एपस्टीन फाइल में नया खुलासा: ट्रम्प पर नाबालिग के यौन शोषण का आरोप, क्या छिपाए गए थे दस्तावेज?

अमेरिका में कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन केस से जुड़े कुछ नए दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में एक महिला के इंटरव्यू का विवरण सामने आया है, जिसमें उसने दावा किया है कि एपस्टीन ने उसकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रम्प से कराई थी और उस समय वह नाबालिग थी। महिला का आरोप है कि उस दौरान उसका यौन शोषण किया गया।

 

ये दस्तावेज पहले जारी नहीं किए गए थे, इसलिए इनके सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

 

FBI इंटरव्यू से सामने आए नए दावे

जांच एजेंसी FBI ने इस महिला से कुल चार बार इंटरव्यू किए थे। शुरुआत में जब एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेज जारी किए गए, तब केवल एक इंटरव्यू का सार सार्वजनिक किया गया था। उस सार में महिला ने मुख्य रूप से एपस्टीन के खिलाफ आरोप लगाए थे।

 

लेकिन बाद में पता चला कि बाकी तीन इंटरव्यू सार्वजनिक दस्तावेजों में शामिल नहीं थे। इस पर सवाल उठने लगे कि आखिर ये इंटरव्यू क्यों जारी नहीं किए गए।

 

अब अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन इंटरव्यू को गलती से “डुप्लीकेट” मानकर रोक दिया गया था। बाद में जब दोबारा समीक्षा की गई तो पता चला कि वे अलग-अलग इंटरव्यू थे और उन्हें भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।

Epstein files new revelations

महिला ने लगाए गंभीर आरोप

जारी किए गए इंटरव्यू दस्तावेजों के अनुसार, महिला ने दावा किया है कि जब उसकी उम्र लगभग 13 से 15 साल के बीच थी, तब एपस्टीन और डोनाल्ड ट्रम्प दोनों ने उसका यौन शोषण किया था।

 

महिला ने जांचकर्ताओं को बताया कि एक बार एपस्टीन उसे न्यूयॉर्क या न्यू जर्सी ले गया था। वहीं उसकी मुलाकात ट्रम्प से कराई गई थी।

 

महिला के अनुसार उस दौरान ट्रम्प ने उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। उसने यह भी कहा कि उस समय उसने बचाव करने की कोशिश में ट्रम्प को काट लिया था।

 

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन दावों ने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।

 

धमकी भरे फोन कॉल का भी दावा

महिला ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों में उसे और उसके कुछ करीबी लोगों को कई बार धमकी भरे फोन कॉल आए थे। उसका मानना है कि ये कॉल एपस्टीन से जुड़े लोगों की तरफ से हो सकते थे।

 

महिला के अनुसार इन कॉल का उद्देश्य उसे चुप रहने के लिए डराना था। हालांकि जांच एजेंसियों ने इस दावे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

 

ट्रम्प सरकार पर विपक्ष के आरोप

इस मामले को लेकर अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि ट्रम्प प्रशासन ने एपस्टीन जांच से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारी दबाने की कोशिश की, जो ट्रम्प के लिए नुकसानदेह हो सकती थी।

डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि दस्तावेजों को जारी करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और कई अहम जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई।

 

इसी मुद्दे को लेकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एक समिति ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को नोटिस जारी करने के पक्ष में वोट किया है। अब उन्हें अदालत में इस मामले से जुड़े सवालों का जवाब देना पड़ सकता है।

 

एपस्टीन फाइल्स में ट्रम्प का नाम कई बार

जांच से जुड़े दस्तावेजों में डोनाल्ड ट्रम्प का नाम कई बार दर्ज होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में ट्रम्प का नाम लगभग 38 हजार बार दर्ज है।

 

इन रिकॉर्ड में यह भी बताया गया है कि 1990 के दशक में एपस्टीन के निजी विमान से कई यात्राओं का जिक्र मिलता है। इनमें कुछ यात्राएं ट्रम्प से जुड़ी बताई गई हैं।

 

इसके अलावा ट्रम्प के प्रसिद्ध मार-ए-लागो क्लब की गेस्ट लिस्ट में भी एपस्टीन से जुड़े लोगों के नाम शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

 

हालांकि किसी फाइल में नाम आने का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति ने कोई अपराध किया है। यह केवल संपर्क या उपस्थिति का संकेत भी हो सकता है।

 

ट्रम्प ने सभी आरोपों से किया इनकार

डोनाल्ड ट्रम्प ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह का गलत काम नहीं किया है।

 

इससे पहले भी अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा था कि कुछ दस्तावेजों में ट्रम्प से जुड़े जो दावे सामने आए हैं, उनमें से कई “झूठे और सनसनीखेज” हो सकते हैं।

 

ट्रम्प के समर्थकों का भी कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। वहीं विपक्षी नेताओं का मानना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

 

अमेरिका से बाहर भी फैला था नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि एपस्टीन का यौन शोषण नेटवर्क केवल अमेरिका तक सीमित नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार उसने एक संगठित सेक्स-ट्रैफिकिंग नेटवर्क तैयार किया था।

 

एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में अब तक करीब 15 देशों के अमीर लोगों, राजनेताओं और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम सामने आ चुके हैं।

 

इस वजह से यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच का विषय बन गया है।

 

एपस्टीन केस की समयरेखा

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। उस समय फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एपस्टीन ने मसाज के बहाने उसकी बेटी का यौन शोषण किया।

 

जांच के दौरान करीब 30 नाबालिग लड़कियों के बयान सामने आए, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए।

 

2006 से 2008 के बीच एपस्टीन को एक विवादित कानूनी समझौते के तहत फेडरल ट्रायल से बचा लिया गया। इस समझौते के कारण उसे केवल 13 महीने की सजा मिली और जेल के दौरान दिन में बाहर काम करने की भी अनुमति दी गई।

 

यह समझौता उस समय काफी विवादों में रहा था। बाद में इस डील को मंजूरी देने वाले अभियोजक एलेक्स एकोस्टा 2017 में ट्रम्प प्रशासन में श्रम मंत्री भी बने।

 

2009 से 2015 के बीच जेल से बाहर आने के बाद भी एपस्टीन का नेटवर्क सक्रिय रहा। जांच एजेंसियों को उसके निजी विमान “लॉलीटा एक्सप्रेस” और निजी द्वीप से जुड़ी गतिविधियों के कई सबूत मिले, लेकिन लंबे समय तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

 

2017 और 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान कई पीड़ितों की गवाही सामने आई, जिससे मामला फिर से चर्चा में आया।

इसके बाद 2019 में न्यूयॉर्क में एपस्टीन को सेक्स-ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद न्यूयॉर्क की मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल जेल में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अधिकारियों ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन इस पर भी कई सवाल उठे।

 

कौन था जेफ्री एपस्टीन

जेफ्री एपस्टीन का जन्म 20 जनवरी 1953 को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में हुआ था। वह पेशे से एक निवेश प्रबंधक था और अमेरिका के कई प्रभावशाली लोगों से उसके संबंध बताए जाते थे।

 

उसकी पार्टियों में दुनिया की कई बड़ी हस्तियों के आने की खबरें भी सामने आती रही हैं। इनमें वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग, गायक माइकल जैकसन, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और कारोबारी डोनाल्ड ट्रम्प जैसे नामों का जिक्र किया गया है।

 

एपस्टीन की करीबी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल भी इस मामले में आरोपी रही हैं।

 

अब आगे क्या

अमेरिकी अदालत के आदेश और एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत लाखों पेज के दस्तावेज धीरे-धीरे सार्वजनिक किए जा रहे हैं। इन दस्तावेजों के सामने आने से दुनिया भर में इस मामले की नई जांच शुरू हो गई है।