पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच जारी टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को सीएम ममता को कानूनी नोटिस भेजकर 72 घंटे में सबूत देने की मांग की है। इस बीच, राज्यपाल सीवी आनंद बोस को जान से मारने की धमकी मिलने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
कोयला तस्करी के आरोपों पर भड़के सुवेंदु
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी प्रमाण के सार्वजनिक मंच से उनके और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए हैं। सुवेंदु ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच से ध्यान हटाने के लिए मेरे विरुद्ध निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुझे कोयला घोटाले से जोड़ते हुए दावा किया कि मैं और गृह मंत्री इस मामले में संलिप्त हैं।”
विपक्ष के नेता ने आगे कहा कि ऐसे गंभीर आरोप लगाना, वह भी बिना किसी ठोस सबूत के, न केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है बल्कि सार्वजनिक विमर्श की गरिमा को भी कमजोर करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को कानूनी नोटिस जारी कर 72 घंटे के भीतर सभी सबूत प्रस्तुत करने को कहा है, अन्यथा मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
आई-पैक कार्यालय में ईडी की छापेमारी से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद 8 जनवरी को शुरू हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। प्रतीक जैन तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के प्रमुख भी हैं। ईडी की टीम सुबह 6 बजे से कार्रवाई शुरू कर चुकी थी।
दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के निवास पर पहुंच गईं। करीब 20 मिनट वहां रुकने के बाद जब वे बाहर निकलीं तो उनके हाथ में एक हरे रंग की फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे सॉल्ट लेक स्थित आई-पैक के कार्यालय भी गईं। शाम 4:22 बजे जब वे कार्यालय से बाहर आईं तो उनके पीछे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी भी कई फाइलें लेकर निकले, जिन्हें काफिले की गाड़ियों में रखा गया।
ईडी ने लगाए जांच में बाधा के गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी के दौरान जानबूझकर रुकावट पैदा की। एजेंसी का कहना है कि सीएम अपने साथ कई महत्वपूर्ण भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जबरन ले गईं।
ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर 28 पेज की याचिका में दावा किया है कि बंगाल के कोयला तस्करी नेटवर्क ने 2017 से 2020 के बीच 2,742 करोड़ रुपये का नकद भंडार तैयार किया था। इसमें से करीब 20 करोड़ रुपये हवाला के माध्यम से आई-पैक के गोवा स्थित चुनावी अभियानों तक पहुंचाए गए।
एजेंसी के अनुसार, फोरेंसिक जांच के दौरान मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद कार्यवाही बाधित हुई। डिजिटल सबूतों को जबरन छीन लिया गया और पंच गवाहों पर दबाव डाला गया। ईडी ने सीबीआई जांच और स्वतंत्र फोरेंसिक जांच की मांग की है।
ममता का पलटवार: केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
8 जनवरी को आयोजित विरोध रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “मुझे क्षमा करें प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें। यह एक घटिया और शरारती गृह मंत्री है जो देश की सुरक्षा भी नहीं कर पा रहा।”
ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी कोयला तस्करी में लिप्त हैं और कोयला घोटाले का पैसा सुवेंदु के माध्यम से शाह तक पहुंचता है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास गृह मंत्री के खिलाफ पेन ड्राइव में सबूत हैं।
सीएम ने कहा, “ईडी और अमित शाह का काम क्या पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना है? मेरी पार्टी के सभी दस्तावेज उठाकर ले गए हैं। एक ओर वे एसआईआर के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने का काम कर रहे हैं, दूसरी ओर ऐसी कार्रवाई की जा रही है।”
हाईकोर्ट में हंगामा, सुनवाई टली
9 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी। तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की तलाशी के विरुद्ध याचिका दायर की थी, जबकि ईडी ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ संवैधानिक पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।
दोपहर 2:30 बजे जस्टिस शुभ्रा घोष की अदालत में सुनवाई शुरू होनी थी। लेकिन न्यायाधीश के पहुंचने से पहले ही कोर्ट रूम में भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। जज ने कोर्ट रूम खाली करने के लिए पांच मिनट का समय दिया और जिन वकीलों का इस मामले से संबंध नहीं था, उन्हें बाहर जाने को कहा।
इसके बाद वकीलों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। परिस्थिति को देखते हुए परेशान न्यायाधीश ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी और कोर्ट से बाहर चली गईं।
राज्यपाल को जान से मारने की धमकी
इसी बीच गुरुवार देर रात पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को ई-मेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिली। ई-मेल में राज्यपाल को बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में आरोपी को कोलकाता के पास सॉल्ट लेक इलाके से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी से पूछताछ की जा रही है कि उसने यह धमकी क्यों दी और इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि आरोपी ने अपने ई-मेल में मोबाइल नंबर भी दिया था, जिससे उसे ट्रेस करना आसान हो गया।
लोक भवन के अधिकारी ने बताया कि इस धमकी की जानकारी राज्य के डीजीपी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्रालय को दे दी गई है। धमकी के बाद राज्यपाल की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पहले से जेड प्लस सुरक्षा में रह रहे राज्यपाल बोस की सुरक्षा में अब राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के 60-70 जवान तैनात हैं।
भाजपा ने साधा निशाना
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “ममता बनर्जी के राज में आपका स्वागत है, जहां राज्यपाल भी सुरक्षित नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गृह मंत्री ममता बनर्जी कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी एक निजी फर्म को बचाने के लिए ईडी से सबूत वाली फाइलें छीनने में व्यस्त हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि आई-पैक एक कॉरपोरेट इकाई होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की आंख और कान की तरह काम करती है। यह राजनीतिक रूप से अनैतिक गतिविधियों में शामिल रही है।
ममता बनर्जी बनाम केंद्रीय एजेंसियां: 7 साल का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच टकराव हुआ है। पिछले सात वर्षों में कई मौके आए हैं:
फरवरी 2019: पोंजी घोटाले में सीबीआई-कोलकाता पुलिस में टकराव हुआ। ममता बनर्जी ने 45 घंटे का धरना दिया।
मई 2021: नारद स्टिंग केस में सीबीआई ने टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार किया। ममता ने सीबीआई दफ्तर के बाहर 6 घंटे धरना दिया।
सितंबर 2021: कोयला तस्करी केस में ईडी ने अभिषेक बनर्जी से 9 घंटे पूछताछ की।
जुलाई 2022: स्कूल भर्ती घोटाले में ईडी ने शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया। 50 करोड़ रुपये नकद और सोना बरामद हुआ।
अगस्त 2022: सीबीआई ने पशु तस्करी केस में टीएमसी नेता अनुव्रत मंडल को गिरफ्तार किया।
अक्टूबर 2023: राशन घोटाले में ईडी ने तत्कालीन मंत्री ज्योतिप्रिया मल्लिक को गिरफ्तार कर 20 घंटे पूछताछ की।
आई-पैक के बारे में
आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) एक राजनीतिक परामर्श फर्म है जिसके निदेशक प्रतीक जैन हैं। यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित अभियान, मीडिया योजना और मतदाता संपर्क में सहायता करती है।
इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ सिटीजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) के नाम से की थी। बाद में इसका नाम आई-पैक रखा गया। प्रशांत किशोर के हटने के बाद इसकी कमान प्रतीक के पास आ गई। वर्तमान में आई-पैक 2021 से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी हुई है।
पश्चिम बंगाल में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यह राजनीतिक टकराव और तीव्र होने की संभावना है।
