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बारामती हादसे के बाद NCP में नई खींचतान, किस ओर जाएगी महाराष्ट्र की राजनीति, क्या बदलने वाला है महाराष्ट्र का सियासी समीकरण ?

28 जनवरी को बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। उनके पद, विभागों के आवंटन और NCP के दोनों धड़ों के एकीकरण को लेकर राज्य में राजनीतिक हलचल

बारामती हादसे के बाद NCP में नई खींचतान, किस ओर जाएगी महाराष्ट्र की राजनीति, क्या बदलने वाला है महाराष्ट्र का सियासी समीकरण ?

28 जनवरी को बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। उनके पद, विभागों के आवंटन और NCP के दोनों धड़ों के एकीकरण को लेकर राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं।

 

फडणवीस से मिले NCP के शीर्ष नेता

शुक्रवार को प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे सहित NCP के प्रमुख नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास वर्षा बंगले पर पहुंचे। लगभग आधे घंटे तक चली इस बैठक में पार्टी के भविष्य और सरकार में अजित पवार के पास रहे महत्वपूर्ण विभागों के आवंटन पर चर्चा हुई।

 

अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त, आबकारी और खेल विभाग भी संभाल रहे थे। इन महत्वपूर्ण विभागों और पार्टी की राष्ट्रीय नेतृत्व को किसे सौंपा जाए, यह सवाल अब पार्टी के समक्ष खड़ा है।

 

बैठक के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को जनभावनाओं को देखते हुए शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अजित के विभागों और NCP से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की अनिश्चितता नहीं रहनी चाहिए। कार्यकर्ताओं के असंतोष और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

After the Baramati accident new tension in NCP

विमान दुर्घटना में हुआ था निधन

अजित पवार जिला परिषद चुनाव के लिए रैली को संबोधित करने जा रहे थे तभी बारामती में उनके विमान की दुर्घटना हो गई। इस हादसे ने न केवल पार्टी को बल्कि पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। 16 वर्षों में छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व थे।

 

पत्नी सुनेत्रा ने बुलाए रणनीतिकार

अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने उनके चुनावी रणनीतिकार नरेश अरोड़ा को राजनीतिक परामर्श के लिए बारामती बुलाया है। नरेश की संस्था 'डिजाइनबॉक्स' राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए रणनीति तैयार करती रही है। यह कदम भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर संकेत देता है।

 

इसी बीच, 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समिति के मतदान की तारीख बदल दी गई है। अब यह मतदान 5 फरवरी के स्थान पर 7 फरवरी को होगा और परिणाम 9 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।

 

NCP विलय पर तीन पक्षों के दावे

अजित पवार के निधन से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के एकीकरण की बातचीत उन्नत चरण में थी। इस संबंध में तीन अलग-अलग नेताओं ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं:

 

किरण गुजर का बयान: अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि वे दोनों धड़ों को मिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। पांच दिन पूर्व अजित ने कहा था कि संपूर्ण प्रक्रिया समाप्ति की ओर है और आगामी दिनों में विलय संभव है। गुजर के मुताबिक, अजित के पास एकीकृत NCP के भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार था।

 

जयंत पाटिल की टिप्पणी: एनसीपी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने भी पुष्टि की कि विलय को लेकर अजित दादा और उनके बीच अनेक बैठकें हो चुकी थीं। अजित इस विचार के प्रति सकारात्मक रुख रखते थे। जिला परिषद चुनावों के पश्चात इस पर अंतिम फैसला होना था। अजित का मानना था कि पहले स्थानीय निकाय चुनाव गठबंधन करके लड़े जाएं, विलय का निर्णय उसके बाद लिया जाए।

 

एकनाथ खड़से का विश्वास: एनसीपी शरद गुट के नेता एकनाथ खड़से ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि दोनों गुट निश्चित रूप से एक साथ आएंगे। यह अंतिम फैसला शरद पवार लेंगे, ऐसा माना जा रहा है।

 

2024 विधानसभा चुनाव में NCP का प्रदर्शन

नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन ने 288 में से 230 सीटें जीतकर शानदार बहुमत हासिल किया था। इस गठबंधन में भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और NCP (अजित गुट) को 41 सीटें मिली थीं।

 

NCP ने कुल 59 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 41 पर विजय प्राप्त की। अजित पवार स्वयं बारामती सीट से चुने गए और उन्होंने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को 100,899 मतों के विशाल अंतर से पराजित किया था।

 

दूसरी ओर, विपक्षी महाविकास अघाड़ी में शामिल NCP (शरद पवार गुट) को केवल 10 सीटें मिलीं, जबकि शिव सेना (UBT) को 20, कांग्रेस को 16, समाजवादी पार्टी और जन सुराज्य शक्ति को 2-2 सीटें मिलीं।

 

सरकार में NCP के अजित पवार सहित 9 मंत्री थे, जिनमें 8 कैबिनेट मंत्री और 1 राज्य मंत्री शामिल हैं।

 

विलय होने पर क्या होगा संभावित प्रभाव

NCP (SP) के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि बुधवार को हुई विमान दुर्घटना से पूर्व दोनों पक्ष बातचीत के उन्नत चरण में पहुंच गए थे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की समाप्ति के तुरंत बाद विलय की घोषणा करने की योजना बनाई गई थी।

 

अजित पवार की रणनीति यह थी कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान जनता की नब्ज परखी जाए और पूर्ण विलय की घोषणा से पहले दोनों पार्टियों के मतदाता आधार को सुदृढ़ किया जाए।

 

सूत्रों का कहना है कि यदि विलय होता है तो राज्य की कैबिनेट के समीकरणों में आमूल परिवर्तन आएगा। NCP (SP) के नेता राज्य प्रशासन और पार्टी संगठन में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

 

इस एकीकरण को पश्चिमी महाराष्ट्र के शुगर बेल्ट पर पुनः वर्चस्व स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में हाल के नगर निगम चुनावों में भाजपा ने महत्वपूर्ण पकड़ बनाई है।

 

विलय के उपरांत NCP के पास 9 लोकसभा सांसदों और 51 विधायकों का मजबूत संयोजन होगा। यह संख्या बल सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन या विपक्षी महाविकास अघाड़ी के भीतर शक्ति संतुलन को परिवर्तित कर सकता है।

 

अजित पवार का राजनीतिक सफर

अजित पवार 16 वर्षों में छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल 11 नवंबर 2010 से 25 सितंबर 2012 तक रहा। दूसरा कार्यकाल 7 दिसंबर 2012 से 28 सितंबर 2014 तक, तीसरा कार्यकाल महज तीन दिन का था - 23 नवंबर 2019 से 26 नवंबर 2019 तक।

 

चौथा कार्यकाल 30 दिसंबर 2019 से 29 जून 2022, पांचवां 2 जुलाई 2023 से 5 दिसंबर 2024 और छठा तथा अंतिम कार्यकाल 5 दिसंबर 2024 से 29 जनवरी 2026 तक रहा।

 

जुलाई 2023 में हुआ था विभाजन

शरद पवार ने 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की थी। जुलाई 2023 में अजित पवार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में सम्मिलित हो गए और उन्हें उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। इसके परिणामस्वरूप NCP दो धड़ों में विभाजित हो गई।

 

नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के पश्चात भी अजित पवार उसी पद पर बने रहे।

 

पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर दोनों गुटों के बीच कड़ा संघर्ष देखा गया। अजित पवार के गुट को मूल NCP नाम और एनालॉग अलार्म घड़ी का चुनाव चिह्न प्राप्त हुआ। वर्तमान में NCP महायुति सरकार का हिस्सा है, जबकि NCP (SP) विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में शामिल है।

 

आगे की राह

अजित पवार के अचानक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। उनके विभागों का आवंटन, पार्टी नेतृत्व का सवाल और दोनों गुटों के विलय की संभावना - ये तीनों मुद्दे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

 

क्या अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा? क्या दोनों गुटों का विलय हो पाएगा? क्या महायुति गठबंधन में सीटों का पुनर्वितरण होगा? इन सभी सवालों के जवाब जल्द ही सामने आएंगे।

 

फिलहाल, NCP के नेता मुख्यमंत्री फडणवीस से शीघ्र निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच अनिश्चितता की स्थिति खत्म हो सके। आगामी जिला परिषद चुनाव भी इन फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

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