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भारत और बांग्लादेश ने 151 मछुआरों को रिहा किया, नावों के साथ हुई स्वदेश वापसी

गुरुवार को भारत और बांग्लादेश ने दोनों देशों के कुल 151 मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस प्रयास में 23 भारतीय और 128 बांग्लादेशी मछुआरों को उनकी कार्यशील नौकाओं के साथ मुक्त किया गया।

भारत और बांग्लादेश ने 151 मछुआरों को रिहा किया, नावों के साथ हुई स्वदेश वापसी

गुरुवार को भारत और बांग्लादेश ने दोनों देशों के कुल 151 मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस प्रयास में 23 भारतीय और 128 बांग्लादेशी मछुआरों को उनकी कार्यशील नौकाओं के साथ मुक्त किया गया। यह कदम समुद्री सीमा पर मछुआरा समुदायों की मानवीय और आजीविका संबंधी चिंताओं को संबोधित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

 

अनजाने में सीमा उल्लंघन के मामले

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय मछुआरों को बांग्लादेशी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा को अनजाने में पार करने के बाद हिरासत में लिया था। इसी प्रकार, बांग्लादेशी मछुआरे भारतीय एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए थे।

 

मंत्रालय के बयान में कहा गया, "दोनों सरकारों ने सभी 23 भारतीय मछुआरों और 128 बांग्लादेशी मछुआरों को उनकी चालू हालत में मौजूद नौकाओं के साथ रिहा करने और स्वदेश भेजने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।"

जनवरी और दिसंबर में भी हुई थी रिहाई

विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि जनवरी और दिसंबर 2025 में भारत सरकार ने 142 भारतीय मछुआरों की रिहाई को सुगम बनाया था। साथ ही, पारस्परिक सहयोग के तहत 128 बांग्लादेशी मछुआरों को भी मुक्त किया गया था।

 

मंत्रालय के अनुसार, मछुआरों और उनकी नौकाओं की यह परस्पर अदला-बदली सीमा के दोनों ओर मछुआरा समुदायों की मानवीय और आजीविका आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई।

 

बयान में कहा गया, "यह पारस्परिक विनिमय दोनों पक्षों के मछुआरा समुदायों की मानवीय और आजीविका चिंताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।"

 

भारतीय उच्चायोग की सक्रिय भूमिका

विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि बांग्लादेश में कारावास के दौरान भारतीय मछुआरों की भलाई पर भारतीय उच्चायोग द्वारा बारीकी से निगरानी रखी गई।

 

मंत्रालय ने कहा, "भारतीय उच्चायोग ने उन्हें गर्म जैकेट प्रदान किए और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था सुनिश्चित की।"

 

मंत्रालय ने जोड़ा कि सरकार "भारतीय मछुआरों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च महत्व देती है।"

यह पहल भारत और बांग्लादेश के बीच मानवीय मुद्दों पर सहयोग और समझ का उदाहरण है। समुद्री सीमा पर मछली पकड़ने वाले समुदाय अक्सर अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा को पार कर जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तारी का सामना करना पड़ता है।

 

दोनों देशों की सरकारों द्वारा इन मछुआरों की त्वरित रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करना यह दर्शाता है कि वे आम लोगों की कठिनाइयों को समझते हैं और उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

इस समन्वित प्रयास से न केवल मछुआरों और उनके परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को भी रेखांकित करता है। मछुआरा समुदाय, जो अपनी आजीविका के लिए समुद्र पर निर्भर हैं, अब अपने परिवारों के साथ पुनर्मिलित हो सकेंगे और अपना पारंपरिक व्यवसाय फिर से शुरू कर सकेंगे।

 

यह घटनाक्रम क्षेत्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता का परिचायक है।

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