बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत नेता मीर यार बलूच ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर गंभीर चेतावनी दी है। नए साल के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए इस पत्र में उन्होंने कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य सहयोग से उत्पन्न खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए। उनका दावा है कि आने वाले महीनों में चीन बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है।
मीर यार ने स्वयं को ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का प्रतिनिधि बताया है और पत्र की शुरुआत छह करोड़ बलूच नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों को नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई देकर की है।
ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख
बलूच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के प्राचीन संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लिखा कि यह शुभ अवसर उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के शाश्वत प्रतीक हैं। इन स्थलों के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध झलकते हैं।
पाकिस्तान के अत्याचारों का आरोप
मीर यार ने पत्र में बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने लिखा, “बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को सहा है। अब समय आ गया है कि इस नासूर को जड़ से समाप्त किया जाए, ताकि हमारे राष्ट्र के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।”
उन्होंने दशकों से चल रहे दमन, राज्य प्रायोजित हिंसा और मानवाधिकारों के हनन का उल्लेख करते हुए कहा कि बलूच जनता लंबे समय से इस उत्पीड़न का सामना कर रही है।
CPEC का खतरा
मीर यार बलूच ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को बलूचिस्तान के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का यह प्रमुख प्रोजेक्ट तेजी से अपने अंतिम चरणों में पहुंच रहा है।
“रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को अत्यंत खतरनाक मानता है। हम चेतावनी देते हैं कि चीन ने पाकिस्तान के सहयोग से CPEC को उसके अंतिम चरणों तक पहुंचा दिया है,” उन्होंने पत्र में लिखा।
चीनी सैन्य तैनाती की चेतावनी
बलूच नेता ने सबसे गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता समर्थक बलों की क्षमताओं को मजबूत नहीं किया गया और उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहा, तो संभावना है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया, “छह करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के विरुद्ध बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की उपस्थिति भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी।”
CPEC क्या है?3,000 किलोमीटर लंबा गलियारा जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। चीन और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय परियोजना जो संपर्क और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है।
मुख्य घटक
रणनीतिक महत्व
चीन के लिए:
पाकिस्तान के लिए:
बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) का हिस्साCPEC चीन की बेल्ट एंड रोड पहल की प्रमुख परियोजना है, जिसे 2013 में शुरू किया गया था। BRI का उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों को जोड़ने वाले स्थल और समुद्री मार्गों का विशाल नेटवर्क बनाना है:
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भारत का रुख
चीन और पाकिस्तान ने बार-बार दावा किया है कि CPEC में कोई सैन्य पहलू नहीं है और यह केवल आर्थिक परियोजना है। हालांकि, भारत ने हमेशा CPEC का विरोध किया है, क्योंकि यह पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से गुजरता है और भारत की संप्रभुता एवं सुरक्षा को प्रभावित करता है।
इस वर्ष की शुरुआत में राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित उत्तर में भारत का स्पष्ट रुख दोहराया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने तथाकथित ‘CPEC’ को लेकर संबंधित पक्षों से लगातार विरोध दर्ज कराया है, जो भारतीय केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के उन हिस्सों से गुजरता है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं।
ऑपरेशन सिंदूर की प्रशंसा
मीर यार बलूच ने भारत के हालिया आतंकवाद विरोधी सैन्य अभियानों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में प्रमुख आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जानें गई थीं।
“हम मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से किए गए साहसिक और दृढ़ कदमों की सराहना करते हैं, विशेष रूप से पाकिस्तान द्वारा सुविधा प्रदान किए गए आतंकवाद केंद्रों को निशाना बनाने और पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कार्रवाई। ये उपाय अनुकरणीय साहस और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं,” उन्होंने लिखा।
भारत से सहयोग की अपील
पत्र में मीर यार ने भारत और बलूचिस्तान के बीच ठोस पारस्परिक सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत और बलूचिस्तान के समक्ष खतरे वास्तविक हैं, इसलिए दोनों के द्विपक्षीय संबंध भी उतने ही ठोस और कार्रवाई योग्य होने चाहिए।
पत्र के अंत में उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच सहयोग की उम्मीद व्यक्त की और यह संदेश दिया कि दोनों को मिलकर साझा चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
मीर यार बलूच कौन हैं
मीर यार बलूच बलूचिस्तान के एक सक्रिय स्वतंत्रता समर्थक, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और ‘आजाद बलूच आंदोलन’ के प्रतिनिधि हैं। वे स्वयं को पत्रकार भी बताते हैं और लंबे समय से बलूच लोगों के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठा रहे हैं।
मई 2025 में मीर यार बलूच ने पाकिस्तान से बलूचिस्तान को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा था – ‘बलूचिस्तान पाकिस्तान नहीं है’।
बलूच लिबरेशन आर्मी
बलूच लिबरेशन आर्मी का गठन 1970 के दशक में हुआ था। पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका इसे आतंकी संगठन मानते हैं। बलूचिस्तान के नागरिक 1947-1948 से ही पाकिस्तान का हिस्सा बनकर नहीं रहना चाहते। उनका आरोप है कि पाकिस्तान उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक मानता है।
BLA अलग देश की मांग पर पाकिस्तान में लगातार हमले करता रहता है। 1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो ने भारत, इराक, अफगानिस्तान और सोवियत रूस पर बलूच लिबरेशन आर्मी को समर्थन देने के आरोप लगाए थे।
कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
अब तक केंद्र सरकार, चीनी या पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से मीर यार बलूच के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
