दस महीने के बाद भारत–कनाडा ने की नए राजदूतों की नियुक्ति, कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की पहल की

भारत और कनाडा ने दस महीने के अंतराल के बाद अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति कर राजनयिक संबंधों में नई गति दी है। अब भारत के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ दिनेश के. पटनायक कनाडा में भारत के नए उच्चायुक्त होंगे, वहीं कनाडा ने क्रिस्टोफर कूटर को भारत में अपना उच्चायुक्त नियुक्त किया है। इस कदम से दोनों देशों के बीच सामान्य राजनयिक संवाद और सहयोग फिर से सशक्त होने की संभावना बढ़ गई है।

 

दिनेश के. पटनायक कौन हैं?

दिनेश के. पटनायक 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। फिलहाल वे स्पेन में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें तीन दशकों से अधिक का कूटनीतिक अनुभव है और उन्होंने दुनिया के कई महत्वपूर्ण भारतीय मिशनों में सेवाएं दी हैं। वे बीजिंग, ढाका, वियना और जेनेवा में भारत के मिशनों का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा, वे मोरक्को और कंबोडिया में राजदूत रहे और लंदन में डिप्टी हाई कमिश्नर के रूप में भी कार्य किया। पटनायक भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के महानिदेशक के पद पर भी रह चुके हैं। उनकी कूटनीतिक यात्रा भारत की विदेश नीति और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

 

क्रिस्टोफर कूटर कौन हैं?

क्रिस्टोफर कूटर 35 वर्षों के अनुभव वाले एक पेशेवर राजनयिक हैं। हाल ही में उन्होंने इज़राइल में कनाडा के प्रभारी राजदूत के रूप में कार्य किया है। इससे पहले वे कई अफ्रीकी देशों में उच्चायुक्त के पद पर कार्य कर चुके हैं। 1990 के दशक के अंत में वे नई दिल्ली में भी तैनात रहे, जहां उन्होंने कूटनीतिक अनुभव को और गहराई प्रदान की। उनके लंबे करियर ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राजनयिक समझ को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

 

भारत-कनाडा रिश्तों में तनाव:

जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित सरे में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या ने भारत-कनाडा संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया। निज्जर पर भारत में आतंकवाद के आरोप थे और उसे साल 2020 में आतंकवादी घोषित किया जा चुका था। इस हत्या के तुरंत बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर संलिप्तता का आरोप लगाया, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया।

भारत ने इस आरोप को ‘बेतुका’ और ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए खारिज कर दिया और कनाडा से ठोस सबूत पेश करने की मांग की। भारत ने आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया और कनाडा पर सिख अलगाववादियों को शरण देने का भी आरोप लगाया। इसी विवाद के चलते भारत ने अक्टूबर 2023 में अपने उच्चायुक्त को कनाडा से वापस बुलाया, जबकि कनाडा ने भारत के उच्चायुक्त को निष्कासित करने की धमकी दी। इसके जवाब में भारत ने नई दिल्ली में कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त समेत छह वरिष्ठ राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया। यह घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में सबसे तनावपूर्ण दौर के रूप में दर्ज हुआ।

 

भारत ने खालिस्तानी गतिविधियों पर जताई चिंता

इस पूरे विवाद के दौरान भारत ने कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी समूहों को राजनीतिक और सामाजिक स्थान दिए जाने पर लगातार चिंता व्यक्त की और ट्रूडो सरकार की नीतियों की आलोचना की। भारत का मानना था कि इन समूहों को खुला राजनीतिक मंच मिलने से दोनों देशों के बीच तनाव और सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं।

इसके जवाब में कनाडाई सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वह देश के संवैधानिक अधिकारों, विशेषकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कार्य कर रही है, बशर्ते कि यह अभिव्यक्ति किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा न दे। इस स्टैंड ने दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर किया।

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मोदी–कार्नी मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार की शुरुआत

भारत और कनाडा के रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया जून 2025 में शुरू हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन (अल्बर्टा) के दौरान कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से पहली बार मुलाकात की। इस बैठक ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पारस्परिक सम्मान, लोगों के बीच मजबूत संबंध और बढ़ती आर्थिक पूरकताओं पर आधारित संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने यह भी कहा कि भारत कनाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर खालिस्तानी अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर लगातार जोर देगा, क्योंकि ये समूह भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुलाकात के बाद उच्चायुक्तों की नियुक्ति पर सहमति बनी और दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए कदम बढ़ाए। मोदी और कार्नी ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए संबंधों के पुनर्निर्माण पर सहमति व्यक्त की।

 

दिनेश के. पटनायक की नियुक्ति: भारत– कनाडा संबंधों को नई दिशा

भारत के वरिष्ठ राजनयिक दिनेश के. पटनायक को कनाडा में उच्चायुक्त नियुक्त करने का निर्णय यह स्पष्ट संकेत देता है कि दोनों देश अपने संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में गंभीर हैं। हालांकि, चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। भारत के लिए खालिस्तान समर्थक गतिविधियां सर्वोच्च चिंता बनी रहेंगी, वहीं कनाडा को अपने घरेलू राजनीतिक दबावों का भी सामना करना पड़ रहा है।

संबंध केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और शिक्षा संबंध हैं, जिसमें हजारों भारतीय छात्र कनाडा में अध्ययनरत हैं और व्यापारिक साझेदारी भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पटनायक की जिम्मेदारी सिर्फ कूटनीतिक तनाव कम करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें शिक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को भी और मजबूत करना होगा।

 

खालिस्तान मुद्दा: भारत-कनाडा कूटनीतिक तनाव

खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन, जो भारत से अलग एक स्वतंत्र सिख राज्य की मांग करता है, लंबे समय से भारत और कनाडा के बीच तनाव का मुख्य कारण रहा है। हाल के वर्षों में यह मुद्दा कनाडा में सिख डायस्पोरा की सक्रियता और सोशल मीडिया पर खालिस्तानी प्रचार के कारण और अधिक प्रमुख हो गया है। भारत ने कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थकों के प्रभाव पर लगातार चिंता जताई है और कनाडा सरकार पर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई न करने की आलोचना की है।

हाल की घटनाएँ:

  • सितंबर 2023: तनाव तब चरम पर पहुंचा जब कनाडा के प्रधानमंत्री ने एक सिख अलगाववादी की हत्या में भारत को शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे भारत ने पूरी तरह खारिज किया।
  • G20 शिखर सम्मेलन 2023: भारत और कनाडा केवल सम्मेलन के साइडलाइन पर मिले; द्विपक्षीय बातचीत सीमित रही।
  • व्यापार वार्ता में ठहराव: प्रॉ-खालिस्तान गतिविधियों के कारण भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत स्थगित हो गई।
  • राजनयिक कदम: दोनों देशों ने वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित किया, और भारत ने कनाडा को अपने उच्चायुक्तों की संख्या घटाने का निर्देश दिया।
  • वीजा प्रतिबंध: भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीज़ा प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी, चाहे वह भारत में हों या किसी तीसरे देश में।

यह मुद्दा भारत-कनाडा संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसका असर कूटनीति, व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों पर पड़ता है।

 

निष्कर्ष: कनाडा के नए प्रधानमंत्री मॉर्क कोनी के नेतृत्व में भारत–कनाडा रिश्तों में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। नई नीतियों और आपसी संवाद ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में नई उम्मीदें जगाई हैं। लेकिन आगे भी खालिस्तान मुद्दा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जो द्विपक्षीय रिश्तों की स्थिरता और प्रगाढ़ता पर असर डाल सकता है।