वैश्विक धातु कीमतों में भारी उछाल के चलते, हिंदुस्तान कॉपर के शेयर 29 दिसंबर, 2025 को ₹545.95 के 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। जिसके बाद, अब कंपनी के बाजार मूल्य ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों की ऐतिहासिक छलांग
- 29 दिसंबर 2025 को हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के शेयरों ने शेयर बाजार में नया इतिहास रच दिया। कारोबारी सत्र के दौरान शेयर ने ₹545.95 का अब तक का सर्वोच्च स्तर छुआ। यह उपलब्धि केवल एक दिन की तेजी नहीं, बल्कि धातु क्षेत्र में कंपनी की मजबूत स्थिति और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का स्पष्ट संकेत है।
- बीते सात कारोबारी सत्रों में हिंदुस्तान कॉपर के शेयर मूल्य में लगभग 48 प्रतिशत की तेज़ बढ़त दर्ज की गई। इतनी कम अवधि में यह उछाल कंपनी के शेयर इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है। इस तेजी से यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
- शेयर कीमत में मजबूती के साथ-साथ कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण ₹50,000 करोड़ के आँकड़े को पार कर गया। यह स्तर पार करना इस बात का संकेत है कि कंपनी की कुल बाजार वैल्यू में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- साल अप्रैल 2025 में यही शेयर लगभग ₹183.90 के आसपास का कारोबार कर रहा था, जो उस समय का मल्टी-मंथ लो था। इसके बाद धीरे-धीरे हालात बदले और पूरे 2025 के दौरान हिंदुस्तान कॉपर के शेयर ने निवेशकों को प्रभावशाली रिटर्न दिया। अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर से यह शेयर अब तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है।
हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में तेज़ी के प्रमुख कारण
- साल 2025 में हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों को सबसे बड़ा सहारा अंतरराष्ट्रीय तांबा कीमतों से मिला। लंदन मेटल एक्सचेंज जैसे प्रमुख वैश्विक बाजारों में तांबे की कीमतें दिसंबर के अंत तक लगभग 13,000 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुँच गईं। सीमित आपूर्ति और बढ़ती औद्योगिक मांग ने कीमतों को नई ऊँचाई दी।
- तांबे की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति पक्ष की समस्याएँ भी अहम रहीं। प्रमुख तांबा उत्पादक देशों में खदानों का अचानक बंद होना और नई परियोजनाओं में देरी देखी गई। इससे वैश्विक उत्पादन प्रभावित हुआ। पूरे 2025 में यह आपूर्ति अंतर बना रहा, जिसने कीमतों को लगातार ऊपर की ओर धकेला।
- भारत में तांबे की घरेलू खपत वित्त वर्ष 2025 में तेज़ी से बढ़ी। मांग में लगभग 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल खपत 1,878 किलो टन तक पहुँच गई। यह बढ़ोतरी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, निर्माण क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से आई। बढ़ती
- भारतीय शेयर बाजार में मेटल सेक्टर ने 2025 में कई अन्य क्षेत्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। बेस मेटल और नॉन-फेरस मेटल कंपनियों में निवेशकों की रुचि बढ़ी। अनुकूल कमोडिटी चक्र के कारण निवेशकों ने मेटल शेयरों की ओर रुख किया।
- हिंदुस्तान कॉपर एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) है। 2025 में पीएसयू शेयरों पर निवेशकों का खास ध्यान रहा। सरकारी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को अक्सर स्थिर और दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जाता है। इसी कारण इस शेयर में ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ी और मांग मजबूत बनी।
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के बारे में
- हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक प्रमुख तांबा खनन कंपनी है। यह देश की एकमात्र ऐसी कंपनी है जो खनन से लेकर अयस्क प्रसंस्करण और कंसन्ट्रेट उत्पादन तक पूरी तरह एकीकृत संचालन करती है।
- कंपनी की स्थापना भारत की औद्योगिक जरूरतों के लिए तांबे की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। खनन मंत्रालय इसके संचालन और रणनीतिक दिशा की निगरानी करता है। समय के साथ HCL ने अपने खनन क्षेत्रों और क्षमताओं का लगातार विस्तार किया है।
- हिंदुस्तान कॉपर की प्रमुख खदानें मलांजखंड (मध्य प्रदेश), खेतड़ी (राजस्थान) और झारखंड के तांबा परिसरों में स्थित हैं। ये इकाइयाँ कंपनी की उत्पादन रीढ़ हैं। HCL द्वारा उत्पादित कॉपर अयस्क और मेटल-इन-कंसन्ट्रेट (MIC) का उपयोग तार, केबल और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में होता है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में HCL ने कुल 34.74 लाख टन अयस्क उत्पादन दर्ज किया। इसमें मलांजखंड परियोजना ने विशेष भूमिका निभाई। इस प्रमुख इकाई ने केवल भूमिगत खनन से 27.25 लाख टन उत्पादन किया और अपने वार्षिक लक्ष्य से लगभग 3 प्रतिशत अधिक प्रदर्शन किया।
- हिंदुस्तान कॉपर ने FY 2024-25 में अब तक का सबसे अधिक परिचालन राजस्व अर्जित किया। कंपनी की आय ₹2,070.9 करोड़ तक पहुँची, जो पिछले वर्ष के ₹1,717 करोड़ से लगभग 21 प्रतिशत अधिक रही। इसके बाद FY 2025-26 की पहली तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 18 प्रतिशत बढ़कर ₹134.28 करोड़ हो गया।
- कंपनी ने अगले पाँच से छह वर्षों में लगभग ₹2,000 करोड़ के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई है, जो FY 2030-31 तक चलेगी। इस निवेश का बड़ा हिस्सा मलांजखंड कॉपर परियोजना के विस्तार में लगाया जाएगा। HCL का लक्ष्य अपनी अयस्क उत्पादन क्षमता को मौजूदा 4 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर लगभग 12.2 मिलियन टन प्रति वर्ष करना है।
