क्या बैंकों की ‘मिस-सेलिंग’ अब मानी जाएगी अपराध, RBI के नए नियम से बदलेगा खेल?

देश के वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों को गलत तरीके से बीमा या दूसरे उत्पाद बेचने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। अब इस मुद्दे पर सरकार ने सख्त रुख दिखाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ शब्दों में कहा है कि बैंकों के लिए ‘मिस-सेलिंग’ (mis-selling) कोई सामान्य व्यापार नहीं हो सकता, बल्कि यह एक अपराध है।


बजट के बाद आरबीआई (RBI) सेंट्रल बोर्ड के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “अगर आप मुझसे पूछें तो मिस-सेलिंग एक अपराध है।” इस दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी मौजूद थे। मंत्री ने बैंकों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि वे इस तरह की बिक्री को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं हैं।


RBI ला रहा है सख्त गाइडलाइन
वित्त मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों द्वारा गलत तरीके से उत्पाद बेचने पर रोक लगाने के लिए नई गाइडलाइन (guidelines) तैयार कर रहा है। 11 फरवरी को RBI ने ड्राफ्ट निर्देश जारी किए, जिनमें कहा गया है कि अगर किसी ग्राहक को गलत तरीके से कोई उत्पाद बेचा गया है, तो बैंक को उससे ली गई पूरी राशि लौटानी होगी और हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।


इन प्रस्तावित नियमों पर 4 मार्च तक लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। अगर सब तय समय पर हुआ, तो ये नियम 1 जुलाई से लागू हो सकते हैं।

Bank mis-selling India

एक साल से उठ रहे थे सवाल
पिछले एक साल में कई रिपोर्टों में यह सामने आया कि बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए बीमा और अन्य उत्पाद बेच रहे हैं। कई ग्राहकों ने कहा कि उन्हें ऐसी पॉलिसी दे दी गई जो उनके आय स्तर, जरूरत या भविष्य की योजना से मेल नहीं खाती थी।


कुछ लोगों को तो यह भी पता नहीं था कि उन्होंने जो पॉलिसी खरीदी है, उसमें कौन-कौन सी शर्तें (terms and conditions) हैं। कई मामलों में असली दिक्कत तब सामने आई जब क्लेम (claim) करने का समय आया और पता चला कि पॉलिसी में कई तरह की सीमाएं और बाहर की गई शर्तें (exclusions) हैं।


टारगेट और कमीशन का दबाव
इस समस्या की एक बड़ी वजह बैंकों के अंदर का इंसेंटिव सिस्टम (incentive system) बताया जाता है। बैंक कर्मचारियों और रिलेशनशिप मैनेजर (relationship manager) को तीसरे पक्ष के उत्पाद, जैसे बीमा, बेचने के लिए लक्ष्य दिए जाते हैं। इन पर ज्यादा कमीशन (commission) और प्रदर्शन आधारित इनाम (performance-linked incentive) जुड़ा होता है।


ऐसी स्थिति में कई बार ग्राहक की जरूरत से ज्यादा बिक्री लक्ष्य को महत्व दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब वेतन और इनाम सीधे बिक्री से जुड़े हों, तो उत्पाद की उपयुक्तता (suitability) पीछे छूट सकती है। यही वजह है कि बिक्री और सेवा के बीच अंतर बढ़ता गया और शिकायतें बढ़ीं।


“बैंक अपने मूल काम पर ध्यान दें”
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक का मुख्य काम जमा (deposit) जुटाना और कर्ज (loan) देना है। उन्होंने कहा कि बैंक अपनी मूल बैंकिंग सेवाओं पर ध्यान दें, न कि जरूरत से ज्यादा समय बीमा बेचने में लगाएं।


उन्होंने साफ किया कि वे बैंकों के अन्य क्षेत्रों में जाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन संतुलन बिगड़ गया है। उनके शब्दों में, “आप अपना मुख्य बैंकिंग काम कीजिए। बीमा बेचने में जरूरत से ज्यादा समय क्यों लगाया जा रहा है?”


उन्होंने खासकर उन मामलों का जिक्र किया जहां होम लोन (home loan) लेते समय ग्राहक से अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव बनाया गया, जबकि उसके पास पहले से संपत्ति गिरवी (collateral) के रूप में मौजूद थी। मंत्री ने सवाल उठाया कि जब जमीन या मकान पहले से सुरक्षा के तौर पर रखा गया है, तो फिर ग्राहक को और किस जोखिम से बचाने के नाम पर बीमा बेचा जा रहा है?


नियमों के बीच फंसा ग्राहक
वित्त मंत्री ने यह भी माना कि पहले यह मामला दो नियामकों (regulators) के बीच फंस जाता था। बीमा नियामक इरडा (IRDAI) यह मान सकता था कि चूंकि बैंक उत्पाद बेच रहा है, इसलिए यह पूरी तरह उसके नियंत्रण में नहीं है। वहीं RBI इसे बीमा का मामला समझ सकता था। इस बीच ग्राहक उलझन में रह जाता था।


उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी आम जमाकर्ता (deposit holder) को होती है, जो पूछता रह जाता है कि उससे बीमा लेने के लिए बार-बार क्यों कहा जा रहा है।


BNS के तहत अपराध
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अब मिस-सेलिंग को भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) के तहत अपराध माना जाएगा। इसका मतलब है कि अब इसे केवल नैतिक गलती नहीं, बल्कि कानूनी उल्लंघन की तरह देखा जाएगा।


उन्होंने RBI के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह साफ संदेश है कि गलत बिक्री अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


बैंकिंग सेक्टर की स्थिति
इस दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग सिस्टम में जमा की वृद्धि दर (deposit growth) लगभग 12.5 प्रतिशत है, जबकि कर्ज की वृद्धि (credit growth) करीब 14.5 प्रतिशत है।


उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ब्याज दर (policy rate) से जुड़े फैसले महंगाई और विकास की स्थिति को देखकर लिए जाएंगे। फरवरी 2025 से अब तक RBI ने रेपो रेट (repo rate) में 125 बेसिस पॉइंट (basis points) की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक लाया है। हालांकि हाल की बैठक में वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।


अगली मौद्रिक नीति (monetary policy) की घोषणा 6 अप्रैल को होगी। गवर्नर ने यह भी भरोसा दिलाया कि बाजार में पर्याप्त तरलता (liquidity) बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाते रहेंगे।


आगे क्या बदलेगा?
अगर RBI के नए नियम लागू होते हैं, तो बैंकों को अपनी बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी होगी। ग्राहकों को उत्पाद की पूरी जानकारी देना, जोखिम समझाना और उनकी जरूरत के अनुसार विकल्प सुझाना जरूरी होगा। गलत तरीके से बेचे गए उत्पाद पर रकम वापसी और मुआवजा देना बैंकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।