां बार-बार क्यों आते हैं इतने शक्तिशाली भूकंप ?

Indonesia Tsunami Alert

इंडोनेशिया में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। भूकंप का केंद्र समुद्र के नीचे, फ्लोरेस द्वीप के पास था। तेज झटकों के कारण कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और कुछ जगहों पर इमारतों के हिस्से ढह गए। बाद की रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है। इनमें से कई लोगों की मौत मलबे में दबने से हुई। भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए।

भूकंप समुद्र के नीचे आया था, इसलिए शुरुआत में Indonesia Tsunami Alert भी जारी किया गया। पूर्वी नुसा तेंगारा समेत कुछ इलाकों में लोगों को समुद्र तट और निचले इलाकों से दूर जाकर ऊंची जगहों पर जाने की सलाह दी गई। हालांकि, समुद्र के स्तर में खतरनाक बदलाव नहीं मिलने के बाद करीब तीन घंटे के भीतर सुनामी चेतावनी हटा दी गई। कुछ स्थानों पर एक मीटर से कम ऊंची समुद्री लहरें दर्ज की गईं।

लेकिन इस पूरी घटना में सिर्फ भूकंप और सुनामी अलर्ट ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह हादसा एक बार फिर बताता है कि Indonesia Earthquake के लिए इतना संवेदनशील क्यों है और यहां आने वाले भूकंपों में सुनामी का खतरा क्यों बना रहता है।

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Image Credit: BASARNAS

पहले समझिए, इंडोनेशिया में हुआ क्या?

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार भूकंप शनिवार सुबह करीब 5:58 बजे स्थानीय समय पर आया। इसकी तीव्रता 7.7 थी और यह जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में आया। इसका केंद्र इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में फ्लोरेस क्षेत्र के पास समुद्र में, एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।

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भूकंप काफी उथली गहराई पर था। ऐसे भूकंपों में सतह पर झटके ज्यादा तेज महसूस हो सकते हैं और अगर केंद्र समुद्र के नीचे हो तो सुनामी का खतरा भी पैदा हो सकता है।

भूकंप के बाद फ्लोरेस द्वीप के बड़े हिस्से में तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे राहत और बचाव टीमों को नुकसान का सही आकलन करने में परेशानी हुई।

 

5 लोगों की मौत, मलबे में दबने से गई जान

पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रुडी डार्मोको के मुताबिक शुरुआती रिपोर्ट में सिक्का रीजेंसी में दो और मंगराई रीजेंसी में तीन मौतों की जानकारी सामने आई। बाद की रिपोर्टिंग में भी मृतकों की संख्या कम से कम पांच बताई गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक कुछ लोग उस समय सो रहे थे, तभी इमारतों का मलबा उनके ऊपर गिर गया। भूकंप से कई मकानों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। बिजली कटने और संचार बाधित होने के कारण प्रशासन को प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटाने में भी मुश्किल हुई।

नागेकेओ इलाके में करीब 2,000 लोगों के घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

 

अस्पतालों से मरीज बाहर निकाले गए

भूकंप के बाद कई अस्पतालों में भी एहतियाती कदम उठाए गए। अस्पतालों की इमारतों में संभावित नुकसान या आफ्टरशॉक के खतरे को देखते हुए मरीजों को बाहर निकाला गया।

स्थानीय टेलीविजन फुटेज में स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए अस्पतालों से बाहर ले जाते देखा गया। कई जगह अस्पतालों के बाहर ही बेड, IV स्टैंड और ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए गए और खुले स्थान पर अस्थायी इलाज की व्यवस्था की गई।

इस तरह अस्पतालों ने भी आफ्टरशॉक या इमारत को नुकसान पहुंचने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए खुले स्थानों का इस्तेमाल किया।

 

प्रार्थना के दौरान गिरी इमारत की छत, पादरी को फ्रैक्चर

भूकंप का असर सिक्का के सेंट पीटर मेजर सेमिनरी में भी दिखाई दिया। वहां सुबह की प्रार्थना चल रही थी, तभी एक असेंबली हॉल की छत का हिस्सा गिर गया।

सेमिनरी के रेक्टर रेव. गिडेलबर्टस टांगा के मुताबिक छात्र और नन घबराकर बाहर निकलने लगे। इसी दौरान जान बचाने की कोशिश में एक पादरी दूसरी मंजिल से कूद गए और उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।

यह घटना बताती है कि भूकंप के दौरान केवल इमारतों का गिरना ही खतरा नहीं होता, बल्कि अचानक मची भगदड़ और लोगों द्वारा सुरक्षित निकलने की कोशिश भी चोट का कारण बन सकती है।

 

लोग घरों से निकलकर ऊंची जगहों की ओर भागे

भूकंप के तुरंत बाद फ्लोरेस द्वीप के कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। समुद्र के नीचे भूकंप आने और सुनामी की चेतावनी जारी होने के बाद कई तटीय इलाकों के लोगों ने ऊंची जगहों की ओर रुख किया।

सिक्का रीजेंसी की रहने वाली योहाना एम्बू ने बताया कि तेज झटकों के बाद लोग घबराकर ऊंची जगहों की ओर भागने लगे। उन्होंने मौमेरे बंदरगाह के टर्मिनल के वेटिंग एरिया को भी क्षतिग्रस्त देखा।

सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में इमारतों के हिस्से गिरते और लोग घबराकर बाहर निकलते दिखाई दिए। हालांकि, सोशल मीडिया पर मौजूद हर वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उन्हें घटना के पूरे नुकसान का आधिकारिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

 

सुनामी का अलर्ट क्यों जारी किया गया था?

Indonesia Earthquake Tsunami Warning जारी होने की सबसे बड़ी वजह भूकंप का समुद्र के नीचे और अपेक्षाकृत कम गहराई पर होना था।

जब समुद्र के नीचे बहुत शक्तिशाली भूकंप आता है, तो समुद्र की तलहटी ऊपर या नीचे खिसक सकती है। इससे समुद्र का पानी अचानक विस्थापित होता है और समुद्र में बड़ी लहरें पैदा हो सकती हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर सुनामी का कारण बन सकती है।

7.7 तीव्रता का भूकंप अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सुनामी जरूर आएगी। लेकिन जब भूकंप समुद्र के नीचे और उथली गहराई पर हो, तो अधिकारियों के लिए शुरुआती चेतावनी जारी करना जरूरी हो जाता है।

इसी वजह से इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी यानी BMKG ने पूर्वी नुसा तेंगारा, पश्चिमी नुसा तेंगारा और सुलावेसी के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की और लोगों को समुद्र तट तथा नदी किनारे से दूर रहने को कहा।

 

कुछ घंटे बाद सुनामी चेतावनी क्यों हटा दी गई?

सुनामी की चेतावनी स्थायी नहीं होती। भूकंप के बाद समुद्र के स्तर की निगरानी की जाती है। अगर वास्तविक समुद्री लहरें खतरनाक स्तर तक नहीं पहुंचतीं और आगे सुनामी का खतरा कम हो जाता है, तो चेतावनी वापस ली जा सकती है।

इस मामले में भी यही हुआ। अधिकारियों की निगरानी में समुद्र के स्तर में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं मिला जिससे तटीय आबादी के लिए गंभीर सुनामी खतरा बना रहे। करीब तीन घंटे बाद चेतावनी हटा दी गई। हालांकि कुछ जगहों पर एक मीटर से कम ऊंची लहरें दर्ज की गई थीं।

यानी Indonesia Tsunami Alert जारी किया जाना खतरे की आशंका के कारण था, जबकि उसे हटाया जाना बाद की समुद्री निगरानी के आधार पर लिया गया फैसला था।

 

भूकंप के बाद आफ्टरशॉक क्यों आते हैं?

मुख्य भूकंप के बाद धरती के अंदर मौजूद चट्टानों और फॉल्ट में तनाव पूरी तरह एक बार में खत्म नहीं होता। इसलिए आसपास के क्षेत्र में छोटे या कभी-कभी काफी तेज झटके दोबारा आ सकते हैं। इन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है।

इस भूकंप के बाद भी कई आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता तक के झटकों का जिक्र किया गया था। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी क्योंकि आफ्टरशॉक पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

 

इंडोनेशिया में इतने भूकंप क्यों आते हैं?

इंडोनेशिया दुनिया के उन देशों में है जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां बहुत ज्यादा होती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है।

इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire यानी प्रशांत महासागर के चारों ओर मौजूद उस क्षेत्र में स्थित है जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं। यहां प्लेटों की लगातार हलचल होती रहती है।

धरती की ऊपरी ठोस परत कई बड़ी-बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें बहुत धीमी गति से लगातार चलती रहती हैं। जहां एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे जाने लगती है या दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, वहां जमीन के अंदर तनाव जमा होता रहता है।

जब यह तनाव अचानक रिलीज होता है तो भूकंप पैदा होता है।

इंडोनेशिया की समस्या यह भी है कि यहां कई सक्रिय प्लेट सीमाएं समुद्र के नीचे हैं। इसलिए समुद्र के नीचे आने वाले भूकंपों के साथ सुनामी का खतरा भी बना रहता है।

इसी वजह से यहां भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी तीनों प्राकृतिक आपदाओं का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है।

 

इंडोनेशिया के लिए भूकंप और सुनामी कोई नई चुनौती नहीं

फ्लोरेस क्षेत्र का इतिहास भी विनाशकारी भूकंप और सुनामी से जुड़ा रहा है।

1992 में फ्लोरेस क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी आई थी, जिसमें करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी।

2010 में इंडोनेशिया के मेंतावाई द्वीपों के पास समुद्र के नीचे आए शक्तिशाली भूकंप के बाद करीब तीन मीटर ऊंची लहरें पहुंचीं। इस आपदा में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

2018 में सुलावेसी के पालू इलाके में 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद स्थानीय सुनामी आई। इसके साथ जमीन के तरल जैसी स्थिति में बदलने यानी liquefaction की घटना भी हुई। इस आपदा में 4,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

लेकिन इंडोनेशिया के इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में 26 दिसंबर 2004 का भूकंप और सुनामी शामिल है। सुमात्रा के पास करीब 9.1 तीव्रता के भूकंप ने हिंद महासागर में विनाशकारी सुनामी पैदा की थी। इसमें भारत समेत कई देशों में करीब 2.30 लाख लोगों की मौत हुई थी।

इसलिए जब इंडोनेशिया के तट के पास समुद्र के नीचे 7 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो अधिकारी सुनामी के खतरे को लेकर तुरंत सतर्क हो जाते हैं।

 

इस बार सबसे बड़ा खतरा क्या रहा?

इस बार शुरुआती खतरा केवल भूकंप की तीव्रता से नहीं था। तीन चीजों ने खतरा बढ़ाया भूकंप की 7.7 तीव्रता, उसका समुद्र के नीचे होना और उसकी उथली गहराई।

इसके कारण इमारतों को नुकसान पहुंचा, लोगों में अफरा-तफरी मची और तटीय इलाकों में सुनामी का डर पैदा हुआ। हालांकि समुद्र के स्तर की निगरानी के बाद सुनामी चेतावनी हटा दी गई।

दूसरी तरफ आफ्टरशॉक का खतरा बना रहा। पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए यह खास तौर पर जोखिम भरा हो सकता है।

 

भारत के लिए भी इंडोनेशिया की घटना क्यों महत्वपूर्ण है?

इंडोनेशिया भारत से काफी दूर है, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली बड़ी समुद्री भूकंपीय घटनाओं पर भारत भी नजर रखता है। 2004 की सुनामी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसका असर भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी तट तक पहुंचा था।

हालांकि इस बार की घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया के सुनामी चेतावनी केंद्र ने भी अपने क्षेत्र के लिए सुनामी खतरा नहीं बताया था।

इसलिए Indonesia Earthquake Today जैसी घटनाएं केवल स्थानीय आपदा नहीं होतीं। समुद्र के नीचे होने वाले बड़े भूकंपों की निगरानी पूरे क्षेत्र की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।

 

FAQs

1. Indonesia Earthquake Tsunami Warning क्यों जारी की गई?

समुद्र के नीचे 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली और उथला भूकंप आने के कारण सुनामी की आशंका पैदा हुई थी। इसी वजह से इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कुछ तटीय क्षेत्रों के लिए शुरुआती चेतावनी जारी की और लोगों को समुद्र तट से दूर जाने को कहा।

 

2. Indonesia Earthquake की Magnitude कितनी थी?

USGS के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.7 थी। यह करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था और इसका केंद्र फ्लोरेस क्षेत्र के पास समुद्र में था।

 

3. Indonesia Earthquake Today कहाँ आया?

भूकंप इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र में, पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आया। इसका केंद्र एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।

 

4. Indonesia Tsunami Alert किन क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था?

शुरुआती चेतावनी पूर्वी नुसा तेंगारा, पश्चिमी नुसा तेंगारा तथा सुलावेसी के कुछ हिस्सों के लिए जारी की गई थी। लोगों को समुद्र तट और नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी गई थी।

 

5. क्या Indonesia Earthquake के बाद Tsunami का खतरा है?

शुरुआत में खतरा था, इसलिए चेतावनी जारी की गई थी। लेकिन बाद में समुद्र के स्तर की निगरानी में कोई ऐसा बड़ा बदलाव नहीं मिला जिससे गंभीर सुनामी खतरा बना रहे। करीब तीन घंटे बाद चेतावनी हटा दी गई।

 

6. Indonesia Earthquake का Epicentre कहाँ था?

USGS के अनुसार इसका केंद्र फ्लोरेस क्षेत्र में समुद्र के नीचे, एंडे से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था।

 

7. Tsunami Warning Indonesia में लोगों को क्या सावधानी बरतने को कहा गया?

तटीय इलाकों के लोगों को समुद्र तट और नदी किनारे से दूर जाने तथा ऊंची जगहों पर जाने की सलाह दी गई थी। चेतावनी हटने तक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया।

 

8. Indonesia Earthquake के बाद कितने Aftershocks आए?

मुख्य भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के झटकों का उल्लेख था। बाद में भी क्षेत्र में आफ्टरशॉक जारी रहने की जानकारी सामने आई।

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