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अहमदाबाद विमान हादसा: एअर इंडिया ने दिया पीड़ित परिजन को ऑफर 10 से 20 लाख तक लो, मुकदमा छोड़ दो

पिछले वर्ष 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुआ एयर इंडिया का भीषण विमान हादसा एक बार फिर चर्चा में है। इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की जान गई थी। अब एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एयर इंडिया ने पीड़ित परिव

अहमदाबाद विमान हादसा: एअर इंडिया ने दिया पीड़ित परिजन को ऑफर 10 से 20 लाख तक लो, मुकदमा छोड़ दो

पिछले वर्ष 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुआ एयर इंडिया का भीषण विमान हादसा एक बार फिर चर्चा में है। इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की जान गई थी। अब एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एयर इंडिया ने पीड़ित परिवारों को अतिरिक्त नकद मुआवज़ा देने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसके साथ एक शर्त जोड़ी गई है-परिवारों को एयरलाइन और विमान निर्माता के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई का अधिकार छोड़ना होगा।

 

यह मामला सामने आने के बाद कानूनी और नैतिक सवाल उठने लगे हैं।

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हादसा कैसे हुआ था?

12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI171, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी, उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह विमान बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर था। विमान में कुल 242 लोग सवार थे। इसमें यात्री और चालक दल दोनों शामिल थे।

 

विमान की कमान कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर के हाथ में थी। टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान पास स्थित एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास भवन से टकरा गया और उसमें आग लग गई।

 

इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई। कुल मृतकों की संख्या 260 रही।

 

मरने वालों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली, 1 कनाडाई और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे। पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी इस दुर्घटना में मारे गए। इस हादसे में केवल एक व्यक्ति बच पाया-ब्रिटेन के नागरिक विश्वाशकुमार रमेश।

 

मुआवज़े की पहली घोषणा

दुर्घटना के तुरंत बाद एयर इंडिया ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता देने की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त, एयर इंडिया की मालिक कंपनी टाटा समूह ने हर पीड़ित के परिवार को 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया था।

 

इन घोषणाओं को उस समय राहत के कदम के रूप में देखा गया था। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एयरलाइन ने अतिरिक्त भुगतान की पेशकश की है।

 

नई शर्त पर उठे सवाल

ब्रिटिश अख़बार द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने कुछ परिवारों को 10 लाख से 20 लाख रुपये के बीच अतिरिक्त राशि देने की पेशकश की है। लेकिन इसके बदले परिवारों से एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा है।

 

इस दस्तावेज़ में लिखा है कि परिवार “हमेशा के लिए और बिना किसी शर्त के” दुर्घटना से जुड़े किसी भी दावे या मुकदमे का अधिकार छोड़ देंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि चाहे मामला किसी भी देश या अदालत में क्यों न हो, यह समझौता लागू रहेगा।

 

रिपोर्ट के अनुसार, एक धारा में स्पष्ट लिखा है कि हस्ताक्षर करने वाले सभी कानूनी अधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर देंगे।

 

वकीलों की आपत्ति

कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। चियोनुमा लॉ से जुड़े केस मैनेजर आयुष दुबे ने कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और दुर्घटना के सभी तथ्य सामने नहीं आए हैं। ऐसे समय में परिवारों से उनके सभी कानूनी अधिकार छोड़ने के लिए कहना उचित नहीं है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ घायल परिवारों का इलाज अभी जारी है। जिन लोगों का इलाज पूरा भी नहीं हुआ है, उनसे भविष्य के दावों का अधिकार छोड़ने के लिए कहना गलत है।

 

अलग-अलग देशों में मुकदमे

रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे को लेकर ब्रिटेन की अदालतों में कई मुकदमे दायर किए गए हैं। लंदन हाई कोर्ट में व्यक्तिगत चोट से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं।

 

कीस्टोन लॉ के विमानन विशेषज्ञ जेम्स हीली-प्रैट ने बताया कि एयर इंडिया के खिलाफ हाई कोर्ट में कार्यवाही शुरू की गई है, हालांकि अभी औपचारिक रूप से नोटिस नहीं दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लंदन में होने वाली गोपनीय बातचीत से बिना मुकदमे के समाधान निकल सकता है।

 

दूसरी ओर, चार पीड़ितों के परिवारों ने अमेरिका में बोइंग और हनीवेल के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि ईंधन से जुड़े एक स्विच में खराबी के कारण यह हादसा हुआ।

 

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत दुर्घटना के लगभग 30 दिन बाद एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें कहा गया था कि उड़ान भरने के तीन सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच लगभग एक साथ “रन” से “कटऑफ” स्थिति में चले गए थे। इससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और विमान नियंत्रण खो बैठा।

 

हालांकि अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।

 

सुप्रीम कोर्ट की दखल

इस मामले में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से पूछा है कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) किस प्रक्रिया के तहत जांच कर रहा है।

 

सरकार की ओर से बताया गया कि जांच अंतिम चरण में है, हालांकि कुछ पहलुओं की जांच विदेश में की जानी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि AAIB का काम दुर्घटना का कारण पता लगाना है, दोष तय करना नहीं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

 

आगे क्या?

यह हादसा पहले ही देश और विदेश में गहरा असर छोड़ चुका है। अब मुआवज़े की शर्तों को लेकर उठे सवालों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

परिवारों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती, तब तक उन्हें अपने कानूनी अधिकार नहीं छोड़ने चाहिए। वहीं एयरलाइन की ओर से इस विषय पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

जांच पूरी होने और अदालतों में चल रही कार्यवाही के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस दुखद हादसे की अंतिम जिम्मेदारी किस पर तय होती है और पीड़ित परिवारों को न्याय कैसे मिलेगा।

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