बदलती जीवनशैली का असर: अब हर पांच में से एक व्यक्ति सोफे पर करता है डिनर, जानिए क्या है नई रिपोर्ट में?

दुनिया भर में लोगों के खाने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। अब परिवार के साथ डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने की परंपरा पहले जैसी नहीं रही। हाल ही में फर्नीचर और होम सॉल्यूशन ब्रांड IKEA की एक वैश्विक रिपोर्ट में सामने आया है कि अब लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति सोफे पर बैठकर रात का खाना खाता है।

 

यह सर्वे कुकिंग एंड ईटिंग पर अब तक के सबसे बड़े अध्ययनों में से एक बताया जा रहा है। इसमें 31 देशों के 31,339 लोगों ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट से पता चलता है कि स्क्रीन, छोटी जगह और व्यस्त दिनचर्या ने खाने की आदतों को चुपचाप बदल दिया है।

 

डाइनिंग टेबल से दूर होता खाना

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में केवल 44 प्रतिशत लोग ही रसोई या डाइनिंग टेबल पर बैठकर डिनर करते हैं। इसके विपरीत 18 प्रतिशत लोग सोफे पर खाना खाते हैं। 4 प्रतिशत लोग बिस्तर पर और 4 प्रतिशत लोग रसोई में खड़े होकर खाना खा लेते हैं।

 

ब्रिटेन में स्थिति और अलग है। वहां 48 प्रतिशत लोग सोफे पर खाना खाते हैं, जबकि केवल 31 प्रतिशत लोग किचन टेबल का उपयोग करते हैं। कुछ देशों में तो डाइनिंग टेबल का चलन ही कम हो रहा है।

 

स्क्रीन के साथ बढ़ा खाना

रिपोर्ट बताती है कि खाने के समय मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल बहुत आम हो गया है। केवल 7 प्रतिशत घरों में डाइनिंग टेबल पर बिना किसी डिवाइस के खाने का नियम है।

 

54 प्रतिशत लोग अकेले खाना खाते समय टीवी देखते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 40 प्रतिशत लोग परिवार के साथ खाना खाते हुए भी टीवी ऑन रखते हैं। यानी खाना अब बातचीत से ज्यादा स्क्रीन के साथ जुड़ गया है।

 

IKEA रिटेल (इंगका ग्रुप) की ग्लोबल फूड मैनेजर लोरेना लौरिडो गोमेज का कहना है कि खाना भावनात्मक रूप से बहुत अहम है, लेकिन साझा भोजन पर दबाव बढ़ रहा है। व्यस्त जीवन, छोटे घर और अलग-अलग प्राथमिकताएं लोगों को एक ही समय और एक ही जगह पर साथ बैठने से रोक रही हैं।

Impact of changing lifestyle

समय की कमी सबसे बड़ी समस्या

रिपोर्ट में पाया गया कि सप्ताह के दिनों में घर पर खाना बनाने में सबसे बड़ी रुकावट समय की कमी है। खासकर युवा पीढ़ी इसे बड़ी चुनौती मानती है।

 

38 प्रतिशत जेन जेड और 33 प्रतिशत मिलेनियल्स ने माना कि उनके पास खाना बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। जिन परिवारों में बच्चे हैं या जो बड़े शहरों में रहते हैं, उन्हें जगह की कमी और रसोई के उपकरणों की कमी जैसी समस्याएं ज्यादा महसूस होती हैं।

 

डिनर का समय भी बदल रहा है

दुनिया भर में औसत डिनर समय शाम 6 बजकर 44 मिनट है। लेकिन कुछ देशों में यह समय अलग है। स्पेन में लोग औसतन रात 8 बजकर 54 मिनट पर खाना खाते हैं, जबकि फिनलैंड में लोग शाम 5 बजकर 17 मिनट पर ही डिनर कर लेते हैं।

 

अधिकांश लोग अपना डिनर 30 मिनट से कम समय में खत्म कर लेते हैं। कम आय वाले परिवारों में लोग ज्यादा जल्दी खाना खाते हैं। ऐसे परिवारों के लोग उच्च आय वाले परिवारों की तुलना में दो गुना अधिक संभावना रखते हैं कि वे 10 मिनट से भी कम समय में खाना खत्म कर दें।

 

खाने की पसंद में बदलाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मसालेदार खाना पसंद करने वालों की संख्या बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर 27 प्रतिशत लोग तीखा खाना पसंद करते हैं। नॉर्वे (47 प्रतिशत), स्वीडन (45 प्रतिशत) और फिनलैंड (39 प्रतिशत) में मसालेदार भोजन के शौकीन ज्यादा हैं।

 

मीठा अब भी लोगों के लिए सुकून देने वाला भोजन है। 46 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हें मीठा पसंद है। चीन में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 64 प्रतिशत है।

 

एक और रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में 55 प्रतिशत लोग खाने की बर्बादी रोकने के लिए एक्सपायरी डेट के बाद भी भोजन खा लेते हैं।

 

डाइनिंग टेबल सिर्फ खाने की जगह नहीं

हालांकि डाइनिंग टेबल का उपयोग कम हुआ है, लेकिन यह अब भी घर में एक अहम जगह है। 31 प्रतिशत लोग इसे खास मौकों और उत्सव के लिए इस्तेमाल करते हैं। 29 प्रतिशत के लिए यह आपसी जुड़ाव की जगह है। 20 प्रतिशत लोग यहां बैठकर दिनभर की बातें करते हैं या खबरों पर चर्चा करते हैं।

 

यह उपयोग महिलाओं, बच्चों के साथ रहने वाले परिवारों और गांव या छोटे शहरों में रहने वालों में ज्यादा देखा गया।

 

रात में स्नैकिंग का चलन

रिपोर्ट बताती है कि हर पांच में से एक व्यक्ति रात में स्नैक खाना पसंद करता है। यानी डिनर के बाद भी हल्का-फुल्का खाने का चलन आम हो गया है।

 

रसोई से जुड़ी परेशानियां

अध्ययन में रसोई से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। केवल 32 प्रतिशत लोग अपनी रसोई से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

 

25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके किचन में स्टोरेज की कमी है। उतने ही लोगों ने बताया कि काउंटर या काम करने की जगह कम है। 24 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी रसोई बहुत छोटी है।

 

कुल मिलाकर 46 प्रतिशत लोगों ने कम से कम एक ऐसी समस्या बताई, जिससे साफ है कि लगभग आधे लोग अपनी रसोई में जगह की कमी महसूस करते हैं।

 

यह समस्या खासकर एशियाई देशों (53 प्रतिशत), शहरों में रहने वालों (50 प्रतिशत), बच्चों वाले परिवारों (51 प्रतिशत) और जेन जेड व मिलेनियल्स (दोनों 51 प्रतिशत) में ज्यादा है।

 

डच लोग अपनी रसोई को लेकर सबसे कम चिंतित पाए गए। वहां 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, जबकि चीन में केवल 16 प्रतिशत लोग ऐसा कह पाए।

 

खाने का बदलता रूप

रिपोर्ट से साफ है कि खाना अब पहले जैसा स्थिर और तय समय का अनुभव नहीं रहा। लोग कहीं भी, कभी भी और किसी भी तरीके से खाना खा रहे हैं।

 

अमेरिका और हंगरी में लोग बिस्तर पर खाना खाने की संभावना वैश्विक औसत से दोगुनी है। वहीं ब्रिटेन में कई घरों में डाइनिंग टेबल ही नहीं है।

 

जैसे-जैसे घर छोटे हो रहे हैं और दिनचर्या व्यस्त हो रही है, “साथ बैठकर खाना” एक लचीली आदत में बदलता जा रहा है।

 

सर्वे के बारे में

यह सर्वे अगस्त और सितंबर 2025 के बीच किया गया था। इसे YouGov ने IKEA के लिए 31 देशों में आयोजित किया। जनवरी 2026 में रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया। इसमें चार मुख्य विषय शामिल हैं – कंफर्टेबल कैओस, डिसकंफर्ट फूड्स, द सोशल प्रेशर कुकर और रीसेटिंग द टेबल।

 

इंगका ग्रुप, जो 32 देशों में IKEA रिटेल संचालन संभालता है, कुल वैश्विक बिक्री का 87 प्रतिशत हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है।

 

निष्कर्ष:

यह अध्ययन दिखाता है कि खाना अब सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली का आईना भी है। सोफे पर डिनर, टीवी के सामने खाना, जल्दी-जल्दी भोजन खत्म करना और रसोई में जगह की कमी – ये सब आधुनिक जीवन की तस्वीर पेश करते हैं।

 

फिर भी, साझा भोजन की अहमियत खत्म नहीं हुई है। लोग अब भी खास मौकों पर साथ बैठना चाहते हैं। सवाल यह है कि क्या भविष्य में हम फिर से डाइनिंग टेबल की ओर लौटेंगे, या खाना पूरी तरह से “चलते-फिरते” अनुभव में बदल जाएगा?

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