OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने गुरुवार को कहा कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बेहद तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने भारत को कंपनी के लिए दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया।
ऑल्टमैन के मुताबिक, भारत में AI तकनीक को अपनाने की गति “असाधारण” है। उन्होंने कहा कि यहां न सिर्फ यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, बल्कि छात्र, स्टार्टअप और कंपनियां भी बड़े पैमाने पर AI टूल्स का उपयोग कर रही हैं।
ऑल्टमैन ने कहा कि AI का केंद्रीकरण किसी एक कंपनी या देश के हाथ में नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, “AI का लोकतांत्रिक उपयोग ही मानवता के लिए बेहतर है। अगर यह एक जगह सिमट गया तो नुकसान भी हो सकता है।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि बिना नियमों के यह तकनीक सुरक्षित नहीं रह सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा और निगरानी के लिए वैश्विक तालमेल जरूरी है और ऐसी संस्था को हालात के अनुसार तेजी से फैसले लेने में सक्षम होना चाहिए।
‘OpenAI for India’ पहल की घोषणा
समिट में ऑल्टमैन ने ‘OpenAI for India’ नाम से नई पहल की शुरुआत का ऐलान किया। इसका मकसद भारत में AI से जुड़ा ढांचा मजबूत करना, युवाओं को प्रशिक्षण देना और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक समाधान तैयार करना है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य है-“भारत के साथ, भारत के लिए और भारत में AI बनाना।”
OpenAI ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ मिलकर भारत में डेटा सेंटर ढांचा तैयार करने की योजना भी घोषित की है। इससे कंपनी के उन्नत मॉडल भारत में सुरक्षित रूप से चल सकेंगे। इससे डेटा देश के भीतर रहेगा, सुरक्षा नियमों का पालन होगा और सेवाएं तेज मिलेंगी।

भारत में AI की तेज रफ्तार
ऑल्टमैन ने बताया कि भारत OpenAI के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत में हर हफ्ते 10 करोड़ लोग चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें से एक-तिहाई से ज्यादा छात्र हैं। उनके अनुसार, यह कंपनी का शायद सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है, खासकर कोडेक्स जैसे टूल्स के लिए।
उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ AI क्रांति में शामिल नहीं है, बल्कि कई मामलों में नेतृत्व कर रहा है। हालांकि उन्होंने माना कि AI नौकरी बाजार को प्रभावित करेगा, लेकिन मानव समाज हर बार नई तकनीक के साथ नए अवसर भी पैदा करता है।
OpenAI ने पिछले साल दिल्ली में अपना पहला कार्यालय खोला था और अब भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा यूजर बेस बन चुका है।
AI और परमाणु ऊर्जा की तुलना
हाल के वर्षों में विशेषज्ञ AI की तुलना परमाणु तकनीक से कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक बहुत ताकतवर है और गलत दिशा में जाने पर बड़ा नुकसान कर सकती है।
यूसी बर्कले के प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल ने भी इसी समिट में कहा कि दुनिया अभी यह नहीं जानती कि अगर मशीनें इंसानों की तरह “सोचने” लगें तो क्या होगा। उनके मुताबिक, कई बड़े टेक कंपनियों के प्रमुख निजी तौर पर AI के खतरों को स्वीकार करते हैं।
रसेल ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते नियम नहीं बने तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकारों को अभी से सुरक्षा और नैतिक पहलुओं पर काम करना चाहिए, न कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करना चाहिए।
भारत के लिए AI क्यों अहम?
AI भारत के लिए सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का साधन बन सकता है।
- आम लोगों के लिए
स्वास्थ्य: भारत में डॉक्टर और मरीज का अनुपात लगभग 1:834 है। AI आधारित जांच प्रणाली जैसे Qure.ai रेडियोलॉजी में मदद कर रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में भी जांच आसान हो रही है।
शिक्षा: DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म और अनुकूलित लर्निंग सिस्टम अलग-अलग गति से सीखने वाले छात्रों की मदद कर रहे हैं। YUVAi कार्यक्रम के जरिए कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को AI और सामाजिक कौशल सिखाए जा रहे हैं।
भाषाई समावेशन: भाषिनी प्लेटफॉर्म 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा देता है। इससे डिजिटल सेवाएं भाषा की बाधा से मुक्त हो रही हैं। ‘सरवम विजन’ जैसे स्वदेशी मॉडल भारतीय भाषाओं में दस्तावेज पहचान और प्रोसेसिंग में मदद कर रहे हैं।
- पर्यावरण और खेती के लिए
कृषि: AI सैटेलाइट तस्वीरों और मिट्टी के डेटा का विश्लेषण कर मौसम और कीटों की जानकारी देता है। किसान ई-मित्र जैसे चैटबॉट उर्वरक के सही उपयोग में मदद करते हैं। ‘मौसमGPT’ क्षेत्रीय भाषाओं में मौसम सलाह देने के लिए तैयार किया जा रहा है।
ऊर्जा प्रबंधन: भारत के 2070 नेट जीरो लक्ष्य को हासिल करने में AI अहम भूमिका निभा सकता है। स्मार्ट ग्रिड सिस्टम के जरिए बिजली की मांग और आपूर्ति का बेहतर संतुलन बनाया जा रहा है।
बाढ़ पूर्वानुमान: ब्रह्मासटार्क जैसे सिस्टम ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन में बाढ़ का पूर्वानुमान देने में मदद कर रहे हैं।
- आर्थिक और प्रशासनिक बदलाव
अनुमान है कि 2030 तक AI भारत की जीडीपी में 500 से 600 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है।
भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर-आधार, UPI और डिजीलॉकर-के साथ AI को जोड़ रहा है। MuleHunter.AI जैसे टूल बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने में मदद कर रहे हैं। अदालतों के जटिल फैसलों का अनुवाद कर उन्हें आम लोगों के लिए आसान बनाया जा रहा है।
डिजिटल संप्रभुता और स्वदेशी मॉडल
भारतAI मिशन के तहत देश अपनी कंप्यूट क्षमता बढ़ा रहा है। 38,000 से ज्यादा GPU सिस्टम जोड़े गए हैं। ‘भारतजेन’ जैसे सरकारी सहयोग से विकसित मल्टीमॉडल मॉडल भारतीय जरूरतों के मुताबिक AI समाधान तैयार कर रहे हैं।
इससे भारत का डेटा देश में ही रहेगा और मॉडल भारतीय संस्कृति और भाषाओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
भारत में AI का मौजूदा इकोसिस्टम
- 60 लाख से ज्यादा लोग टेक और AI क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
- 2027 तक AI प्रतिभा 12.5 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है।
- 18.56 लाख से ज्यादा लोगों ने फ्यूचरस्किल्स PRIME में पंजीकरण कराया, जिनमें 3.37 लाख ने कोर्स पूरा किया।
- देश में 1,800 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें 500 से अधिक AI पर केंद्रित हैं।
- करीब 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 89% नए स्टार्टअप AI का उपयोग कर रहे हैं।
- NASSCOM AI इंडेक्स में भारत का स्कोर 2.45/4 है और 87% कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं।
- BCG रिपोर्ट के अनुसार 26% भारतीय कंपनियां AI परिपक्वता के स्तर तक पहुंच चुकी हैं।
भारतAI मिशन क्या है?
मार्च 2024 में 10,371 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूर इस मिशन का उद्देश्य है-“भारत में AI बनाना और AI को भारत के काम में लाना।”
इसके सात प्रमुख स्तंभ हैं:
- IndiaAI Compute: सस्ती GPU पहुंच, 40% तक कम लागत।
- Application Development: स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में समाधान।
- AIKosh: 3,000 से ज्यादा डाटासेट और 243 मॉडल।
- Foundation Models: भारतीय भाषाओं पर आधारित स्वदेशी मॉडल।
- FutureSkills: प्रशिक्षण और लैब की स्थापना।
- Startup Financing: फंडिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच।
- Safe and Trusted AI: पक्षपात कम करना, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
आगे का रास्ता
AI तेजी से बदल रही तकनीक है। इसमें अपार अवसर हैं, लेकिन जोखिम भी कम नहीं। वैश्विक स्तर पर नियम बनाने की मांग बढ़ रही है। सैम ऑल्टमैन की IAEA जैसी संस्था की बात इसी दिशा में एक बड़ा संकेत है।
भारत इस दौड़ में आगे बढ़ रहा है-तकनीक अपनाने, प्रतिभा तैयार करने और अपने मॉडल विकसित करने में। लेकिन साथ ही सवाल भी उठता है कि क्या दुनिया समय रहते AI के लिए मजबूत और संतुलित नियम बना पाएगी, या फिर किसी बड़े झटके के बाद ही जागेगी?

