अमरावती में बनेगा देश का पहला एआई प्लस कैंपस, 2027 से शुरू होंगे दाखिले, लेकिन अमरावती क्यों चुना गया?

आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती अब तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। देश के प्रतिष्ठित निजी संस्थान BITS Pilani ने यहां भारत का पहला “AI प्लस कैंपस” स्थापित करने की घोषणा की है। यह नया परिसर पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उससे जुड़े विषयों पर केंद्रित होगा। योजना के अनुसार यहां 2027 से दाखिले शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

 

AI पर केंद्रित विशेष कैंपस

यह नया कैंपस अमरावती में 70 एकड़ जमीन पर बनेगा, जो राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CRDA) द्वारा दी गई है। इस पहल की घोषणा बीआईटीएस के चांसलर और आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन Kumar Mangalam Birla ने की। उन्होंने कहा कि यह परिसर “डिजिटल-फर्स्ट और AI-फोकस्ड” होगा, जहां पढ़ाई का तरीका आधुनिक होगा और छात्रों को वैश्विक स्तर का अनुभव मिलेगा।

 

इस कैंपस में डेटा साइंस, रोबोटिक्स, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स और कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स जैसे AI से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे। मकसद यह है कि छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि तकनीक का असली इस्तेमाल सीखें।

India first AI Plus campus in amravati

आधुनिक सुविधाएं और हरित डिजाइन

नया परिसर पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां स्मार्ट बिल्डिंग, सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा व्यवस्था और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित सेवाएं होंगी। भवनों का डिजाइन भारतीय परंपरा और आधुनिक वास्तुकला का मेल होगा। यह कैंपस वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के पास बनाया जा रहा है और यहां तक पहुंचने के लिए नई सड़क भी तैयार की जाएगी।

 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने इस परियोजना का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम अमरावती को उच्च शिक्षा का केंद्र बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। उनके अनुसार, यहां पढ़ने वाले छात्रों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी और उद्योगों में इंटर्नशिप का मौका मिलेगा, जिससे वे भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो सकेंगे।

 

असली समस्याओं के समाधान पर जोर

बीआईटीएस के वाइस चांसलर वी. रामगोपाल राव ने कहा कि यह देश का पहला पूर्ण AI-केंद्रित कैंपस होगा। यहां छात्रों को AI की बुनियादी समझ के साथ यह भी सिखाया जाएगा कि इसे खेती, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कैसे उपयोग किया जा सकता है। विश्वविद्यालय वैश्विक संस्थानों के साथ साझेदारी करेगा ताकि छात्रों को नई तकनीक और शोध का लाभ मिल सके।

 

विस्तार की बड़ी योजना

यह प्रोजेक्ट बीआईटीएस की “प्रोजेक्ट विस्तार” योजना का हिस्सा है। इसके तहत पिलानी, हैदराबाद और गोवा कैंपस के विस्तार पर भी करीब 1,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। लक्ष्य है कि 2030–31 तक सभी परिसरों में कुल छात्रों की संख्या 26,000 तक पहुंचाई जाए।

 

अमरावती क्यों चुना गया?

अमरावती पहले से ही एक उभरता हुआ शैक्षणिक केंद्र है। यहां वीआईटी, एसआरएम, अमृता विश्वविद्यालय, एनआईडी, बीआईटीएस और लॉ यूनिवर्सिटी जैसे कई संस्थान मौजूद हैं। ऐसे माहौल में नया AI कैंपस छात्रों और शिक्षकों को बेहतर शोध और सहयोग का अवसर देगा।

 

पढ़ाई का नया तरीका

इस कैंपस की खास बात इसका पढ़ाई का तरीका होगा। यहां सिर्फ थ्योरी पर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा पर जोर रहेगा। छात्रों को अलग-अलग विषयों में AI का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। उदाहरण के लिए, कृषि क्षेत्र के छात्र फसल का अनुमान लगाने वाला AI मॉडल बना सकते हैं, वहीं कानून के छात्र केस विश्लेषण के लिए AI टूल विकसित कर सकते हैं।

 

पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी स्तर पर गहन शोध पर ध्यान दिया जाएगा। नए एल्गोरिद्म और बड़े भाषा मॉडल तैयार करने पर काम होगा, ताकि भारतीय जरूरतों के अनुसार स्वदेशी तकनीक विकसित की जा सके।

 

भविष्य की तैयारी

आज के दौर में AI तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ रही है। बीआईटीएस का यह नया कदम देश में तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे सकता है। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि भारत को AI क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाने में भी मदद मिलेगी।

 

कुल मिलाकर, अमरावती में बनने वाला यह AI प्लस कैंपस देश के शिक्षा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण जोड़ साबित हो सकता है। यदि योजना के अनुसार 2027 से दाखिले शुरू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में यहां से निकलने वाले छात्र तकनीक की दुनिया में नई मिसाल कायम कर सकते हैं।