संदर्भ :
वर्ष 2026 के लिए वैश्विक जोखिम परिदृश्य का सबसे बड़ा निष्कर्ष है-अनिश्चितता। विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी वैश्विक जोखिम धारणा सर्वेक्षण (GRPS) के अनुसार, दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहाँ सहयोग कमजोर पड़ रहा है और प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है। सर्वेक्षण में शामिल 50% प्रतिभागियों ने अगले दो वर्षों में वैश्विक स्थिति को उथल-पुथल या तूफानी बताया है, जबकि अगले दस वर्षों के लिए यह आंकड़ा 57% तक पहुँच जाता है। केवल 1% लोगों को किसी भी समयावधि में शांत वैश्विक माहौल की उम्मीद है।
यह रिपोर्ट संकेत देती है कि जैसे-जैसे जोखिमों का आकार, आपसी जुड़ाव और गति बढ़ रही है, वैश्विक स्थिरता लगातार दबाव में आ रही है।
बहुपक्षवाद का क्षरण और भू-आर्थिक टकराव का उभार
रिपोर्ट का एक केंद्रीय निष्कर्ष यह है कि बहुपक्षीय व्यवस्था पीछे हट रही है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर भरोसा कम हो रहा है, पारदर्शिता और कानून के शासन का सम्मान घट रहा है तथा संरक्षणवाद बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ा है।
इसी संदर्भ में भू-आर्थिक टकराव (Geoeconomic Confrontation) को 2026 में सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम माना गया है। 18% उत्तरदाताओं ने इसे ऐसा जोखिम बताया जो किसी बड़े वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है। इसके बाद राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष को 14% लोगों ने प्रमुख जोखिम माना।
भू-आर्थिक टकराव क्या है?
भू-आर्थिक टकराव का अर्थ है-आर्थिक साधनों का रणनीतिक उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अपने पक्ष में मोड़ना। इसके तहत देश व्यापार, तकनीक, निवेश, पूंजी और ज्ञान के प्रवाह को सीमित या नियंत्रित करते हैं ताकि-
- आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके
- भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को रोका जा सके
- प्रभाव क्षेत्रों का विस्तार किया जा सके
उपकरण: प्रतिबंध, शुल्क, निर्यात नियंत्रण, निवेश प्रतिबंध, सब्सिडी, राज्य सहायता, मुद्रा नीतियाँ।
हालिया उदाहरण: अमेरिका द्वारा शुल्क लगाना, चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर रोक।
संभावित परिणाम: बहुपक्षवाद का क्षरण, आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान, रणनीतिक संसाधनों का केंद्रीकरण, आर्थिक मंदी और सशस्त्र संघर्ष की आशंका।
आर्थिक जोखिमों की तीव्रता
अगले दो वर्षों में आर्थिक जोखिमों की रैंकिंग में सबसे तेज़ उछाल देखा गया है।
- आर्थिक मंदी आठ स्थान ऊपर चढ़कर 11वें स्थान पर
- मुद्रास्फीति 21वें स्थान पर
- परिसंपत्ति बुलबुले का फूटना 18वें स्थान पर
रिपोर्ट बताती है कि बढ़ता कर्ज, संभावित वित्तीय बुलबुले और भू-आर्थिक टकराव मिलकर नई अस्थिरता को जन्म दे सकते हैं, जिससे समाज और व्यवसाय दोनों प्रभावित होंगे।
तकनीकी जोखिम: अवसरों के साथ खतरे
तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और अवसंरचना में बड़े अवसर ला रही है, लेकिन जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
- गलत सूचना और दुष्प्रचार दो-वर्षीय परिदृश्य में दूसरे स्थान पर
- साइबर असुरक्षा छठे स्थान पर
सबसे तेज़ उछाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रतिकूल परिणामों में देखा गया है, जो दो वर्षों में 30वें स्थान से दस वर्षों में 5वें स्थान पर पहुँच गया है। एआई का प्रभाव श्रम बाजार, समाज और वैश्विक सुरक्षा पर गहरा हो सकता है।
साथ ही, क्वांटम तकनीक बड़े अवसरों के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और ध्रुवीकरण का जोखिम भी लाती है।
समाज कगार पर: असमानता और ध्रुवीकरण
सामाजिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण लोकतांत्रिक प्रणालियों पर दबाव बढ़ा रहा है। “सड़क बनाम अभिजात वर्ग” जैसे आख्यान शासन पर अविश्वास को दर्शाते हैं।
लगातार दूसरे वर्ष असमानता को सबसे अधिक आपस में जुड़ा वैश्विक जोखिम माना गया है। बढ़ती जीवन-यापन लागत और संपत्ति का केंद्रीकरण स्थायी के-आकार की अर्थव्यवस्थाओं का खतरा पैदा कर रहा है, जिससे सामाजिक अनुबंध कमजोर पड़ रहा है।
पर्यावरणीय जोखिम: अल्पकाल में पीछे, दीर्घकाल में शीर्ष पर
अल्पकाल में पर्यावरणीय जोखिमों की प्राथमिकता घटती दिखती है-
- अत्यधिक मौसम घटनाएँ 2 से 4वें स्थान पर
- प्रदूषण 6 से 9वें स्थान पर
लेकिन दस वर्षों के परिदृश्य में पर्यावरणीय जोखिम सबसे गंभीर बने हुए हैं। अत्यधिक मौसम घटनाएँ शीर्ष जोखिम हैं और शीर्ष 10 में आधे जोखिम पर्यावरण से जुड़े हैं।
लगभग तीन-चौथाई उत्तरदाता अगले दशक में पर्यावरणीय जोखिमों को तूफानी मानते हैं। जलवायु परिवर्तन से अवसंरचना, बिजली ग्रिड और आपूर्ति-श्रृंखलाएँ प्रभावित हो रही हैं।
नई प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार 68% उत्तरदाता अगले दस वर्षों में दुनिया को बहुध्रुवीय या खंडित व्यवस्था के रूप में देखते हैं, जहाँ क्षेत्रीय शक्तियाँ नियम तय करेंगी। केवल 6% लोग पुराने एकध्रुवीय नियम-आधारित ढाँचे की वापसी की उम्मीद करते हैं।
1944 के ब्रेटन वुड्स संस्थानों की प्रासंगिकता की परीक्षा हो रही है। संरक्षणवाद और रणनीतिक औद्योगिक नीति से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
भारत के लिए प्रमुख जोखिम
GRPS ढाँचे के अनुसार भारत के सामने कुछ विशेष जोखिम उभरते हैं-
- साइबर असुरक्षा
- असमानता (आय और संपत्ति)
- अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएँ और सामाजिक सुरक्षा (शिक्षा, अवसंरचना, पेंशन)
- जलवायु और आपूर्ति-श्रृंखला झटके
भारत की चुनौती है-विकास, समावेशन और लचीलापन एक साथ साधना।
अनुशंसित कदम
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि गिरावट अनिवार्य नहीं है। प्रमुख सुझाव-
- परस्पर लाभ वाले आर्थिक प्रोत्साहन
- बहुपक्षीय संस्थाओं को सुदृढ़ करना
- स्थानीय लचीलापन बढ़ाना
- उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक मानदंड
- असमानता घटाने के लिए समावेशी नीतियाँ
इतिहास बताता है कि प्रतिस्पर्धा के बीच भी रणनीतिक सहयोग से व्यवस्था पुनर्निर्मित हो सकती है।
निष्कर्ष :
वैश्विक जोखिम परिदृश्य 2026 यह दर्शाता है कि दुनिया एक निर्णायक मोड़ पर है। भू-राजनीतिक झटके, तकनीकी बदलाव, जलवायु अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता मिलकर अभूतपूर्व चुनौतियाँ खड़ी कर रहे हैं। फिर भी भविष्य पूर्वनिर्धारित नहीं है। आज लिए गए निर्णय-सहयोग या टकराव-आने वाले दशक की दिशा तय करेंगे। साझा जिम्मेदारी और दूरदर्शी नेतृत्व ही अनिश्चितता के इस युग में स्थिरता ला सकता है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रश्न :
विश्व आर्थिक मंच के वैश्विक जोखिम परिदृश्य 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भू-आर्थिक टकराव को 2026 का सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम माना गया है।
- अल्पकाल में पर्यावरणीय जोखिमों की प्राथमिकता घटती दिखती है, पर दीर्घकाल में वे प्रमुख बने रहते हैं।
- बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की अपेक्षा उत्तरदाताओं में बढ़ी है।
सही कथनों का चयन कीजिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
मुख्य परीक्षा प्रश्न (सामान्य अध्ययन – II/III)
प्रश्न : वैश्विक जोखिम परिदृश्य 2026 बहुपक्षवाद के क्षरण और भू-आर्थिक टकराव के उभार को रेखांकित करता है। इस संदर्भ में वैश्विक शासन पर इसके प्रभावों तथा भारत के लिए निहितार्थों की चर्चा कीजिए।
