बजट 2026: हलवा समारोह के साथ शुरू हुआ अंतिम चरण, टीम नॉर्थ ब्लॉक में ‘लॉक’, आखिर क्या है हलवा सेरेमनी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 27 जनवरी को एक महत्वपूर्ण पारंपरिक रस्म में भाग लिया – ‘हलवा समारोह’। यह आयोजन बजट 2026-27 की तैयारियों के अंतिम दौर की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है। आगामी 1 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रीय बजट प्रस्तुत किया जाएगा।


इस वर्ष की एक विशेष बात यह रही कि बजट निर्माण दल को ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक के पुराने बेसमेंट में वापस जाना पड़ा। कारण? नए कार्यालय ‘कर्तव्य भवन’ में मुद्रण सुविधा उपलब्ध नहीं है।


कर्तव्य भवन से वापसी: पुरानी सुविधाओं पर निर्भरता

सितंबर 2025 में वित्त मंत्री और उनकी पूरी टीम को नॉर्थ ब्लॉक से अत्याधुनिक ‘कर्तव्य भवन-I’ में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन बजट की गोपनीयता बनाए रखने और छपाई की आवश्यकता के कारण पूरे दल को पुराने बेसमेंट में लौटना पड़ा।


नॉर्थ ब्लॉक के तलघर में स्थापित विशेष बजट प्रिंटिंग प्रेस 1980 से संचालित है, जबकि नए सचिवालय में अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं की जा सकी है। यह स्थिति दर्शाती है कि आधुनिकीकरण के बावजूद कुछ पुरानी सुविधाएं अभी भी अपरिहार्य हैं।

halwa ceremony

‘लॉक-इन’ का आरंभ: बाहरी दुनिया से कटा संपर्क

हलवा समारोह की समाप्ति के साथ ही बजट निर्माताओं का ‘लॉक-इन’ चरण प्रारंभ हो गया। अब 1 फरवरी तक लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही निवास करेंगे। इस अवधि में:

  • मोबाइल फोन जमा कर दिए जाते हैं
  • परिवार के सदस्यों से मुलाकात वर्जित है
  • बाहरी संचार पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है
  • केवल आपातकालीन स्थिति में ही संपर्क की अनुमति

 

यह कठोर व्यवस्था बजट सूचना की गोपनीयता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की लीक रोकने के लिए अनिवार्य मानी जाती है।

 

वित्त मंत्री ने इस अवसर पर बजट प्रेस का निरीक्षण किया और तैयारियों की समीक्षा की। कार्यक्रम में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मंत्रालय के सभी सचिव उपस्थित थे।

 

निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड: लगातार नौवां बजट

1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट (पूर्ण और अंतरिम मिलाकर) पेश करेंगी। यह बजट विशेष परिस्थितियों में प्रस्तुत हो रहा है – वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि चालू वित्तीय वर्ष में 7.6% रहने का अनुमान है।

 

मध्यम वर्ग और करदाताओं को इस बजट से काफी अपेक्षाएं हैं, विशेषकर कर राहत और आर्थिक प्रोत्साहन के संदर्भ में।

 

डिजिटल बजट: पेपरलेस परंपरा जारी

पिछले पांच वर्षों की निरंतरता में यह बजट भी पूर्णतः डिजिटल प्रारूप में होगा। संसद में वित्त मंत्री के भाषण की समाप्ति के तुरंत बाद सभी बजट दस्तावेज़ ‘यूनियन बजट मोबाइल ऐप’ पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

 

यह एप्लिकेशन हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सुलभ है और एंड्रॉइड तथा iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड की जा सकती है। सांसद और आम नागरिक वार्षिक वित्तीय विवरण और वित्त विधेयक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ इस माध्यम से देख सकेंगे।

 

हलवा समारोह के बारे में

 

समारोह का आयोजन

यह विशेष कार्यक्रम सामान्यतः बजट प्रस्तुति से 9-10 दिन पूर्व नई दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय मुख्यालय) में आयोजित किया जाता है। स्थान विशेष रूप से मंत्रालय के बेसमेंट में स्थित बजट प्रिंटिंग प्रेस क्षेत्र होता है।

 

रस्म का स्वरूप

कार्यक्रम में एक विशाल कड़ाही में पारंपरिक हलवा तैयार किया जाता है। वित्त मंत्री स्वयं हलवा को हिलाती हैं और फिर सभी उपस्थित अधिकारियों तथा कर्मचारियों को परोसती हैं। यह मीठा प्रसाद टीम की समर्पित मेहनत के सम्मान और सामूहिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

 

भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ या महत्वपूर्ण कार्य का शुभारंभ मीठे से करने की सदियों पुरानी परंपरा है, जो इस समारोह का मूल आधार है।

 

महत्व और उद्देश्य

यह केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि कई गंभीर उद्देश्यों की पूर्ति करता है:

 

छपाई का प्रारंभ: हलवा समारोह के पश्चात बजट दस्तावेजों की अंतिम मुद्रण प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। इस चरण के बाद दस्तावेजों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया जाता।

 

गोपनीयता सुनिश्चित करना: लॉक-इन व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बजट की कोई सूचना समय से पहले बाहर न जाए। यह वित्तीय बाजारों में अनुचित लाभ और सट्टेबाजी रोकने के लिए आवश्यक है।

 

टीम का सम्मान: महीनों की कड़ी मेहनत, विभिन्न मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श और विस्तृत आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह समारोह टीम को प्रोत्साहन और कृतज्ञता व्यक्त करता है।

 

परंपरा की ऐतिहासिक जड़ें

इस रीति की सटीक शुरुआत का कोई लिखित दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है, परंतु यह कम से कम चार दशकों से निरंतर चली आ रही है। 1980 से नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बजट की छपाई होती रही है, और तभी से यह परंपरा अविरल जारी है।

 

डिजिटल युग और आधुनिकीकरण के बावजूद यह रस्म बिना किसी परिवर्तन के संपन्न हो रही है, जो भारतीय प्रशासन की सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करती है।