नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सोमवार सुबह एक अहम मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आमने-सामने बैठे और दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने पर चर्चा की। यह दौरा कई मायनों में खास रहा, क्योंकि 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा थी। साथ ही, मार्च 2025 में पद संभालने के बाद मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा भी था।
इस मुलाकात में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के आपसी संबंधों से जुड़े कई बड़े फैसले हुए। सबसे ज्यादा चर्चा 10 साल के यूरेनियम आपूर्ति समझौते की रही, जिसे इस यात्रा का सबसे बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
ऐतिहासिक यूरेनियम सप्लाई डील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में दोनों देशों ने दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए एक अहम समझौता किया है। जानकारी के मुताबिक, यह व्यावसायिक करार करीब 2.6 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 3 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास) का है। यह समझौता कनाडा की कंपनी Cameco और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच हुआ है।
कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत तेजी से अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ा रहा है, ताकि साफ ऊर्जा के लक्ष्य पूरे किए जा सकें। 2013 में दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट लागू होने के बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। अब नए समझौते से भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा जरूरतों को स्थिरता मिलेगी।
दोनों नेताओं ने यह भी तय किया कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत रिएक्टर तकनीक के विकास में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे ऊर्जा उत्पादन सुरक्षित और अधिक कुशल हो सकेगा।

रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को नई रफ्तार
बैठक में भारत-कनाडा स्ट्रैटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देश ऊर्जा के क्षेत्र में एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाना चाहते हैं।
कनाडा एलएनजी, एलपीजी, कच्चा तेल और पोटाश जैसे संसाधनों का बड़ा आपूर्तिकर्ता बन रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है। ऐसे में ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।
कनाडा ने 2030 तक 50 मिलियन टन और 2040 तक 100 मिलियन टन एलएनजी उत्पादन का लक्ष्य रखा है। भारत ने भी कनाडा से एलएनजी लेने में रुचि दिखाई है। साथ ही एलपीजी की लंबी अवधि की सप्लाई व्यवस्था पर भी बातचीत चल रही है।
दोनों पक्षों ने साफ ऊर्जा, हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, बैटरी स्टोरेज और बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मिलकर काम करने का फैसला किया। कार्बन कैप्चर तकनीक (CCUS) पर भी सहयोग बढ़ेगा।
क्रिटिकल मिनरल्स और क्लीन एनर्जी पर समझौते
बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स यानी जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस संबंध में एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। भारत ने G7 क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान का समर्थन किया है। इससे स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकों के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
क्लीन एनर्जी को लेकर भी एक व्यापक समझौता हुआ। सोलर, विंड, बायोएनर्जी, स्मॉल हाइड्रो और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य समूह बनाया जाएगा। 2026 में भारत-कनाडा रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज समिट आयोजित करने की योजना है।
कृषि और फूड सिक्योरिटी में सहयोग
दोनों देशों ने कृषि और खाद्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी। भारत में “भारत-कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र” स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह केंद्र NIFTEM कुंडली में स्थापित हो सकता है।
कनाडा का सस्केचेवान प्रांत दाल उत्पादन में अग्रणी है, जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है। इस सहयोग से वैल्यू एडेड फूड, फोर्टिफाइड उत्पाद और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार और निवेश का बढ़ता दायरा
कनाडा के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारतीय आंकड़ों के मुताबिक, कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये है।
भारत से कनाडा को दवाइयां, टेलीफोन उपकरण, ऑटो पार्ट्स, ज्वेलरी, कपड़े, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स और समुद्री उत्पाद निर्यात होते हैं। वहीं कनाडा से भारत को कोयला, वुड पल्प, आयरन, दालें, लकड़ी और खनन उत्पाद आते हैं।
भारत में 600 से अधिक कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में करीब 100 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुके हैं। अब वे इस निवेश को और बढ़ाना चाहते हैं।
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर बातचीत दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई है। लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाया जाए।
मंत्रिस्तरीय स्तर पर चार व्यापार और निवेश यात्राएं तय की गई हैं—दो भारत से कनाडा और दो कनाडा से भारत।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग आपसी विश्वास का प्रतीक है। दोनों देशों ने भारत-कनाडा डिफेंस डायलॉग शुरू करने का फैसला किया है।
समुद्री सुरक्षा, रक्षा सामग्री सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला और संयुक्त अभ्यास पर जोर रहेगा। कनाडा ने भारत में डिफेंस अटैची नियुक्त करने का फैसला किया है। भारत ने भी वॉशिंगटन में अपने डिफेंस अटैची को कनाडा के लिए मान्यता दी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर सुरक्षा वार्ता जारी रहेगी। आतंकवाद, उग्रवाद, साइबर अपराध, ड्रग्स तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ मिलकर काम करने पर सहमति बनी है।
शिक्षा, कौशल और लोगों के रिश्ते
कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। कुल 83.6 लाख लोग विदेश में जन्मे हैं, जो कनाडा की आबादी का 23% हैं। इस लिहाज से वहां भारतीय समुदाय अहम भूमिका निभाता है।
दोनों देशों ने शिक्षा और प्रतिभा आदान-प्रदान पर जोर दिया। AICTE और MITACS के बीच समझौते के तहत हर साल करीब 300 भारतीय छात्र कनाडा में रिसर्च इंटर्नशिप कर सकेंगे।
उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच ड्यूल डिग्री, संयुक्त कार्यक्रम और रिसर्च सहयोग बढ़ाया जाएगा। कनाडा के इंडो-पैसिफिक स्कॉलरशिप कार्यक्रम के तहत 85 से ज्यादा कनाडाई छात्र भारत आएंगे।
विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष सहयोग
संयुक्त विज्ञान और तकनीक सहयोग समिति (JSTCC) को फिर से सक्रिय किया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इकोसिस्टम, क्वांटम कम्युनिकेशन और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और कनाडाई स्पेस एजेंसी के बीच 1996 से सहयोग रहा है। अब नए प्रोजेक्ट्स पर काम होगा, जिनमें स्पेस रोबोटिक्स और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े पहलू शामिल हैं।
बहुपक्षीय मंचों पर साथ
दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। कनाडा ने इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) में डायलॉग पार्टनर बनने में रुचि दिखाई है।
दोनों नेताओं ने कहा कि एक मुक्त, खुला और संतुलित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र जरूरी है।
पश्चिम एशिया पर भारत का रुख
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है और हर समस्या का समाधान बातचीत से होना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद और कट्टरता पूरी मानवता के लिए खतरा हैं और इनसे निपटने में भारत और कनाडा को मिलकर काम करना चाहिए।
निज्जर मामले के बाद सुधार की कोशिश
2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने सख्ती से खारिज किया।
इसके बाद दोनों देशों ने राजनयिकों को निष्कासित किया, वीजा सेवाएं रोकीं और व्यापार वार्ता ठप हो गई।
मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्ते सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हुई। G7 और G20 शिखर बैठकों में हुई मुलाकातों के बाद नई रोडमैप पर काम शुरू हुआ।
आगे की राह
दोनों नेताओं ने “वसुधैव कुटुंबकम” यानी “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” को साझेदारी का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने पर सहमति जताई।
कार्नी ने भारत सरकार और जनता का आभार जताया और कहा कि कनाडा इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

