हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। संभावित हॉर्स ट्रेडिंग यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजने का फैसला किया है। इसी के तहत पार्टी के कई विधायक पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के शिमला पहुंचाए गए हैं।
कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है कि चुनाव से पहले विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित जगह पर रखने की रणनीति अपनाई है, ताकि मतदान तक पार्टी की एकजुटता बनी रहे।
शिमला के होटल में ठहराए गए विधायक
जानकारी के अनुसार कांग्रेस के कई विधायक शिमला से लगभग 22 किलोमीटर दूर कुफरी के पास गलू इलाके में स्थित होटल ट्विन टावर में ठहराए गए हैं। इस होटल में पहले से कमरे बुक कर दिए गए थे। इसके अलावा कुछ कमरे कुफरी के ही एक अन्य होटल रेडिसन में भी आरक्षित किए गए हैं, जहां पार्टी के कुछ सांसद और नेता ठहरे हुए हैं।
विधायकों को लक्जरी बसों और टेम्पो ट्रैवलर के जरिए शिमला ले जाया गया। हरियाणा सीमा से ही हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उन्हें एस्कॉर्ट कर सुरक्षित तरीके से होटल तक पहुंचाया। होटल के बाहर भी सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की गई है।

सभी विधायक नहीं पहुंचे शिमला
हालांकि कांग्रेस के सभी विधायक इस यात्रा में शामिल नहीं हुए। कुछ नेताओं ने निजी कारणों का हवाला देते हुए फिलहाल शिमला जाने से मना कर दिया।
उदाहरण के तौर पर बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने बताया कि उनके परिवार में शादी का कार्यक्रम है, इसलिए वे हिमाचल नहीं जा पाएंगे। इसी तरह कुछ अन्य विधायक भी बाद में शिमला पहुंचने की बात कहकर फिलहाल चंडीगढ़ में ही रहे।
जुलाना से विधायक और पहलवान विनेश फोगाट भी हुड्डा आवास से निकलती दिखाई दीं, लेकिन उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की। बताया गया कि वे अपने छोटे बच्चे के साथ थीं।
हुड्डा के घर हुई बैठक और लंच
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायकों की एक अहम बैठक चंडीगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर हुई। यहां सभी 37 विधायक लंच के लिए पहुंचे थे।
बैठक में चुनाव की रणनीति और विधानसभा सत्र को लेकर चर्चा की गई। हालांकि हुड्डा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सामान्य बैठक थी और इस तरह की बैठकें पहले भी होती रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि विधायक कहां गए हैं। उनके अनुसार सभी विधायक 16 मार्च को मतदान के लिए उपस्थित रहेंगे और उसके बाद विधानसभा सत्र में भी भाग लेंगे।
विधानसभा में क्या है संख्या का गणित
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायक उसका समर्थन कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जबकि इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दो विधायक हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत होती है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के पास कम से कम एक-एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है।
हालांकि चुनाव दिलचस्प इसलिए हो गया है क्योंकि एक और उम्मीदवार मैदान में आ गया है।
चुनाव में कौन-कौन उम्मीदवार
इस बार भाजपा ने अपने उम्मीदवार के तौर पर संजय भाटिया को मैदान में उतारा है। संजय भाटिया 2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल सीट से रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल कर चुके हैं।
वहीं कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को अपना उम्मीदवार बनाया है। वे एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं और कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक भी रहे हैं।
इसी बीच भाजपा नेता सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
क्यों खाली हो रही हैं ये सीटें
हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। इन सीटों पर मौजूदा सांसद किरण चौधरी और राम चंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
इन सीटों को भरने के लिए 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा।
पहले भी कांग्रेस को झेलनी पड़ी शर्मिंदगी
हरियाणा में राज्यसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस को पहले भी मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा है।
साल 2022 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था, जबकि पार्टी के पास पर्याप्त विधायक थे। उस समय पार्टी के भीतर ही क्रॉस वोटिंग और अवैध वोट को लेकर विवाद हुआ था।
इससे पहले 2016 के चुनाव में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आर.के. आनंद की हार हुई थी। उस चुनाव में 12 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए थे, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा था।
इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार कांग्रेस पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है।
विधायकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
सूत्रों के अनुसार शिमला पहुंचे विधायकों को मतदान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी। राज्यसभा चुनाव में मतदान का तरीका थोड़ा अलग होता है, इसलिए पार्टी चाहती है कि कोई भी विधायक गलती न करे।
पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी विधायक सही तरीके से पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालें।
विपक्ष और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि चुनाव से पहले अभी 72 घंटे बाकी हैं और इस दौरान सियासत में कुछ भी हो सकता है।
उन्होंने इशारा किया कि हरियाणा की राजनीति में पहले भी कई बार अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं।
निष्कर्ष:
हरियाणा में होने वाला यह राज्यसभा चुनाव भले ही संख्या के लिहाज से दोनों प्रमुख दलों के लिए आसान दिखाई देता हो, लेकिन राजनीतिक रणनीतियों और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका ने इसे दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस का अपने विधायकों को शिमला भेजने का फैसला यह दिखाता है कि पार्टी इस बार किसी भी तरह की चूक से बचना चाहती है। वहीं भाजपा और अन्य उम्मीदवारों की मौजूदगी चुनाव को और रोमांचक बना रही है।

