भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए वैश्विक AI कंपनी Anthropic ने अपना पहला भारतीय कार्यालय बेंगलुरु में खोल दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब देश में India AI Impact Summit आयोजित हो रहा है। कंपनी ने न केवल अपने नए ऑफिस की शुरुआत की है, बल्कि शिक्षा, कृषि, कानून और बड़े उद्योगों के साथ कई अहम साझेदारियों का भी ऐलान किया है।
Anthropic का AI मॉडल “Claude” भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कंपनी के अनुसार, भारत Claude के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। खास बात यह है कि भारत में Claude का लगभग आधा उपयोग कंप्यूटर और गणित से जुड़े कामों के लिए हो रहा है, जैसे सॉफ्टवेयर बनाना, सिस्टम को बेहतर करना और तकनीकी समाधान तैयार करना।
भारत में दोगुनी हुई कंपनी की आय
Anthropic ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में भारत में विस्तार की घोषणा के बाद से यहां उसकी “रन-रेट रेवेन्यू” यानी अनुमानित वार्षिक आय दोगुनी हो गई है। रन-रेट रेवेन्यू का मतलब है कि कंपनी हाल की कमाई के आधार पर आने वाले समय की आय का अंदाजा लगाती है। इससे साफ है कि भारत में Claude की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
भारत में कंपनी की प्रमुख (मैनेजिंग डायरेक्टर) इरीना घोष के नेतृत्व में बेंगलुरु ऑफिस काम करेगा। उनका कहना है कि भारत में जिम्मेदार और सुरक्षित AI को बड़े स्तर पर पहुंचाने की बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास तकनीकी प्रतिभा, डिजिटल ढांचा और तकनीक से लोगों की जिंदगी बदलने का अनुभव है, जो AI के सही उपयोग के लिए बेहद जरूरी है।
भारतीय भाषाओं पर खास ध्यान
भारत में एक अरब से अधिक लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, लेकिन अधिकतर AI मॉडल अंग्रेज़ी में बेहतर काम करते हैं। इस अंतर को कम करने के लिए Anthropic ने छह महीने पहले एक पहल शुरू की थी। इसके तहत कंपनी ने 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं – हिंदी, बांग्ला, मराठी, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और उर्दू – में अपने मॉडल को बेहतर बनाने का काम शुरू किया।
अब कंपनी Karya और Collective Intelligence Project जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। ये दोनों संगठन नैतिक (ethical) AI विकास पर काम करते हैं। इनके साथ मिलकर कृषि और कानून जैसे क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से AI की क्षमता को परखा जाएगा। इस काम में Digital Green और Adalat AI जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के विशेषज्ञ भी जुड़े हुए हैं। कंपनी का इरादा है कि इन परीक्षणों (evaluation) को सार्वजनिक किया जाए, ताकि अन्य संस्थाएं भी उनका उपयोग कर सकें।
किन कंपनियों ने अपनाया Claude?
भारत की कई बड़ी और उभरती कंपनियां Claude का उपयोग कर रही हैं।
एयर इंडिया अपने डेवलपर्स की मदद के लिए Claude Code का इस्तेमाल कर रही है, जिससे सॉफ्टवेयर जल्दी और कम लागत में तैयार हो पा रहा है। फिनटेक कंपनी CRED ने बताया कि Claude Code की मदद से वह नए फीचर पहले से दोगुनी तेजी से जारी कर पा रही है और टेस्टिंग में भी 10 प्रतिशत सुधार हुआ है।
आईटी सेवा कंपनी Cognizant दुनिया भर में अपने 3.5 लाख कर्मचारियों के लिए Claude टूल लागू कर रही है। इसका उद्देश्य पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाना और AI को तेज़ी से अपनाना है।
स्टार्टअप जगत में भी Claude की पकड़ मजबूत हो रही है। Razorpay ने जोखिम प्रबंधन और अपने रोज़मर्रा के कामकाज में AI को शामिल किया है। Enterpret अपने AI असिस्टेंट और इंजीनियरिंग कामों में Claude का उपयोग कर रही है। वहीं Emergent नाम का एक प्लेटफॉर्म, जहां लोग साधारण भाषा में लिखकर सॉफ्टवेयर बना सकते हैं, पांच महीने में ही 20 लाख उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गया और 2.5 करोड़ डॉलर की वार्षिक आय हासिल कर ली – यह सब Claude की मदद से संभव हुआ।
शिक्षा क्षेत्र में नई पहल
भारत में Claude के उपयोग का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा और सीखने से जुड़ा है। इसी दिशा में Anthropic ने शिक्षा क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है।
देश की बड़ी शिक्षा संस्था Pratham ने Anthropic को अपना पहला रणनीतिक AI साझेदार चुना है। दोनों मिलकर “Anytime Testing Machine” नामक एक डिजिटल परीक्षा प्लेटफॉर्म चला रहे हैं, जो Claude से संचालित है। फिलहाल यह 20 स्कूलों में 1,500 छात्रों के साथ परीक्षण के रूप में चल रहा है। योजना है कि 2026 के अंत तक इसे 100 स्कूलों तक बढ़ाया जाए।
Pratham के “Second Chance” कार्यक्रम में, जो पढ़ाई छोड़ चुकी महिलाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ता है, इस मशीन का उपयोग 5,000 से अधिक शिक्षार्थियों के लिए किया जा चुका है। इसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद देना और उन्हें प्रमाणपत्र प्राप्त करने का अवसर देना है।
इसके अलावा, Anthropic Central Square Foundation के साथ भी काम कर रहा है। इसके तहत AI आधारित शिक्षा उपकरण तैयार किए जाएंगे, जैसे व्यक्तिगत डिजिटल शिक्षक, शिक्षक प्रशिक्षण समाधान और बेहतर मूल्यांकन प्रणाली। लक्ष्य है कि प्राथमिक कक्षाओं के अधिक से अधिक बच्चों तक इन साधनों को पहुंचाया जाए।
कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में AI
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है और लगभग आधी आबादी इससे जुड़ी है। Anthropic, EkStep Foundation के साथ मिलकर यह देख रहा है कि AI को देश के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे में कैसे जोड़ा जाए। OpenAgriNet पहल के तहत Claude का उपयोग किसानों तक विशेषज्ञ जानकारी पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कंपनी गैर-लाभकारी संस्थाओं के साथ काम कर रही है। Noora Health और Intelehealth जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर Claude का उपयोग स्वास्थ्य सलाह और दूरदराज के इलाकों में मरीजों तक चिकित्सा सेवा पहुंचाने में किया जा रहा है।
कानूनी क्षेत्र में, जहां भारत में लगभग 5 करोड़ मामले लंबित हैं, Anthropic Adalat AI के साथ एक राष्ट्रीय व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू कर रहा है। इस सेवा के जरिए लोग अपने केस की जानकारी तुरंत पा सकेंगे। Claude की मदद से केस का सार, अनुवाद और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी स्थानीय भाषा में मिल सकेगी।
खुला तकनीकी मानक और सरकारी सहयोग
Anthropic ने Model Context Protocol (MCP) नाम का एक ओपन-सोर्स मानक तैयार किया है, जो AI सिस्टम को बाहरी प्लेटफॉर्म से जोड़ने में मदद करता है। इसे Linux Foundation को दान कर दिया गया है।
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने, Bharat Digital के सहयोग से, देश का पहला आधिकारिक MCP सर्वर शुरू किया है। इससे AI सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय आंकड़ों तक आसान और भरोसेमंद पहुंच मिल सकेगी।
निजी क्षेत्र में, Swiggy MCP का उपयोग करके लोगों को सीधे Claude के माध्यम से किराना ऑर्डर करने और रेस्टोरेंट बुकिंग की सुविधा दे रहा है।
भारत में मजबूत होती मौजूदगी
बेंगलुरु में खुला नया कार्यालय एशिया में Anthropic का दूसरा ऑफिस है, पहला टोक्यो में है। यह ऑफिस तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों की भर्ती पर ध्यान देगा। कंपनी का कहना है कि आने वाले महीनों और वर्षों में भारत में उसकी भागीदारी और भी गहरी होगी।
Anthropic की इन पहलों से साफ है कि कंपनी भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि AI नवाचार का प्रमुख केंद्र मान रही है। भारतीय भाषाओं, शिक्षा, कृषि, कानून और उद्योगों में AI के उपयोग पर जोर देकर वह जिम्मेदार और व्यापक AI उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
