Dabur FSSAI Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को डाबर इंडिया (Dabur India) को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कंपनी को “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Purity Guaranteed” और “100% Organic” जैसे दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने पहली नजर (Prima Facie) में माना कि FSSAI ने डाबर को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया, इसलिए फिलहाल इस आदेश पर रोक लगाई जाती है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर क्यों लगाई रोक?
जस्टिस अमित महाजन की एकल पीठ ने कहा कि डाबर कई वर्षों से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और इस स्तर पर कंपनी ने राहत पाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए अगली सुनवाई तक FSSAI के आदेश पर रोक लगाई जाती है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
FSSAI ने इस सप्ताह की शुरुआत में आदेश जारी कर कहा था कि डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Purity Guaranteed” और “100% Organic” जैसे पूर्ण (Absolute) दावे किए जा रहे हैं।
नियामक के अनुसार, ऐसे दावे Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 का उल्लंघन करते हैं क्योंकि इन्हें स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं किया जा सकता और ये उपभोक्ताओं को गुमराह करने की आशंका पैदा करते हैं।

इसी आधार पर FSSAI ने कंपनी को ऐसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया था।
डाबर ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
FSSAI के आदेश के खिलाफ डाबर ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने कंपनी की ओर से तत्काल सुनवाई की मांग की।
डाबर ने अदालत को बताया कि FSSAI ने बिना कोई शो-कॉज नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए, बिना इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice) दिए और बिना कंपनी का पक्ष सुने सीधे बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया।
कंपनी का कहना था कि Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत नियामक को किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगना और उसके जवाब पर विचार करना आवश्यक होता है।
कंपनी ने व्यावसायिक नुकसान का भी हवाला दिया
डाबर ने अपनी याचिका में कहा कि FSSAI का आदेश लागू होने का अर्थ यह था कि बाजार में पहले से उपलब्ध उत्पादों को वापस मंगाना (Recall) या नई पैकेजिंग करनी पड़ेगी, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि FSSAI ने आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया और विभिन्न वितरण साझेदारों (Channel Partners) तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने की सलाह दी। इससे कंपनी को तत्काल व्यावसायिक नुकसान पहुंचा।
FSSAI के कानूनी अधिकार पर भी उठाए सवाल
डाबर ने अदालत में यह भी दलील दी कि Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 18 केवल नियामक सिद्धांत (Guiding Principles) तय करती है। यह किसी Designated Officer को सीधे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं देती।
कंपनी का कहना है कि FSSAI के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि “100% Pure” या “100% Natural” जैसे दावे किस आधार पर नियमों का उल्लंघन करते हैं। आदेश में केवल इतना कहा गया कि ये दावे “भ्रामक प्रतीत होते हैं”, लेकिन इसके समर्थन में कोई विस्तृत कारण या तथ्य दर्ज नहीं किए गए।
किन उत्पादों पर उठाया गया था सवाल?
FSSAI के आदेश में डाबर के कई लोकप्रिय खाद्य उत्पादों का उल्लेख किया गया था। इनमें Dabur Honey, Dabur Honey Squeezy, Dabur Sunderbans Honey, Dabur Himalayan Apple Cider Vinegar, Dabur Virgin Coconut Oil, Dabur Cow Ghee, Real Activ 100% Tender Coconut Water, Dabur Hommade Coconut Milk और Dabur Organic Honey शामिल हैं।

इन्हीं उत्पादों पर किए गए “100 प्रतिशत” दावों को लेकर नियामक ने कार्रवाई शुरू की थी।
‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी आपत्ति
FSSAI ने अपने आदेश में यह भी कहा कि Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar और Dabur Organic Honey पर ‘Jaivik Bharat’ का लोगो प्रदर्शित किया जा रहा था, जबकि इन उत्पादों के लिए वैध FSSAI ऑर्गेनिक अनुमोदन (Organic Endorsement) उपलब्ध नहीं था।
इसके अलावा Dabur Hommade Coconut Milk पर “100% Purity” का दावा भी किया गया था। FSSAI के अनुसार, यह एक Compound Food (मिश्रित खाद्य उत्पाद) है और ऐसे उत्पादों पर इस तरह का दावा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है।
FSSAI ने कहा- पहले भी नोटिस दिया था
नियामक का कहना है कि कार्रवाई अचानक नहीं की गई। FSSAI के अनुसार, उसने इससे पहले भी डाबर को नोटिस जारी कर “100 प्रतिशत” जैसे दावों को हटाने या संशोधित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) नहीं की गई।
इसके बाद FSSAI ने ऐसे सभी उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश जारी किया और कंपनी को 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) दाखिल करने के निर्देश दिए।
यह आदेश केवल एक या दो उत्पादों तक सीमित नहीं था। इसमें शहद, देसी घी, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसी कई श्रेणियों के उत्पाद शामिल थे।
खाद्य कंपनियों पर बढ़ी निगरानी
हाल के महीनों में FSSAI ने खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों के विज्ञापनों, पैकेजिंग, लेबलिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों की निगरानी तेज की है।
नियामक लगातार उन मामलों पर कार्रवाई कर रहा है, जहां किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो नियमों के अनुरूप नहीं माने जाते। हाल के समय में FSSAI ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपने प्रवर्तन (Enforcement) से जुड़े आदेश सार्वजनिक करने शुरू किए हैं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म व अन्य फूड बिजनेस ऑपरेटरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानकारी साझा की है।
‘100%’ के दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी
FSSAI के अनुसार, ‘100%’ शब्द की Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 में कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं है। इसलिए ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ या ‘100% Organic’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। इसी वजह से FSSAI ने खाद्य कारोबार संचालकों (Food Business Operators) को ऐसे दावों से बचने और केवल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दावे ही करने की सलाह दी है।

नियमों के अनुसार, किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा सत्य, स्पष्ट, भ्रामक न हो और पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। यदि कोई कंपनी बिना पर्याप्त साक्ष्य के भ्रामक दावा करती है, तो FSSAI उसे नोटिस जारी कर सकता है, लेबल या विज्ञापन में बदलाव के निर्देश दे सकता है, उत्पाद की बिक्री पर रोक लगाने की सिफारिश कर सकता है और Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत अन्य नियामकीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
- पतंजलि मामला (2024):
2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक चिकित्सीय और स्वास्थ्य संबंधी विज्ञापनों पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत की फटकार के बाद कंपनी और उसके अधिकारियों ने सार्वजनिक माफी मांगी तथा कई विज्ञापन वापस लेने पड़े। - ‘हेल्थ ड्रिंक’ विवाद (2024):
FSSAI ने 2024 में स्पष्ट किया कि Food Safety and Standards Regulations के तहत ‘Health Drink’ नाम की कोई कानूनी खाद्य श्रेणी मौजूद नहीं है। इसके बाद प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने अपनी वेबसाइट और ऐप से ‘Health Drink’ कैटेगरी हटाकर इन उत्पादों को उनकी वास्तविक श्रेणियों, जैसे Malt-based Beverage या अन्य उपयुक्त वर्गों में सूचीबद्ध करना शुरू कर दिया।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि अंतिम फैसला आने तक नियामक का प्रतिबंधात्मक आदेश लागू नहीं रहेगा।
अब अगली सुनवाई में अदालत डाबर और FSSAI दोनों की विस्तृत दलीलें सुनेगी। इसके बाद यह तय होगा कि FSSAI का आदेश कानूनी रूप से सही था या नहीं और “100% Pure” तथा अन्य दावों को लेकर नियामक की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
इस मामले का फैसला केवल डाबर तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में खाद्य कंपनियां अपने उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और लेबल पर किए जाने वाले दावों को किस तरह प्रस्तुत करेंगी, इस पर भी इसका असर पड़ सकता है।
FAQs
1. डाबर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख क्यों किया?
डाबर का कहना है कि FSSAI ने बिना शो-कॉज नोटिस, बिना सुनवाई और बिना कंपनी का पक्ष सुने बिक्री रोकने का आदेश जारी किया। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए कंपनी हाईकोर्ट पहुंची।
2. FSSAI ने डाबर के खिलाफ क्या कार्रवाई की थी?
FSSAI ने “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Purity Guaranteed” और “100% Organic” जैसे दावों वाले कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का आदेश दिया था और 15 दिन के भीतर Action Taken Report मांगी थी।
3. ‘100% Pure’ दावे पर विवाद क्यों हुआ?
FSSAI का कहना है कि ऐसे पूर्ण दावे सत्यापित करना कठिन है और वे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। इसलिए ये Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के अनुरूप नहीं हैं।
4. हाईकोर्ट में डाबर की मुख्य दलील क्या है?
डाबर का कहना है कि उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, आदेश में पर्याप्त कारण नहीं बताए गए और नियामक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।
5. FSSAI का पक्ष क्या है?
FSSAI का कहना है कि डाबर के कई उत्पादों पर नियमों के विपरीत “100 प्रतिशत” जैसे भ्रामक दावे किए गए। कंपनी को पहले भी नोटिस दिया गया था, लेकिन संतोषजनक सुधार नहीं होने के बाद बिक्री रोकने का आदेश जारी किया गया।

