वोडाफोन-आइडिया को बड़ी राहत: ₹87,695 करोड़ का AGR बकाया फ्रीज

वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने बुधवार, 31 दिसंबर को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया राशि को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ है। यह बयान स्टॉक एक्सचेंजों BSE और NSE द्वारा मीडिया रिपोर्ट्स के संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगने के बाद जारी किया गया।

Big relief for Vodafone-Idea

मीडिया में क्या थे दावे

इससे पूर्व अनेक मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्ज के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया के लिए राहत पैकेज को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रिमंडल के इस निर्णय के अनुसार, कंपनी के ₹87,695 करोड़ के AGR बकाया को अस्थायी रूप से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है।

 

इसका अर्थ यह है कि कंपनी को अब यह विशाल धनराशि तत्काल नहीं चुकानी होगी। सरकारी समाचार एजेंसी ANI और PTI के सूत्रों के अनुसार, यह भुगतान अब वित्त वर्ष 2032 से 2041 के मध्य दस वर्षों की अवधि में करना होगा।

 

शेयर बाजार में गिरावट

इन खबरों के बाद कंपनी के शेयर में आज 11.5% की तीव्र गिरावट देखी गई और यह 10.67 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक माह में कंपनी का शेयर 7% बढ़ा था, जबकि छह महीने में 43% की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं एक वर्ष की अवधि में इसने निवेशकों को 34% का रिटर्न दिया है। कंपनी का वर्तमान बाजार पूंजीकरण 1.17 लाख करोड़ रुपये है।

 

पांच वर्ष का भुगतान स्थगन

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रिमंडल ने वोडाफोन-आइडिया को पांच वर्षों का मोरेटोरियम (भुगतान में स्थगन) भी प्रदान किया है। यह निर्णय नकदी संकट से जूझ रही कंपनी के लिए बहुत बड़ी राहत साबित हो सकता है। कंपनी लंबे समय से सरकार से निवेदन कर रही थी कि उसे बकाया राशि चुकाने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए।

 

यदि यह राहत उपलब्ध नहीं होती, तो कंपनी के लिए अपने परिचालन जारी रखना अत्यंत कठिन हो जाता। अब आगामी कुछ वर्षों तक कंपनी को AGR बकाया से संबंधित बड़ी किश्तों का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

 

AGR क्या होता है?

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) टेलीकॉम कंपनियों की आय का वह हिस्सा है जिस पर सरकार लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) वसूलती है। यह टेलीकॉम सेक्टर के नियमन का एक महत्वपूर्ण घटक है।

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रभाव

यह राहत सर्वोच्च न्यायालय के हालिया रुख के पश्चात प्राप्त हुई है, जिसमें सरकार को AGR बकाया की गणना पर पुनर्विचार करने की अनुमति दी गई थी। पहले न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया था, लेकिन बाद में सरकार (जो स्वयं Vi में सबसे बड़ी शेयरधारक है) ने कंपनी के अस्तित्व को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया।

 

सरकार ने न्यायालय को बताया था कि टेलीकॉम उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने और करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए वोडाफोन-आइडिया का संचालित रहना आवश्यक है।

 

सरकार की बड़ी हिस्सेदारी

केंद्र सरकार वर्तमान में वोडाफोन-आइडिया में लगभग 49% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने स्पेक्ट्रम और ब्याज बकाया को इक्विटी (शेयरों) में परिवर्तित कर दिया था, जिससे सरकार की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई।

 

कंपनी पर कुल कर्ज ₹2 लाख करोड़ से अधिक है, जिसमें AGR बकाया और स्पेक्ट्रम की बकाया राशि सबसे बड़े घटक हैं।

 

भविष्य की योजनाएं

इस राहत के बाद वोडाफोन-आइडिया अब नए निवेश आकर्षित करने और बैंक ऋण जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि बकाया राशि पर स्पष्टता मिलने के पश्चात वे बैंकों से वित्तीय संसाधन जुटाने की प्रक्रिया आरंभ करेंगे।

 

इस धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से 5G नेटवर्क लॉन्च करने और वर्तमान 4G बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से टेलीकॉम बाजार में ‘डूओपोली’ (केवल जियो और एयरटेल का वर्चस्व) बनने का खतरा अभी के लिए टल गया है।

 

भारतीय टेलीकॉम बाजार की स्थिति

भारत में शीर्ष चार टेलीकॉम कंपनियों की बाजार स्थिति इस प्रकार है:

 

रिलायंस जियो: बाजार हिस्सेदारी 41%, कुल ग्राहक 50.8 करोड़

 

भारती एयरटेल: बाजार हिस्सेदारी 33%, कुल ग्राहक 31.2 करोड़

 

वोडाफोन-आइडिया: बाजार हिस्सेदारी 17%, कुल ग्राहक 12.7 करोड़

 

BSNL: बाजार हिस्सेदारी 8%, कुल ग्राहक 3.4 करोड़

(स्रोत: TRAI, 31 अक्टूबर 2025)

 

प्रतिस्पर्धा का महत्व

यह राहत पैकेज केवल एक कंपनी को बचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि वोडाफोन-आइडिया बाजार से बाहर हो जाती, तो भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र मुख्य रूप से केवल दो बड़े खिलाड़ियों – रिलायंस जियो और भारती एयरटेल – के वर्चस्व में आ जाता।

 

तीन मजबूत निजी खिलाड़ियों की उपस्थिति से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, प्रतिस्पर्धी मूल्य और अधिक विकल्प मिलते हैं। इसलिए सरकार ने कंपनी के अस्तित्व को बचाने में रुचि दिखाई है।

 

विश्लेषकों की राय

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय कंपनी को सांस लेने का कुछ समय देगा, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए कंपनी को अपने नेटवर्क में पर्याप्त निवेश करना होगा और ग्राहक आधार बढ़ाना होगा।

 

कंपनी को विशेष रूप से 5G सेवाओं में तेजी से प्रवेश करना होगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धी पहले ही इस क्षेत्र में काफी आगे निकल चुके हैं। नेटवर्क गुणवत्ता में सुधार और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाना भी कंपनी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

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