मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों को हिला कर रख दिया है। अब तक सबकी नजर Strait of Hormuz पर थी, लेकिन अब एक और समुद्री रास्ता तेजी से चर्चा में आ गया है – Bab el-Mandeb Strait। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रास्ता अब वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।यह समुद्री रास्ता लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित है और एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए बेहद अहम है। मौजूदा हालात में जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ रहा है, तब यह इलाका भी अस्थिर होता दिख रहा है। खासकर यमन के हौथी समूह के इस संघर्ष में शामिल होने के बाद जोखिम और बढ़ गया है।

Bab el-Mandeb Strait के बारे में
Bab el-Mandeb Strait दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, खासकर तब जब Strait of Hormuz पर दबाव बढ़ जाता है या वह प्रभावित होता है। यह Suez Canal का दक्षिणी प्रवेश द्वार है, इसलिए एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाले व्यापार के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। हर साल दुनिया के लगभग 10–12% समुद्री व्यापार और करीब 9% समुद्री तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।
यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल लगभग 29 किलोमीटर चौड़ा है, जिससे जहाजों को सीमित रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इसी वजह से यह इलाका ब्लॉकेड, बारूदी सुरंग (माइन) या मिसाइल हमलों के लिए बेहद संवेदनशील बन जाता है।

Suez Canal, जो इस रास्ते पर निर्भर है, वहां जहाजों की आवाजाही में पहले ही गिरावट देखी जा चुकी है। 2023 में जहां करीब 26,000 जहाज इस मार्ग से गुजरे थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर लगभग 12,700 रह गई, जिसका एक बड़ा कारण हौथी हमले रहे हैं। अब ईरान से जुड़े तनाव बढ़ने के कारण इस क्षेत्र की स्थिति और भी नाजुक हो गई है।
क्यों बढ़ी इस रास्ते की अहमियत?
दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई के लिए कुछ ही अहम रास्ते हैं, जिन्हें “चोक पॉइंट” कहा जाता है। Strait of Hormuz उनमें सबसे बड़ा है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। लेकिन जब इस रास्ते पर दबाव बढ़ता है, तो ध्यान अपने आप दूसरे विकल्पों की ओर जाता है – और यही वजह है कि अब Bab el-Mandeb Strait पर फोकस बढ़ गया है।
यह रास्ता Red Sea को Gulf of Aden और आगे Indian Ocean से जोड़ता है। इसकी लंबाई करीब 100 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग 30 किलोमीटर है। यह यमन को अफ्रीका के देशों जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है।
इस रास्ते से गुजरकर जहाज आगे Suez Canal तक पहुंचते हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच सबसे छोटा और तेज समुद्री मार्ग है। इसलिए यह इलाका सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार के लिए बेहद जरूरी है।
वैश्विक व्यापार की रीढ़ है यह रास्ता
आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के करीब 10 से 12 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। वहीं, कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा भी यहां से गुजरता है।
अगर Suez Canal को देखें, तो दुनिया के करीब 40 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ ऊर्जा का रास्ता नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस इलाके में खतरा बढ़ता है, तो जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी छोर Cape of Good Hope से होकर जाना होगा, जिससे यात्रा का समय कई दिनों या हफ्तों तक बढ़ सकता है।
खतरा सिर्फ बंद होने का नहीं, डर का भी
इस समय सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा, बल्कि यह है कि वहां लगातार हमले या खतरे बने रहें। मिसाइल या ड्रोन हमलों का डर ही जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर सकता है।
जैसे ही जहाज रास्ता बदलते हैं, कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं –
- यात्रा का समय बढ़ जाता है
- ईंधन की लागत बढ़ती है
- माल ढुलाई महंगी हो जाती है
- बीमा खर्च बढ़ जाता है
इसका असर सीधे तौर पर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ता है।
ईरान की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
ईरान के एक सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे, तो वह अन्य समुद्री रास्तों में भी असुरक्षा बढ़ा सकता है, जिसमें Bab el-Mandeb Strait और लाल सागर शामिल हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब Strait of Hormuz पहले से ही काफी दबाव में है। अगर दोनों रास्तों पर एक साथ असर पड़ता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
वैकल्पिक रास्ता भी जोखिम में
जब होर्मुज में परेशानी बढ़ती है, तो कई देश अपने तेल को दूसरे रास्तों से भेजने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के तौर पर सऊदी अरब अपने पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए तेल को लाल सागर के बंदरगाह यनबू तक पहुंचाता है, जहां से जहाजों के जरिए इसे आगे भेजा जाता है।
लेकिन अगर Bab el-Mandeb Strait भी असुरक्षित हो जाए, तो यह विकल्प भी कमजोर पड़ जाएगा। इससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
पहले से ही कम हो चुका है ट्रैफिक
यह समस्या नई नहीं है। पिछले कुछ समय से लाल सागर क्षेत्र में हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही पहले ही कम हो चुकी है।
2023 में जहां करीब 26,000 जहाज Suez Canal से गुजरे थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 12,700 रह गई। इसी तरह, रोजाना जहाजों की संख्या भी 75 से घटकर करीब 33 रह गई है।
इससे साफ है कि खतरे का असर पहले ही दिखाई देने लगा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत के लिए Bab el-Mandeb Strait बेहद अहम है। देश की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से आती है।
अगर यह रास्ता प्रभावित होता है, तो भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है –
- तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है
- सामान आने में देरी हो सकती है
- उद्योगों की लागत बढ़ सकती है
अगर जहाजों को Cape of Good Hope के रास्ते जाना पड़ा, तो सामान आने में करीब एक महीने तक की देरी हो सकती है। इससे देश में महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा
यह रास्ता सिर्फ ऊर्जा के लिए नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन के लिए जरूरी है। कंटेनर, कच्चा माल, तैयार उत्पाद – सब कुछ इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
अगर यहां कोई बड़ी बाधा आती है, तो इसका असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष:
मिडिल ईस्ट का यह बढ़ता संघर्ष अब सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। Strait of Hormuz के बाद Bab el-Mandeb Strait पर बढ़ता खतरा यह दिखाता है कि दुनिया के अहम समुद्री रास्ते कितने संवेदनशील हैं।
अगर दोनों रास्तों पर एक साथ असर पड़ता है, तो यह सिर्फ तेल संकट नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़ा वैश्विक व्यापार संकट बन सकता है।

