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US कोर्ट का बड़ा फैसला: सोशल मीडिया एडिक्शन केस में कंपनियां जिम्मेदार, क्या बदलेंगे ग्लोबल नियम?

अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आए एक अहम अदालत के फैसले ने दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। एक 20 साल की युवती ने अपने बचपन में सोशल मीडिया की लत और उससे हुए मानसिक नुकसान को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ केस किया था। अब जूरी ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपन

US कोर्ट का बड़ा फैसला: सोशल मीडिया एडिक्शन केस में कंपनियां जिम्मेदार, क्या बदलेंगे ग्लोबल नियम?

अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आए एक अहम अदालत के फैसले ने दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। एक 20 साल की युवती ने अपने बचपन में सोशल मीडिया की लत और उससे हुए मानसिक नुकसान को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ केस किया था। अब जूरी ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है।


इस फैसले को सोशल मीडिया के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। इससे न केवल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि दुनिया भर में चल रहे ऐसे सैकड़ों मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।


क्या था पूरा मामला?
इस केस में युवती, जिसे अदालत में “कैली” नाम से जाना गया, ने आरोप लगाया कि Meta Platforms और Google ने ऐसे प्लेटफॉर्म बनाए जो बच्चों को जानबूझकर आकर्षित और लत लगाने वाले हैं।


कैली के मुताबिक, उसने बहुत छोटी उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कर दिया था - यूट्यूब लगभग 6 साल की उम्र में और इंस्टाग्राम 9 साल की उम्र में। उसने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उसकी उम्र की कोई जांच नहीं की और वह बिना रोक-टोक इनका इस्तेमाल करती रही।


समय के साथ उसे सोशल मीडिया की आदत लग गई और इसका असर उसकी पढ़ाई, परिवार और मानसिक स्थिति पर पड़ा।

Companies responsible in social media addiction cases

अदालत का फैसला क्या रहा?

जूरी ने माना कि कंपनियों ने ऐसे फीचर्स बनाए जो लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखते हैं और यह बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अदालत ने कंपनियों के व्यवहार को “दुर्भावना, दबाव या धोखाधड़ी” जैसा बताया।

 

इस फैसले में कैली को कुल 6 मिलियन डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपये से ज्यादा) का मुआवजा दिया गया। इसमें:

  • 3 मिलियन डॉलर सामान्य नुकसान (compensation) के लिए
  • 3 मिलियन डॉलर सजा के तौर पर (punitive damages)

इस रकम में से 70% भुगतान Meta को करना होगा, जबकि 30% Google को देना होगा।

 

कंपनियों का क्या कहना है?

इस फैसले के बाद दोनों कंपनियों ने असहमति जताई है। Meta Platforms ने कहा कि किशोरों की मानसिक सेहत एक जटिल मुद्दा है और इसे सिर्फ एक ऐप से नहीं जोड़ा जा सकता। कंपनी ने यह भी कहा कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।

 

वहीं Google ने कहा कि यूट्यूब को गलत तरीके से सोशल मीडिया बताया गया है, जबकि यह एक जिम्मेदारी से बनाया गया वीडियो प्लेटफॉर्म है।

 

परिवारों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

इस फैसले का स्वागत उन माता-पिता और संगठनों ने किया है जो लंबे समय से सोशल मीडिया पर सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं।

 

कई परिवार, जिनके बच्चों को सोशल मीडिया से नुकसान हुआ है, अदालत के बाहर मौजूद थे। फैसले के बाद उन्होंने खुशी जताई और इसे एक बड़ी जीत बताया।

 

ब्रिटेन की एक सामाजिक कार्यकर्ता एलेन रूम ने कहा कि यह “अब बहुत हो चुका” जैसा पल है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितने बच्चों को नुकसान होगा तब जाकर कंपनियां सुधार करेंगी।

 

दूसरे मामलों पर भी असर

यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। हाल ही में न्यू मैक्सिको में भी एक जूरी ने Meta को बच्चों को गलत कंटेंट और खतरनाक संपर्कों के संपर्क में लाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार आ रहे ऐसे फैसले यह दिखाते हैं कि अब लोगों और कंपनियों के बीच टकराव बढ़ रहा है और यह एक “टर्निंग पॉइंट” हो सकता है।

 

सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

दुनिया भर में अब सोशल मीडिया के बच्चों पर असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों ने इस पर सख्ती शुरू कर दी है।

  • ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने के कदम उठाए गए हैं।
  • यूनाइटेड किंगडम में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन को लेकर परीक्षण चल रहा है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस फैसले के बाद कहा कि मौजूदा व्यवस्था ठीक नहीं है और इसमें बदलाव जरूरी है।

 

सोशल मीडिया के नुकसान कैसे सामने आए?

कैली ने अदालत में बताया कि सोशल मीडिया की वजह से उसे कई मानसिक समस्याएं हुईं।

  • उसे छोटी उम्र में ही चिंता और डिप्रेशन होने लगा
  • वह अपने शरीर को लेकर असहज महसूस करने लगी
  • इंस्टाग्राम के फिल्टर का इस्तेमाल कर अपनी तस्वीर बदलने लगी

बाद में डॉक्टरों ने उसे “बॉडी डिस्मॉर्फिया” नाम की समस्या बताई, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर को लेकर अत्यधिक चिंता करता है।

 

कैली ने यह भी कहा कि वह दिन में कई-कई घंटे सोशल मीडिया पर बिताती थी, जिससे उसका परिवार और सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ।

 

कंपनियों पर क्या आरोप लगे?

कैली के वकीलों ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “लत लगाने वाली मशीन” की तरह बनाए गए हैं।

उन्होंने कुछ मुख्य बातें उठाईं:

  • अनंत स्क्रॉल (infinite scroll) जैसे फीचर्स लोगों को लंबे समय तक जोड़कर रखते हैं
  • कंपनियां जानबूझकर युवाओं को आकर्षित करना चाहती हैं
  • छोटे बच्चों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए

हालांकि इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने कहा कि किसी किशोर का लंबे समय तक ऐप इस्तेमाल करना चिंता की बात हो सकती है, लेकिन इसे सीधे लत नहीं कहा जा सकता।

 

बड़ी टेक कंपनियों के लिए क्या संदेश?

इस फैसले के बाद साफ संकेत है कि अब टेक कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी लेनी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • कंपनियों को बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाना होगा
  • उम्र की सही पहचान और कंट्रोल जरूरी होगा
  • हानिकारक कंटेंट पर सख्त निगरानी रखनी होगी

 

आगे क्या होगा?

इस केस के बाद अब अमेरिका में कई और मामले शुरू होने वाले हैं। जून में एक और बड़ा केस कैलिफोर्निया की अदालत में शुरू हो सकता है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

अगर ऐसे फैसले लगातार आते रहे, तो सरकारें भी सख्त कानून बना सकती हैं।

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