China Humanoid Robot Startups: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ अब केवल चैटबॉट या बड़े भाषा मॉडल (LLMs) तक सीमित नहीं रह गई है। अब मुकाबला ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने का है, जो इंसानों की तरह चल-फिर सकें, काम कर सकें और उद्योगों से लेकर घरों तक कई जिम्मेदारियां निभा सकें। इस क्षेत्र में चीन तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 10 सबसे मजबूत ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप्स में छह चीन के हैं। इसी बीच अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेशी कंपनियों द्वारा बनाए गए नए ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज होती दिखाई दे रही है।

पेटेंट की दौड़ में चीन ने छोड़ा अमेरिका को पीछे
कानूनी रिसर्च प्लेटफॉर्म LexisNexis द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पेटेंट की मजबूती (Patent Asset Index) के आधार पर दुनिया के शीर्ष 10 निजी ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप्स में छह चीन के हैं। रिपोर्ट में शंघाई की Fourier और AgiBot पहले दो स्थानों पर हैं। इनके बाद शेनझेन की LimX Dynamics, Pudu Robotics, हांगझोउ की Unitree Robotics और नौवें स्थान पर Leju Robot शामिल हैं।
अमेरिका की ओर से केवल Figure AI, Apptronik और Agility Robotics ही शीर्ष 10 में जगह बना सके, जबकि जर्मनी की Agile Robots इस सूची में शामिल होने वाली एकमात्र यूरोपीय कंपनी रही।
रिपोर्ट में केवल पेटेंट की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, तकनीकी महत्व और वैश्विक उपयोगिता का भी मूल्यांकन किया गया। इसी आधार पर चीन की कंपनियों ने अधिकांश श्रेणियों में बढ़त हासिल की।
तीन अहम तकनीकों में तेजी से बढ़ा चीन
LexisNexis की रिपोर्ट बताती है कि पिछले दस वर्षों में चीन ने ह्यूमनॉइड रोबोट की तीन सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इंटरैक्शन सिस्टम यानी इंसानों और रोबोट के बीच संवाद से जुड़ी तकनीक में चीन के पेटेंट दोगुने हो गए हैं। वहीं रोबोट की बनावट और संरचना (Morphology) से जुड़े पेटेंट करीब ढाई गुना बढ़े हैं। सबसे बड़ी छलांग कंट्रोल और प्लानिंग आर्किटेक्चर में देखने को मिली, जहां चीन के पेटेंट पांच गुना तक बढ़ गए।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक रोबोट की संरचना संबंधी वैश्विक पेटेंट वैल्यू का लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास था। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 49 प्रतिशत था। इसके विपरीत अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत रही, जो पांच साल पहले 12 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि तकनीकी नवाचार में भी चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बड़े पैमाने पर उत्पादन ने चीन को दिलाई बढ़त
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। जहां कई देशों की कंपनियां अभी प्रोटोटाइप और सीमित उत्पादन तक ही पहुंची हैं, वहीं चीन की कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
मार्केट रिसर्च फर्म Counterpoint Research के अनुसार, पिछले वर्ष दुनिया में स्थापित हुए ह्यूमनॉइड रोबोट में चार-पांचवां हिस्सा चीन का था। इसमें AgiBot की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 30.4 प्रतिशत और Unitree Robotics की 26.4 प्रतिशत रही। यानी केवल दो चीनी कंपनियों ने ही दुनिया के आधे से अधिक बाजार पर कब्जा कर लिया।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि चीन के पास इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन, बैटरी निर्माण, सेंसर, मोटर और AI हार्डवेयर का पहले से विकसित नेटवर्क मौजूद है। इसी वजह से वहां नए रोबोट विकसित करने की लागत कम आती है और कंपनियां तेजी से उन्हें बाजार में उतार देती हैं।
पिछले साल दुनिया के 90 प्रतिशत ह्यूमनॉइड रोबोट चीन से आए
तकनीकी रिसर्च फर्म Interact Analysis के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर भेजे गए ह्यूमनॉइड रोबोट की लगभग 90 प्रतिशत शिपमेंट चीन की कंपनियों ने की। अमेरिका उस समय चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट का सबसे बड़ा विदेशी बाजार भी था।
इसके उलट अमेरिका की प्रमुख कंपनियां Tesla और Figure AI अभी बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं। यही वजह है कि चीन न केवल उत्पादन बल्कि निर्यात के मामले में भी तेजी से आगे निकल गया।

विश्लेषकों का कहना है कि चीन ने जिस तरह इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और सोलर उद्योग में लागत घटाकर वैश्विक बाजार पर पकड़ बनाई थी, उसी मॉडल को अब ह्यूमनॉइड रोबोट उद्योग में भी अपनाया जा रहा है।
अमेरिका ने अचानक लगाया बड़ा प्रतिबंध
चीन की इसी बढ़ती बढ़त के बीच अमेरिका ने मंगलवार को विदेशी कंपनियों द्वारा बनाए गए नए ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही बिजली ग्रिड से जुड़ी ऊर्जा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले कुछ पावर इनवर्टर और कन्वर्टर पर भी रोक लगाई गई।
हालांकि यह प्रतिबंध उन रोबोट पर लागू नहीं होगा जो पहले से अमेरिका में उपयोग किए जा रहे हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट से जुड़े आधुनिक रोबोट बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करते हैं। यदि ऐसे उपकरण विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में रहे तो उनका उपयोग अमेरिकी नागरिकों की निगरानी, महत्वपूर्ण ढांचों की जासूसी या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है।
अमेरिकी Federal Communications Commission (FCC) ने अपने बयान में कहा कि ऐसे उपकरण अमेरिकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सप्लाई चेन जोखिम पैदा कर सकते हैं। व्हाइट हाउस द्वारा गठित अंतर-एजेंसी समिति ने भी चेतावनी दी कि इंटरनेट से जुड़े रोबोट डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा बन सकते हैं।
पहले ड्रोन, अब रोबोट
यह पहला अवसर नहीं है जब अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर किसी विदेशी तकनीक पर प्रतिबंध लगाया हो। इससे पहले अमेरिकी सरकार चीन की ड्रोन कंपनी DJI के उत्पादों पर भी कड़े प्रतिबंध लगा चुकी है। इसके अलावा चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों और कई दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई जा चुकी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि रोबोट पर लगाया गया नया प्रतिबंध उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए अमेरिका घरेलू रोबोटिक्स उद्योग को मजबूत करने और चीन पर तकनीकी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
चीन ने अमेरिकी फैसले को बताया संरक्षणवाद
अमेरिका के नए प्रतिबंध पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग लंबे समय से इस बात का विरोध करता रहा है कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा का इस्तेमाल चीनी कंपनियों को दबाने के लिए करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका “राष्ट्रीय सुरक्षा” का दुरुपयोग कर अपने प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर करना चाहता है।
माओ निंग ने कहा कि संरक्षणवादी नीतियां अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि इससे अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अपने उद्योगों और कंपनियों के वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
Nvidia के साथ साझेदारी और Unitree पर कार्रवाई
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले महीने अमेरिकी चिप निर्माता Nvidia ने चीन की प्रमुख ह्यूमनॉइड रोबोट कंपनी Unitree Robotics के साथ अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सहयोग की घोषणा की थी। इस साझेदारी को AI और रोबोटिक्स क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

लेकिन इसी दौरान अमेरिकी सरकार ने Unitree को संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम बताते हुए उसे अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) के साथ किसी भी प्रकार का अनुबंध करने से प्रतिबंधित कर दिया। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कंपनी के चीनी सैन्य प्रतिष्ठानों से संभावित संबंध हो सकते हैं। हालांकि Unitree ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अब केवल AI चिप्स या सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि रोबोटिक्स सप्लाई चेन पर भी नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति अपना रहा है।
अमेरिकी कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा
मार्केट रिसर्च फर्म Counterpoint Research के प्रमुख विश्लेषक Soumen Mandal का मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों को तत्काल लाभ मिल सकता है। उनके अनुसार Tesla, Figure AI और Boston Dynamics जैसी कंपनियों के लिए घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होगी और उन्हें अपने उत्पादों को तेजी से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
वहीं रिसर्च फर्म Omdia के मुख्य विश्लेषक Lian Jye Su का कहना है कि अल्पकाल में चीनी कंपनियों की अमेरिकी बिक्री प्रभावित हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। उनके अनुसार चीन की अधिकांश कंपनियां पहले से ही यह मानकर चल रही थीं कि अमेरिका में व्यापार करना आसान नहीं होगा। इसलिए वे अब यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के अन्य देशों को अपना प्रमुख बाजार बना रही हैं।
उनका मानना है कि फिलहाल दुनिया में चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट का कोई बड़ा विकल्प मौजूद नहीं है। इसलिए अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद चीन की वैश्विक विकास दर पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
तेजी से बढ़ रहा है चीन का रोबोटिक्स इकोसिस्टम
कुछ वर्ष पहले तक ह्यूमनॉइड रोबोट को केवल प्रयोगशालाओं की तकनीक माना जाता था, लेकिन आज चीन ने इसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में 140 से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माता सक्रिय हैं और उनके आसपास सेंसर, मोटर, AI सॉफ्टवेयर, बैटरी और अन्य पुर्जों की मजबूत सप्लाई चेन विकसित हो चुकी है।
चीन सरकार भी इस क्षेत्र को रणनीतिक उद्योग मानते हुए लगातार निवेश और नीतिगत समर्थन दे रही है। यही वजह है कि वहां स्टार्टअप से लेकर बड़ी तकनीकी कंपनियां तक रोबोट के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।
आने वाले समय में किन क्षेत्रों में दिखेंगे ह्यूमनॉइड रोबोट?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ह्यूमनॉइड रोबोट केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका उपयोग ऑटोमोबाइल निर्माण, गोदाम प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, अस्पतालों, वृद्ध देखभाल, होटल, रिटेल, आपदा राहत, रक्षा, सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और घरेलू सहायता जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा।
AI के साथ इन रोबोटों का संयोजन उन्हें अधिक स्वायत्त बनाएगा। वे केवल निर्धारित आदेशों पर काम करने के बजाय आसपास के वातावरण को समझकर निर्णय लेने में भी सक्षम होंगे। इसी कारण अमेरिका और चीन दोनों इस तकनीक को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक तकनीकों में शामिल मान रहे हैं।
भारत की स्थिति क्या है?
भारत अभी चीन या अमेरिका की तुलना में शुरुआती चरण में है, लेकिन देश में ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स और AI आधारित रोबोट विकसित करने की दिशा में कई पहलें चल रही हैं। IIT, IIIT, DRDO, CSIR तथा कई निजी स्टार्टअप औद्योगिक, चिकित्सा और सेवा क्षेत्र के लिए उन्नत रोबोट विकसित कर रहे हैं।
हालांकि भारत के पास अभी चीन जैसी व्यापक विनिर्माण क्षमता और रोबोटिक्स सप्लाई चेन नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बने तो भारत भी आने वाले वर्षों में वैश्विक रोबोटिक्स बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
FAQs
- चीन के कितने ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप दुनिया के शीर्ष 10 में शामिल हैं?
LexisNexis की रिपोर्ट के अनुसार, पेटेंट क्षमता के आधार पर दुनिया के शीर्ष 10 निजी ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप्स में 6 चीन के हैं। - ह्यूमनॉइड रोबोट क्या होते हैं?
ह्यूमनॉइड रोबोट ऐसे रोबोट होते हैं जिनकी बनावट और गतिविधियां इंसानों जैसी होती हैं। वे चल सकते हैं, वस्तुएं उठा सकते हैं और AI की मदद से विभिन्न कार्य कर सकते हैं। - चीन रोबोटिक्स क्षेत्र में इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ रहा है?
विशाल विनिर्माण क्षमता, मजबूत सप्लाई चेन, सरकारी समर्थन, कम उत्पादन लागत और AI तकनीक के तेज व्यावसायीकरण ने चीन को इस क्षेत्र में बढ़त दिलाई है। - यह रिपोर्ट किस संस्था ने जारी की है?
यह रिपोर्ट कानूनी रिसर्च प्लेटफॉर्म LexisNexis ने जारी की है, जिसमें पेटेंट एसेट इंडेक्स के आधार पर वैश्विक ह्यूमनॉइड स्टार्टअप्स का मूल्यांकन किया गया। - ह्यूमनॉइड रोबोट का उपयोग किन क्षेत्रों में होगा?
इनका उपयोग विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, होटल, रिटेल, गोदाम, घरेलू सहायता, आपदा प्रबंधन और वृद्ध देखभाल जैसे कई क्षेत्रों में होने की संभावना है। - क्या भारत भी ह्यूमनॉइड रोबोट तकनीक पर काम कर रहा है?
हाँ। भारत में IIT, DRDO, CSIR और कई निजी स्टार्टअप AI आधारित रोबोटिक्स पर काम कर रहे हैं, हालांकि बड़े पैमाने के व्यावसायिक उत्पादन में देश अभी चीन और अमेरिका से पीछे है।

