जनकपुरी में ‘मौत का गड्ढा’: विकास के नाम पर एक और जवान ज़िंदगी खत्म, जानिए क्या है मामला?

दिल्ली के पश्चिमी इलाके जनकपुरी में गुरुवार रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने राजधानी की शहरी व्यवस्था और निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अंडर-कंस्ट्रक्शन सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में मोटरसाइकिल गिरने से एक युवा की मौत हो गई। मृतक की पहचान कमल के रूप में हुई है, जो कैलाशपुरी का रहने वाला था और एक निजी बैंक के कॉल सेंटर में काम करता था। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसमें लापरवाही, प्रशासनिक चूक और यहां तक कि साजिश की आशंका भी जताई जा रही है।

 

कैसे हुआ हादसा

पुलिस के अनुसार, यह घटना गुरुवार देर रात की है, लेकिन इसकी जानकारी शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे मिली। जिस गड्ढे में कमल का शव और उसकी मोटरसाइकिल मिली, वह दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के निर्माण कार्य के तहत खोदा गया था। पुलिस का शुरुआती कहना है कि गड्ढा बैरिकेड किया गया था, लेकिन मृतक के परिजन और स्थानीय लोगों का दावा इससे अलग है।

 

कमल गुरुवार रात रोहिणी स्थित अपने ऑफिस से घर लौट रहा था। परिवार के अनुसार, वह लगातार फोन पर संपर्क में था और आखिरी बार उसने बताया था कि वह घर से महज 15 मिनट की दूरी पर है। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया और वह घर नहीं पहुंचा।

रातभर तलाश, सुबह मिली लाश

कमल के देर रात तक न लौटने पर परिवार और दोस्तों ने उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने जनकपुरी, सागरपुर, विकासपुरी और रोहिणी समेत कई पुलिस थानों के चक्कर लगाए। परिजनों का आरोप है कि जब वे रात में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो पुलिस ने यह कहकर मना कर दिया कि शिकायत सुबह 11 बजे से पहले दर्ज नहीं की जा सकती।

 

रात करीब 1 बजे दोस्तों ने उस गड्ढे को भी देखा, जहां सुबह कमल का शव मिला, लेकिन उस समय वहां कुछ नहीं था। सात लोग पूरी रात इलाके में खोजबीन करते रहे। सुबह करीब 7:30 बजे अचानक कमल के फोन से कॉल आया और पुलिस ने बताया कि उसका शव उसी गड्ढे में मिला है। इसी बात ने परिवार के शक को और गहरा कर दिया।

 

परिवार का आरोप: लापरवाही या कुछ और?

परिजनों और दोस्तों का कहना है कि अगर गड्ढा पहले ही देखा जा चुका था, तो सुबह अचानक शव वहीं कैसे मिला। वे इसे केवल हादसा मानने को तैयार नहीं हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

मंत्री का दौरा और जांच का आश्वासन

घटना की सूचना मिलने के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने इसे “बेहद दुखद घटना” बताया और कहा कि मामले की पूरी जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम नागरिकों की जान की परवाह नहीं कर रही और बार-बार चेतावनी के बावजूद खतरनाक गड्ढों को सुरक्षित नहीं किया गया। उनके मुताबिक, यह सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे को ठीक से बैरिकेड नहीं किया गया, जबकि स्थानीय आरडब्ल्यूए ने कई बार शिकायत की थी।

 

नोएडा की घटना से जुड़ती कड़ी

यह हादसा कोई अकेली घटना नहीं है। महज तीन हफ्ते पहले नोएडा में एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया था, जहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार 30 फीट गहरे पानी से भरे नाले में गिर गई थी। घने कोहरे, कमजोर बैरिकेडिंग और खराब सड़क सुरक्षा के कारण वह अपनी जान नहीं बचा सका। उसने फोन पर अपने पिता से आखिरी बार मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच पाई।

 

शहरों में बनते मौत के जाल

जनकपुरी और नोएडा की घटनाएं यह दिखाती हैं कि शहरी विकास के नाम पर चल रहे निर्माण कार्य किस तरह आम लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। खुले गड्ढे, अधूरी बैरिकेडिंग, खराब संकेतक और लापरवाह निगरानी-ये सब मिलकर सड़कों को “डेथ ट्रैप” में बदल रहे हैं।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण स्थलों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड, मजबूत बैरिकेड, रात में पर्याप्त रोशनी और नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन अक्सर ठेकेदारों और संबंधित विभागों की लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।

 

निष्कर्ष:

कमल की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहरों में विकास मानव जीवन से ज्यादा अहम हो गया है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और चाहता है कि यह मामला सिर्फ कागजी जांच तक सीमित न रहे। जब तक जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलेगी और व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे गड्ढे और ऐसी मौतें बनती रहेंगी।

 

यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए चेतावनी है-कि लापरवाही का हर गड्ढा किसी न किसी की जिंदगी निगल सकता है।

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