भारत के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 4,666 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें भारतीय नौसेना के कलवरी श्रेणी के बेड़े को लैस करने के लिए 48 ब्लैक शार्क हैवीवेट “पनडुब्बी-नाशक” हथियारों के लिए इटली की WASS के साथ 1,896 करोड़ रुपये का सौदा शामिल है। समझौते के तहत, टॉरपीडो की डिलीवरी अप्रैल 2028 में शुरू होने वाली है। संपूर्ण डिलीवरी चक्र 2030 के आरंभ तक पूरा होने की उम्मीद है।
ब्लैक शार्क टॉरपीडो के बारे में
- ब्लैक शार्क टॉरपीडो एक आधुनिक हेवीवेट टॉरपीडो प्रणाली है, जिसे पनडुब्बियों से प्रक्षेपित किया जाता है। इसका उपयोग समुद्री सतह के जहाजों और दुश्मन पनडुब्बियों—दोनों के विरुद्ध किया जाता है। यह प्रणाली वर्ष 2004 में सेवा में आई और आज भी कई नौसेनाओं में सक्रिय रूप से तैनात है।
- ब्लैक शार्क का विकास WASS Submarine Systems द्वारा किया गया था, जिसे पहले Whitehead Alenia Sistemi Subacquei के नाम से जाना जाता था। बाद में यह कंपनी Leonardo समूह का हिस्सा बनी और हाल के वर्षों में इसके अंडरवॉटर सिस्टम व्यवसाय का पुनर्गठन Fincantieri के अंतर्गत किया गया।
- ब्लैक शार्क की की शुरुआत इटली के पुराने A184 टॉरपीडो के विकल्प के रूप में किया गया हैं। नए संस्करण का लक्ष्य दूरी, गति और संवेदी सटीकता को बढ़ाना था। जनवरी 2014 में इटली के ला स्पेज़िया खाड़ी में पनडुब्बी से इसके उन्नत संस्करण का सफल परीक्षण किया गया, जिसने इसकी क्षमताओं की पुष्टि की।
- ब्लैक शार्क की लंबाई लगभग 6.3 मीटर है और व्यास 533 मिमी है। यह आकार हेवीवेट पनडुब्बी टॉरपीडो के लिए मानक माना जाता है। इसका डिज़ाइन गहरे समुद्र में स्थिर प्रदर्शन के लिए अनुकूलित है।
- यह टॉरपीडो इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन का उपयोग करता है, जिसे उन्नत बैटरियों से ऊर्जा मिलती है। इसकी गति 50 नॉट्स से अधिक होती है और प्रभावी मारक दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। इसमें कॉन्ट्रा-रोटेटिंग डायरेक्ट-ड्राइव ब्रशलेस मोटर और हाई-एनर्जी बैटरियां लगी हैं, जो अधिक गहराई पर भी गति और दूरी बनाए रखती हैं।
- ब्लैक शार्क का मार्गदर्शन तंत्र फाइबर-ऑप्टिक वायर-गाइडेंस पर आधारित है, जिससे पनडुब्बी और टॉरपीडो के बीच रियल-टाइम नियंत्रण संभव होता है। इसका उन्नत सोनार सिस्टम पानी के भीतर लक्ष्यों की पहचान में स्थानिक विश्लेषण का उपयोग करता है। मल्टी-फ्रीक्वेंसी और उन्नत सिग्नल प्रोसेसिंग से यह भीड़भाड़ वाले ध्वनिक वातावरण में भी लक्ष्य को ट्रैक करता रहता है।
- इस टॉरपीडो में लगभग 350 किलोग्राम का उच्च विस्फोटक वॉरहेड होता है। इसे बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ब्लैक शार्क एडवांस्ड मूल डिज़ाइन का उन्नत रूप है। इसमें लिथियम-पॉलीमर बैटरियां जैसी बेहतर पावर प्रणालियां जोड़ी गई हैं, जिससे एंड्योरेंस और विभिन्न परिस्थितियों में प्रदर्शन बेहतर होता है।
- कई देश ब्लैक शार्क या इसके उन्नत संस्करण का संचालन कर रहे हैं।
- इटली: U212A टोडारो-क्लास पनडुब्बियों पर ब्लैक शार्क और BSA।
- चिली: स्कॉर्पीन (ओ’हिगिन्स-क्लास) और टाइप U209 पनडुब्बियों पर तैनाती।
- मलेशिया: स्कॉर्पीन (पेरदाना मेंतेरी-क्लास); जुलाई 2025 में पहली लाइव-फायरिंग।
- सिंगापुर: पनडुब्बी बेड़े के लिए ब्लैक शार्क एडवांस्ड।
- इंडोनेशिया: नागापासा-क्लास और KRI अलुगोरो पनडुब्बियां।
- पुर्तगाल: टाइप 209PN (ट्रिडेंटे-क्लास) पनडुब्बियां।
भारत के लिए इसका महत्व
- ब्लैक शार्क टॉरपीडो के शामिल होने से भारत की पनडुब्बी आधारित युद्ध शक्ति में बड़ा सुधार होगा। कलवरी-क्लास पनडुब्बियां, जो पहले सीमित हथियार विकल्पों पर निर्भर थीं, अब अत्याधुनिक टॉरपीडो से लैस होंगी। यह टॉरपीडो दुश्मन की पनडुब्बियों और सतह के युद्धपोतों दोनों को प्रभावी ढंग से निशाना बना सकता है। इससे वर्षों से मौजूद ऑपरेशनल गैप को भरने में मदद मिलेगी और पनडुब्बी बेड़े की मारक क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होगी।
- आधुनिक टॉरपीडो की तैनाती भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी। हिंद महासागर आज प्रमुख नौसैनिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है, जहां चीन सहित कई क्षेत्रीय शक्तियां सक्रिय हैं। उन्नत टॉरपीडो से लैस होने पर भारतीय पनडुब्बियां यह स्पष्ट संदेश देने में सक्षम होगी कि भारत अपने समुद्री हितों और सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधि का जवाब मजबूत रक्षात्मक और आक्रामक क्षमता के साथ दिया जा सकता है।
- सभी छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियों पर हेवीवेट टॉरपीडो की उपलब्धता से भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में बड़ा सुधार होगा। ये टॉरपीडो लंबी दूरी से अंडरवॉटर और सतही खतरों पर प्रहार करने में सक्षम हैं। इससे आने वाले समय में मिशन की व्यापकता बढ़ेगी, जिसमें सी-डिनायल, खुफिया निगरानी, और अन्य नौसैनिक अभियानों को समर्थन देना शामिल है।
- ब्लैक शार्क टॉरपीडो की खरीद भारत के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अनुरूप है। रक्षा मंत्रालय ने हाल के वर्षों में जहाजों, विमानों और मिसाइल प्रणालियों से जुड़े कई आधुनिककरण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा खरीद में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया गया है, जिसका उद्देश्य तकनीकी उन्नयन और फोर्स प्रोजेक्शन क्षमता को बढ़ाना है। ब्लैक शार्क सौदा इसी रणनीतिक दिशा का हिस्सा है।
टॉरपीडो क्या है?
- टॉरपीडो एक ऐसा आधुनिक अंडरवॉटर हथियार है, जिसे नौसेनाएं दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए उपयोग करती हैं। यह हथियार पानी के भीतर स्वयं संचालित होता है और प्रक्षेपण के बाद लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्वतंत्र रूप से मार्गदर्शन प्राप्त कर लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
- टॉरपीडो की व्यावहारिक अवधारणा को पहली बार रॉबर्ट व्हाइटहेड नामक इंजीनियर ने वर्ष 1866 में विकसित किया था। इसके बाद यह हथियार धीरे-धीरे नौसैनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन गया। प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) और द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) के दौरान टॉरपीडो ने समुद्री युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया।
- एक टॉरपीडो कई महत्वपूर्ण हिस्सों से मिलकर बनता है। इसके अग्र भाग में स्थित वॉरहेड में शक्तिशाली विस्फोटक भरा होता है, जो लक्ष्य को नुकसान पहुंचाता है। इसके पीछे मार्गदर्शन प्रणाली होती है, जो टॉरपीडो की दिशा और लक्ष्य की पहचान को नियंत्रित करती है। प्रणोदन इकाई टॉरपीडो को पानी के भीतर गति प्रदान करती है। इसके अलावा, नियंत्रण फिन टॉरपीडो को स्थिर रखते हैं और उसे मोड़ने में सहायता करते हैं।
- टॉरपीडो को पनडुब्बी, युद्धपोत, विमान या तटीय प्रणाली से छोड़ा जा सकता है। लॉन्च के तुरंत बाद इसका प्रणोदन तंत्र सक्रिय हो जाता है और यह तेज गति से पानी के भीतर आगे बढ़ता है। टॉरपीडो में लगे सेंसर लक्ष्य से आने वाली ध्वनि या सोनार संकेतों का पता लगाते हैं। जैसे ही यह लक्ष्य के करीब पहुंचता है, वॉरहेड विस्फोट हो जाता है। इस विस्फोट से उत्पन्न झटका तरंगें और गैस बुलबुले लक्ष्य के ढांचे को तोड़ देते हैं या गंभीर क्षति पहुंचाते हैं।
