बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने एक इंटरव्यू में अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। दूसरी ओर, हाल ही में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार ने सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया है। साथ ही अमेरिका के साथ हुए नए व्यापार समझौते और चुनावी विवादों ने भी माहौल को और गर्म कर दिया है।
राष्ट्रपति के आरोपों से बढ़ा विवाद
राष्ट्रपति शाहबुद्दीन ने कहा कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद बनी अंतरिम सरकार ने उन्हें पद से हटाने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि 8 अगस्त 2024 को उन्होंने खुद मोहम्मद यूनुस को पद की शपथ दिलाई थी। उनके मुताबिक, यूनुस 16 फरवरी 2026 तक वास्तविक प्रधानमंत्री की तरह काम करते रहे।
राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें कई अहम फैसलों से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि उनके दो विदेश दौरे रद्द कर दिए गए। एक बार उन्हें कोसोवो जाने से रोका गया, जबकि दूसरी बार कतर के अमीर के निमंत्रण पर विदेश मंत्रालय ने यह कहकर कार्यक्रम रद्द कर दिया कि राष्ट्रपति व्यस्त हैं। शाहबुद्दीन का कहना है कि इन फैसलों में उनसे सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से कुछ दिन पहले किए गए बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उनके अनुसार, किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते की जानकारी राष्ट्रपति को देना संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

“संविधान का पालन नहीं हुआ”
राष्ट्रपति ने यूनुस पर आरोप लगाया कि उन्होंने संविधान के प्रावधानों का ठीक से पालन नहीं किया। उनके मुताबिक, अंतरिम सरकार ने ऐसे अध्यादेश जारी किए जिनकी जरूरत नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यूनुस अपने विदेशी दौरों की जानकारी साझा नहीं करते थे और 14-15 बार विदेश जाने के बावजूद राष्ट्रपति को सूचित नहीं किया।
22 अक्टूबर 2024 की रात का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उस दिन भीड़ ने राष्ट्रपति भवन ‘बंगाभवन’ को घेर लिया था और उन्हें हटाने की मांग की थी। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे डरावनी रात बताया।
तारिक रहमान को बताया ईमानदार
राष्ट्रपति ने कहा कि जब उन्हें हटाने की कोशिश हो रही थी, तब BNP के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें भरोसा दिया कि वे संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं। शाहबुद्दीन ने मौजूदा प्रधानमंत्री और BNP प्रमुख तारिक रहमान को ईमानदार और शांत स्वभाव का बताया।
उन्होंने कहा कि सेना की तीनों शाखाओं के प्रमुखों ने भी उन्हें समर्थन दिया। सेना प्रमुखों ने कथित तौर पर कहा कि राष्ट्रपति की हार पूरे सैन्य ढांचे की हार मानी जाएगी।
गौरतलब है कि शाहबुद्दीन 24 अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति बने थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक है। दिसंबर 2025 में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अंतरिम सरकार के दौरान वे खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे और चुनाव के बाद इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे।
यूनुस पर संपत्ति बढ़ने के आरोप
मोहम्मद यूनुस पर इससे पहले भी आरोप लग चुके हैं। हाल की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि अंतरिम सरकार के दौरान उनके मंत्रियों की संपत्ति में बढ़ोतरी हुई। बताया गया कि यूनुस की संपत्ति में एक साल में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह करीब साढ़े 12 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसमें लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपए का इजाफा बताया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, उनके 21 मंत्रियों में से 18 की संपत्ति बढ़ी। आवास मंत्री अदिलुर रहमान की संपत्ति में करीब 1 करोड़ 23 लाख रुपए की वृद्धि बताई गई। सूत्रों के अनुसार, नई सरकार इन मामलों की जांच के लिए एक समिति बना सकती है।
यूनुस बांग्लादेश के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता हैं और माइक्रो फाइनेंस क्षेत्र में उनका बड़ा नाम है। शेख हसीना सरकार के दौरान उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए थे, जिन्हें उनकी अंतरिम सरकार के दौरान वापस लिया गया।
अमेरिका से नया व्यापार समझौता
फरवरी 2026 में बांग्लादेश और अमेरिका के बीच नया व्यापार समझौता हुआ। इस समझौते के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ घटाकर लगभग 19 प्रतिशत कर दिया, जो पहले 35 प्रतिशत तक था।
इससे खासकर रेडीमेड गारमेंट उद्योग को फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका उसका बड़ा बाजार है। बदले में बांग्लादेश ने अमेरिका से तेल, गैस, अनाज और कुछ सैन्य उपकरण खरीदने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने और बाजार खोलने पर जोर दिया है।
सेना में बड़ा फेरबदल
प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिन बाद ही तारिक रहमान की सरकार ने सेना में बड़े बदलाव किए। ऑपरेशनल और खुफिया पदों पर नई नियुक्तियां की गईं।
भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल पद पर पदोन्नत कर 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का कमांडिंग अधिकारी बनाया गया। लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ नियुक्त किया गया। कई वरिष्ठ अधिकारियों को बदला गया या विदेश मंत्रालय में राजदूत बनाकर भेजा गया।
मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) का प्रमुख बनाया गया। लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिविजन का प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर नियुक्त किया गया।
फेरबदल के पीछे की वजह
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नई सरकार द्वारा सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। फरवरी 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार गिर गई थी और यूनुस की अंतरिम सरकार बनी थी। उस दौरान सेना के कई अहम पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।
अब फरवरी 2026 के चुनाव में BNP की जीत के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री बने और जल्द ही सेना में बदलाव किए। माना जा रहा है कि नई सरकार अपने भरोसेमंद अधिकारियों को अहम पदों पर लाकर किसी भी असंतुलन की संभावना कम करना चाहती है।
संभावित असर
- सरकार को स्थिरता: सेना का समर्थन मिलने से नई सरकार को मजबूती मिलेगी।
- पुराने प्रभाव में कमी: पिछली सरकारों से जुड़े माने जाने वाले अधिकारियों का प्रभाव घटेगा।
- भारत संबंधों पर असर: भारत में तैनात रक्षा सलाहकार की वापसी से सैन्य स्तर पर नए समीकरण बन सकते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर: नए अधिकारियों के साथ सेना का फोकस सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों पर बढ़ सकता है।
चुनावी विवाद भी गहराए
BNP की भारी जीत के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन और नेशनल सिटिजन पार्टी ने कहा कि कई सीटों पर हेरफेर हुई। उनका आरोप है कि चुनाव “इंजीनियरिंग” के जरिए प्रभावित किए गए और इसी वजह से BNP को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं।
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
आगे क्या?
बांग्लादेश इस समय राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति और पूर्व अंतरिम प्रमुख के बीच आरोप-प्रत्यारोप, सेना में बड़े फेरबदल, व्यापार समझौते और चुनावी विवाद-ये सब संकेत देते हैं कि देश की राजनीति अभी स्थिर नहीं हुई है।

