रक्षा क्षेत्र में बड़ा दांव: भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण को लेकर अडानी-लियोनार्डो की डील

भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इटली की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी लियोनार्डो ने भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। यह साझेदारी न केवल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूती देती है, बल्कि भारत को हेलीकॉप्टर निर्माण के वैश्विक मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।

 

साझेदारी का उद्देश्य और स्वरूप

इस साझेदारी के तहत भारत में एक एकीकृत हेलीकॉप्टर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Integrated Manufacturing Ecosystem) विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल हेलीकॉप्टरों का असेंबली कार्य नहीं, बल्कि निर्माण, स्वदेशीकरण, रखरखाव (MRO), पायलट प्रशिक्षण और दीर्घकालिक सपोर्ट को एक ही ढांचे में लाना है।

 

समझौते के अनुसार, यह साझेदारी मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की गई है। इसमें लियोनार्डो के अत्याधुनिक AW169M और AW109 TrekkerM जैसे मल्टी-रोल सैन्य हेलीकॉप्टर शामिल हैं, जिनका उपयोग परिवहन, निगरानी, आपदा राहत और सीमावर्ती क्षेत्रों में किया जा सकता है।

 

भारत में हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता क्यों बढ़ रही है?

भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक संरचना वाले देश में हेलीकॉप्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्र, सीमावर्ती इलाके, द्वीप क्षेत्र, घने जंगल और आपदा-प्रवण क्षेत्र-इन सभी जगहों पर हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता होती है।

 

वर्तमान में भारत में हेलीकॉप्टरों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हेलीकॉप्टर घनत्व (Helicopter Penetration Density) 250 से भी कम है, जो विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में भारत को हर साल लगभग 100 नए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर यह मांग 1,000 से अधिक हेलीकॉप्टरों तक जा सकती है।

Adani-Leonardo deal to manufacture helicopters in India

आत्मनिर्भरता और रणनीतिक लाभ

अब तक भारत बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टरों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा का बड़ा खर्च होता है, बल्कि रणनीतिक निर्भरता भी बनी रहती है। अडानी–लियोनार्डो साझेदारी इस निर्भरता को कम करने में मदद करेगी।

 

इस परियोजना के तहत चरणबद्ध स्वदेशीकरण (Phased Indigenisation) की योजना बनाई गई है। यानी शुरुआत में कुछ पुर्जे आयात किए जा सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे अधिकतम हिस्से भारत में ही बनाए जाएंगे। इससे घरेलू उद्योग, MSMEs और सप्लाई चेन को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

रखरखाव और प्रशिक्षण में सुधार

रक्षा उपकरणों में केवल खरीद ही नहीं, बल्कि रखरखाव और परिचालन क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भारत में MRO सुविधाओं की कमी के कारण कई बार हेलीकॉप्टर लंबे समय तक ग्राउंडेड रहते हैं। इस साझेदारी के तहत मजबूत MRO नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे परिचालन तैयारियों में सुधार होगा।

 

इसके अलावा, पायलट और तकनीकी स्टाफ के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं भी भारत में ही विकसित की जाएंगी। इससे विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी कमी आएगी।

 

नागरिक क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ

हालांकि यह परियोजना मुख्य रूप से रक्षा आवश्यकताओं पर केंद्रित है, लेकिन इसका लाभ नागरिक उड्डयन क्षेत्र को भी मिलेगा। हेलीकॉप्टरों का उपयोग आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, आपदा राहत, तटीय निगरानी, वीआईपी परिवहन और दूरदराज़ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

 

इससे भारत में हेलीकॉप्टर आधारित सेवाओं का विस्तार होगा और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा।

 

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की स्थिति

लियोनार्डो एक वैश्विक स्तर की कंपनी है, जिसकी तकनीक और अनुभव विश्वसनीय माने जाते हैं। भारत के साथ यह साझेदारी दर्शाती है कि भारत अब केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि निर्माण और नवाचार का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

 

यह कदम हाल ही में अडानी समूह और ब्राज़ील की कंपनी एम्ब्राएर के साथ हुए विमान निर्माण सहयोग के बाद आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत एयरोस्पेस क्षेत्र में एक समग्र निर्माण हब बनने की दिशा में अग्रसर है।

 

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

हालांकि यह साझेदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी होंगी-जैसे तकनीक का वास्तविक हस्तांतरण, लागत प्रतिस्पर्धा, गुणवत्ता मानक और समयबद्ध उत्पादन। इसके लिए सरकार, निजी क्षेत्र और सशस्त्र बलों के बीच समन्वय और स्पष्ट नीति समर्थन आवश्यक होगा।

 

यदि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा गया, तो यह परियोजना भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है।

 

निष्कर्ष:

अडानी–लियोनार्डो साझेदारी भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक रणनीतिक परिवर्तन का संकेत है। यह न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में भी सहायक होगी। यह पहल भारत की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता एक साथ आगे बढ़ते हैं।

 

UPSC प्रीलिम्स प्रश्न

प्रश्न: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और लियोनार्डो की साझेदारी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में एकीकृत हेलीकॉप्टर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
  2. इसमें केवल नागरिक हेलीकॉप्टरों के निर्माण पर ध्यान दिया गया है।
  3. भारत में अगले दशक में हेलीकॉप्टरों की मांग 1,000 से अधिक हो सकती है।

सही कथन चुनिए:
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

 

UPSC मेन्स प्रश्न

प्रश्न:
“भारत में रक्षा एयरोस्पेस क्षेत्र में निजी भागीदारी आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार बन रही है।”
अडानी–लियोनार्डो हेलीकॉप्टर निर्माण साझेदारी के संदर्भ में इस कथन की व्याख्या कीजिए।