कक्षा 8 की किताब पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय क्यों बना इतना बड़ा विवाद?

कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब को लेकर देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शुक्रवार को एक एडवाइजरी जारी कर साफ कहा कि जिस किसी के पास भी ‘Exploring Society: India and Beyond – Part 2’ नाम की किताब है, वह उसे तुरंत वापस करे। यह वही किताब है जिसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक के तहत न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों से जुड़ा हिस्सा शामिल था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए किताब के प्रकाशन और वितरण पर रोक लगा दी है।

 

क्या कहा गया एडवाइजरी में?

NCERT ने अपने निर्देश में कहा है कि इस किताब की सभी छपी हुई प्रतियां उसके मुख्यालय में जमा कराई जाएं। साथ ही अगर इस अध्याय से जुड़ा कोई भी कंटेंट सोशल मीडिया, वेबसाइट या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है तो उसे तुरंत हटाया जाए।

 

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस किताब की डिजिटल कॉपी भी प्रसारित न होने दी जाए।

Corruption in Judiciary chapter controversy

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब पर पूरी तरह रोक लगा दी। कोर्ट का कहना था कि किताब में न्यायपालिका को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जो संस्था की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि किताब की छपाई और बिक्री तुरंत रोकी जाए। जो कॉपियां बाजार में पहुंच चुकी हैं, उन्हें जब्त किया जाए और डिजिटल वर्जन भी हटाया जाए। कोर्ट ने इस मामले में NCERT के निदेशक और केंद्रीय शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

 

कोर्ट ने सिलेबस से जुड़ी बैठकों की कार्यवाही, विवादित अध्याय लिखने वाले लेखकों के नाम और उनकी योग्यता की जानकारी भी मांगी है।

 

अदालत के चार बड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभागों को निर्देश दिया कि किताब चाहे स्कूलों में हो, गोदाम में हो या डिजिटल रूप में उपलब्ध हो, उसे तुरंत लोगों की पहुंच से हटाया जाए।

 

प्रिंटेड या डिजिटल कॉपी का वितरण कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसके बाद कोर्ट एक कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच करेगा और जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा।

 

CJI की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला गंभीर है और यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश लगती है। उन्होंने कहा कि संस्थागत जिम्मेदारी के तहत यह पता लगाया जाएगा कि यह सामग्री कैसे प्रकाशित हुई।

 

CJI ने यह भी कहा कि किताब का एक अध्याय ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ है, लेकिन उसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को इस तरह पेश किया गया है कि संस्था की छवि पर असर पड़ सकता है।

 

उन्होंने कहा कि मीडिया की रिपोर्ट के जरिए उन्हें इस किताब की जानकारी मिली। जिम्मेदार मीडिया ने यह मुद्दा सामने लाया, जिसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लिया।

 

सरकार और NCERT का रुख

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद NCERT ने बयान जारी कर माफी मांगी। परिषद ने कहा कि विवादित सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी और उसे संबंधित अधिकारियों की सलाह लेकर दोबारा लिखा जाएगा।

 

NCERT के अनुसार किताब 24 फरवरी को जारी हुई थी। इसकी 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं, जिनमें से 38 बाजार में बिक चुकी थीं। बाकी प्रतियां स्टॉक में हैं और उन्हें रोका गया है।

 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा कि जो हुआ वह चिंता की बात है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

 

किताब में क्या लिखा था?

किताब में ‘Justice delayed is justice denied’ यानी इंसाफ में देरी को नाइंसाफी के समान बताया गया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81 हजार, हाईकोर्ट में 62 लाख 40 हजार और निचली अदालतों में करीब 4 करोड़ 70 लाख लंबित मामलों का जिक्र किया गया था।

 

अध्याय में यह भी लिखा गया था कि न्याय व्यवस्था के सामने भ्रष्टाचार, मामलों का लंबा लंबित रहना और जजों की कमी जैसी चुनौतियां हैं।

 

किताब में जजों के लिए तय आचार संहिता, शिकायत निवारण प्रणाली CPGRAMS और जजों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया यानी महाभियोग का भी जिक्र था। साथ ही 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतों की बात कही गई थी।

 

कोर्ट रूम में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने बिना शर्त माफी की पेशकश की। लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि यह सामग्री कैसे प्रकाशित हुई।

 

वरिष्ठ वकीलों ने भी इस मामले पर अलग-अलग राय रखी। कुछ ने कहा कि यह जानबूझकर किया गया कदम है। कोर्ट ने कहा कि जांच गहराई से होगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

 

CJI ने कहा कि जब न्यायपालिका पर लगातार हमले होते हैं, तब संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि किताब में न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्था के रूप में पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया।

 

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने इस विवाद को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव विचारधारा से प्रेरित हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पिछले वर्षों में NCERT की किताबों में किए गए बदलावों की जांच होनी चाहिए।

 

दूसरी ओर सरकार ने साफ किया कि उसका न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है और संस्था का पूरा सम्मान किया जाता है।

 

किताब तैयार कैसे होती है?

NCERT की किताबें किसी एक लेखक द्वारा नहीं लिखी जातीं। इन्हें समितियां तैयार करती हैं।

 

एक समिति सामाजिक विज्ञान की सामग्री की देखरेख करती है, जबकि दूसरी हाईलेवल कमेटी अंतिम मंजूरी देती है। विवादित किताब भी इसी प्रक्रिया से तैयार हुई थी।

 

बताया गया है कि संबंधित समितियों में शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े कई सदस्य शामिल हैं।

 

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की है। कोर्ट ने कहा है कि मामले की पूरी जांच होगी और यह पता लगाया जाएगा कि किस स्तर पर चूक हुई।

 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि किताब में शामिल कुछ आंकड़े संसदीय रिकॉर्ड और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड में उपलब्ध हैं, लेकिन उनके सत्यापन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया था।