Diljit Dosanjh Satluj: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘Satluj’ रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद भारत में ZEE5 से हटा दी गई। यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों, लापता लोगों और गुप्त अंतिम संस्कारों का मुद्दा उठाया था। फिल्म पहले ‘Punjab 95’ नाम से चर्चा में थी, लेकिन लंबे सेंसर विवाद और करीब तीन साल की रोक के बाद इसे नाम बदलकर ‘Satluj’ के रूप में OTT पर रिलीज किया गया।

फिल्म को हटाने के बाद ZEE5 ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ‘Satluj’ भारत में अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेगी। प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उचित विकल्पों पर विचार कर रहा है, ताकि फिल्म को जल्द से जल्द फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

फिल्म हटाने के बाद दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया
फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर फिल्म का एक दृश्य साझा करते हुए लिखा, “I challenge the darkness”। उन्होंने पंजाबी में भी पोस्ट किया, जिसका भाव यह था कि ‘Satluj’ वही है जो जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था।

दूसरी बातचीत में दिलजीत ने कहा कि उन्हें दुख इस बात का नहीं है कि फिल्म इंटरनेट से हटाई गई, क्योंकि फिल्म लोगों तक पहुंच चुकी है। उनका कहना था कि इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि इस फिल्म के साथ वही हुआ, जो खालड़ा के साथ हुआ था।
Satluj की कहानी किस पर आधारित है
‘Satluj’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी से प्रेरित है। खालड़ा ने पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के दौर के दौरान कथित पुलिस फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में मौतों और गुप्त अंतिम संस्कारों की जांच की थी। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब में हजारों युवाओं को अवैध तरीके से मारकर ‘लावारिस’ बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालड़ा से प्रेरित किरदार निभाते हैं। कहानी में दिखाया गया है कि खालड़ा एक लापता महिला की शिकायत लेकर थाने जाते हैं, लेकिन पुलिस उनकी बात नहीं सुनती। इसके बाद वे श्मशान घाटों और नगर निगम के रिकॉर्ड खंगालते हैं और कथित गुप्त अंतिम संस्कारों से जुड़ा बड़ा मामला सामने लाते हैं।
फिल्म में क्या-क्या दिखाया गया है
फिल्म की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है, जिसमें जसवंत सिंह खालड़ा लापता महिला की शिकायत को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचते हैं। पुलिस की उदासीनता के बाद कहानी कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों की ओर बढ़ती है।
फिल्म में खालड़ा को अमृतसर और आसपास के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड, तस्वीरें और दस्तावेज इकट्ठा करते हुए दिखाया गया है। इन दस्तावेजों के आधार पर वे दावा करते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिन्हें पहले लापता बताया गया था।
फिल्म में मुख्यमंत्री के किरदार को ‘अनंत सिंह’ और तत्कालीन पुलिस नेतृत्व से प्रेरित अधिकारी को ‘IPS बिट्टा’ के रूप में दिखाया गया है। कहानी में यह दिखाया गया है कि मुख्यमंत्री की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल बदलता है और पुलिस व्यवस्था और कठोर हो जाती है।
फिल्म में जसवंत सिंह खालड़ा को विदेश जाकर कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और फर्जी मुठभेड़ों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाते हुए भी दिखाया गया है। भारत लौटने के बाद उनके अपहरण, परिवार की तलाश, सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचने और CBI जांच को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
फिल्म में अर्जुन रामपाल CBI अधिकारी ‘समुद्र सिंह’ के किरदार में दिखाई देते हैं। कहानी का अंत इस निष्कर्ष के साथ होता है कि खालड़ा को अवैध हिरासत में यातना देकर मार दिया गया और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई
सरकार से जुड़े सूत्रों की चिंता
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फिल्म के कुछ हिस्सों का दुरुपयोग भारत विरोधी ताकतों द्वारा किया जा सकता है। चिंता यह जताई गई कि फिल्म के कुछ दृश्य और सामग्री खालिस्तान समर्थक माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, खासकर संवेदनशील राजनीतिक समय में।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू प्राथमिकता में रखे जाते हैं। हालांकि फिल्म हटाने के पीछे किस स्तर पर फैसला हुआ या किसने इसे हटाने का निर्देश दिया, इस पर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे
जसवंत सिंह खालड़ा का जन्म 2 नवंबर 1952 को पंजाब के खालड़ा गांव में हुआ था। वे अमृतसर के एक सहकारी बैंक से जुड़े रहे और बाद में पंजाब में मानवाधिकार मामलों को लेकर सक्रिय हुए।

1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब आतंकवाद और उग्रवाद से जूझ रहा था। इस दौरान आतंकवाद विरोधी अभियानों में पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में मौतों और लापता लोगों के मामलों के आरोप लगने लगे।
खालड़ा ने इन्हीं आरोपों की जांच शुरू की। उन्होंने श्मशान घाटों, नगर निगम और स्थानीय रिकॉर्ड्स की पड़ताल की। उनकी जांच में दावा किया गया कि कई शवों को ‘अज्ञात’ या ‘लावारिस’ बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि परिवारों का आरोप था कि ये लोग पुलिस हिरासत के बाद लापता हुए थे।
25 हजार मौतों का दावा और CBI की जांच
जसवंत सिंह खालड़ा ने दावा किया था कि पूरे पंजाब में करीब 25,000 लोगों की अवैध हत्या और गुप्त अंतिम संस्कार किए गए। हालांकि बाद में CBI ने खालड़ा के पूरे दावे की पुष्टि नहीं की।
CBI जांच में केवल तरनतारन जिले में 2,097 अवैध अंतिम संस्कारों की पुष्टि हुई। सुप्रीम कोर्ट ने भी बाद के फैसलों में CBI के इसी आंकड़े का हवाला दिया। इसलिए 25,000 का आंकड़ा खालड़ा का दावा माना जाता है, जबकि 2,097 का आंकड़ा जांच एजेंसी के निष्कर्ष का हिस्सा है।
खालड़ा का अपहरण और हत्या का केस
6 सितंबर 1995 की सुबह जसवंत सिंह खालड़ा अपने अमृतसर स्थित घर के बाहर थे। परिवार का आरोप था कि पंजाब पुलिस के कर्मियों ने उन्हें जबरन उठाया। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। पुलिस ने लंबे समय तक उन्हें हिरासत में लेने से इनकार किया।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और CBI जांच के आदेश दिए गए। CBI जांच में यह सामने आया कि खालड़ा को अवैध हिरासत में रखा गया था। इसके बाद कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया।
साल 2005 में निचली अदालत ने छह पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया। 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कई दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी और कहा कि पुलिस अत्याचार कानून के शासन पर सीधा हमला है।

KPS Gill पर आरोप और जांच का निष्कर्ष
इस मामले में तत्कालीन पुलिस प्रमुख KPS Gill का नाम भी चर्चा में आया था। CBI के अनुसार जांच के दौरान एक गवाह ने उनकी भूमिका का जिक्र किया था। CBI ने उस बयान के आधार पर अलग से जांच की, लेकिन आगे की जांच में ऐसे सबूत नहीं मिले जिनसे आरोपों की पुष्टि हो सके।
इसी कारण चार्जशीट में KPS Gill को आरोपी नहीं बनाया गया। बाद में खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन CBI ने कोर्ट में कहा कि अतिरिक्त जांच में भी उनके खिलाफ केस चलाने लायक पर्याप्त आधार नहीं मिला।
‘Punjab 95’ से ‘Satluj’ तक का सफर
जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित इस फिल्म की घोषणा वर्ष 2022 में हुई थी। शुरुआती दौर में इसका नाम ‘Ghallughara’ रखा गया था, जिसका अर्थ नरसंहार से जुड़ा माना जाता है। बाद में सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘Punjab 95’ किया गया।
फिल्म 2023 में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन CBFC यानी सेंसर बोर्ड से मंजूरी को लेकर विवाद शुरू हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए थे। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नाम बदलने की मांग भी शामिल बताई गई। हालांकि, इन सभी बदलावों की विस्तृत आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई।
लंबे विवाद के बाद फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। बाद में इसका नाम बदलकर ‘Satluj’ रखा गया और इसे सीधे OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया।
ZEE5 से हटने के बाद बढ़ा विवाद
‘Satluj’ को 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन भारत में इसे करीब 48 घंटे के भीतर प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि वह फिल्म की रचनात्मक दृष्टि का समर्थन करती है और कानूनी रास्तों के जरिए इसे फिर से दर्शकों तक पहुंचाने के विकल्प तलाश रही है। हालांकि फिल्म हटाने का स्पष्ट कारण आधिकारिक तौर पर विस्तार से नहीं बताया गया।
फिल्म हटने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा
फिल्म के ZEE5 से हटने के बाद दिलजीत दोसांझ ने लाइव बातचीत में कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी दर्शकों तक पहुंच जाती तो उनका उद्देश्य पूरा हो जाता, क्योंकि इंटरनेट पर आने के बाद किसी कंटेंट को पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता।

दिलजीत ने कहा कि उन्हें फिल्म हटने का उतना दुख नहीं है, क्योंकि यह पहले ही लोगों तक पहुंच चुकी है। हालांकि उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि “एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई।” उनके मुताबिक उन्हें सबसे ज्यादा दुख लोगों के रवैये और फैसले लेने वालों की सोच को लेकर है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हिसाब से इस मामले में सही सलाह नहीं दी गई।
एक प्रशंसक द्वारा आगामी प्रोजेक्ट के बारे में पूछे जाने पर दिलजीत ने कहा कि उनका एक प्रोजेक्ट था, जो अब बैन हो गया है। इसके बाद वह अपने यूरोप टूर पर ध्यान देंगे, जिसकी शुरुआत बर्लिन से होगी।

फिल्म हटाने पर नेताओं और कलाकारों की प्रतिक्रियाएं
फिल्म हटाए जाने के बाद कई राजनीतिक नेताओं और पंजाबी कलाकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक इससे पंजाब के उस दौर के इतिहास को नहीं छिपाया जा सकता, जब बड़ी संख्या में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे थे। उन्होंने फिल्म पर लगी रोक हटाने की मांग की।
आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर कंग ने कहा कि इतिहास का सामना ईमानदारी से किया जाना चाहिए, न कि सेंसरशिप के जरिए उसे दबाया जाना चाहिए। उन्होंने फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग की और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया।
पंजाबी अभिनेता और कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी ने कहा कि यदि फिल्म तथ्यों पर आधारित है तो उसे हटाया जाना उचित नहीं है। उनके अनुसार किसी फिल्म को रिलीज न होने देना भी अभिव्यक्ति और मानवाधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म पर इस तरह की कार्रवाई सामान्य नहीं मानी जाती।
वहीं पंजाबी अभिनेता दर्शन औलख ने कहा कि फिल्म हटाने के पीछे की वजह से सभी परिचित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों को लेकर बार-बार विवाद क्यों खड़े होते हैं, जबकि दूसरे देशों में संवेदनशील विषयों पर भी फिल्में रिलीज होती रहती हैं।
Piracy ने खड़ा किया नया विवाद
फिल्म को ZEE5 से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद ही इसके pirated copies ऑनलाइन सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि फिल्म कई piracy websites पर HD quality में उपलब्ध हो गई है। कुछ लोगों ने screenshots और illegal streaming links भी साझा किए।
इससे फिल्म से जुड़ा विवाद और बढ़ गया। कई यूजर्स ने लोगों से piracy links शेयर न करने की अपील की और कहा कि इससे फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और पूरी टीम को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
भारत में digital piracy पर क्या कानून है
भारत में digital piracy कई कानूनों के तहत अवैध है। इनमें Copyright Act, 1957, Information Technology Act, 2000 और कुछ मामलों में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
Copyright Act के तहत किसी फिल्म को बिना अनुमति upload करना, distribute करना, social media पर full movie डालना या pirated links शेयर करना गैरकानूनी है।
ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर छह महीने से तीन साल तक की सजा और 50 हजार रुपये से 2 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। सजा और जुर्माना केस की परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
फिल्म पर रोक या अस्थायी हटाना
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ‘Satluj’ को भारत में ZEE5 से अगले आदेश तक हटाया गया है। इसे औपचारिक रूप से पूरे भारत में स्थायी प्रतिबंध घोषित किया गया है, ऐसी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ZEE5 ने कहा है कि वह कानूनी विकल्प तलाश रहा है, ताकि फिल्म को दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। यानी अभी मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और फिल्म की वापसी की संभावना बनी हुई है।
निष्कर्ष
यह विवाद केवल एक फिल्म के OTT से हटने का मामला नहीं है। यह पंजाब के संवेदनशील इतिहास, मानवाधिकार, सेंसरशिप, राष्ट्रीय सुरक्षा, digital piracy और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा जटिल विवाद बन गया है। एक ओर फिल्म निर्माता और कलाकार इसे जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश मानते हैं, वहीं सरकार से जुड़े सूत्रों की चिंता है कि इसकी कुछ सामग्री का दुरुपयोग भारत विरोधी तत्व कर सकते हैं। अब यह देखना होगा कि कानूनी प्रक्रिया के बाद ‘Satluj’ फिर से आधिकारिक रूप से दर्शकों के लिए उपलब्ध होती है या नहीं।
FAQ
1.दिलजीत दोसांझ की ‘Satluj’ को ZEE5 से क्यों हटाया गया?
ZEE5 ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म भारत में अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, चिंता यह भी जताई गई कि फिल्म के कुछ हिस्सों का दुरुपयोग भारत विरोधी तत्वों द्वारा किया जा सकता है।
2. क्या फिल्म भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है?
फिलहाल ऐसी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी नहीं है कि फिल्म को स्थायी रूप से पूरे भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। अभी इसे ZEE5 India से अगले आदेश तक हटाया गया है।
3. ZEE5 ने इस मामले पर क्या बयान दिया?
ZEE5 ने कहा कि वह फिल्म की रचनात्मक दृष्टि का समर्थन करता है और कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रहा है, ताकि फिल्म को जल्द से जल्द फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
4. फिल्म को हटाने के पीछे क्या कारण बताया गया है?
आधिकारिक बयान में विस्तृत कारण नहीं बताया गया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, फिल्म के कुछ दृश्यों और सामग्री के दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई गई है।
5. क्या ‘Satluj’ अन्य देशों में उपलब्ध रहेगी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिल्म भारत में ZEE5 से हटाई गई है। अन्य देशों में इसकी उपलब्धता प्लेटफॉर्म की क्षेत्रीय नीति और कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी।

