भारत-फ्रांस की दोस्ती नई ऊँचाई पर, फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे में AI और 3.25 लाख करोड़ की रक्षा डील पर बड़ी चर्चा, जानिए विस्तार से

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार रात मुंबई पहुंचे। उनके साथ फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों भी इस तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा (17-19 फरवरी) पर भारत आई हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति बनने के बाद यह मैक्रों का चौथा भारत दौरा है, जो भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।


इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रणनीतिक साझेदारी और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच मुंबई के लोक भवन में अहम बैठक हुई, जहां दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की और एक-दूसरे को गले लगाया। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को और गहरा करना है।


रक्षा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी डील?
इस दौरे के दौरान करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की बड़ी रक्षा डील पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य खरीद माना जाएगा। प्रस्तावित समझौते के तहत भारत को 114 राफेल लड़ाकू विमान मिल सकते हैं।


भारत और फ्रांस पहले भी रक्षा क्षेत्र में साथ काम कर चुके हैं। राफेल विमानों की पिछली डील के बाद दोनों देशों के बीच भरोसा और मजबूत हुआ था। इस बार चर्चा सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त निर्माण (जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग) पर भी जोर है। हेलीकॉप्टर और HAMMER प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन की दिशा में भी बातचीत आगे बढ़ सकती है।


रक्षा के अलावा समुद्री सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीति, उभरती तकनीक और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझा सोच है और वे इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।

‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की शुरुआत
दोनों नेता शाम 5:15 बजे ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की औपचारिक शुरुआत भी करेंगे। इसका मकसद स्टार्टअप्स, रिसर्च, टेक्नोलॉजी और नई खोजों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाना है। इस मौके पर भारत और फ्रांस के उद्योगपति, शोधकर्ता, इनोवेटर और स्टार्टअप फाउंडर भी मौजूद रहेंगे।


भारत और फ्रांस के बीच 1998 से रणनीतिक साझेदारी है। तब से दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, तकनीक और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। मैक्रों का यह दौरा उसी साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


AI इम्पैक्ट समिट में दुनिया की नजर
मैक्रों की यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ आयोजित हो रही है। इस समिट में दुनिया भर के नेता, टेक कंपनियों के प्रमुख, शोधकर्ता और नीति निर्माता शामिल हो रहे हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए लिखा कि इस समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ है। इसका मतलब है – सबका भला और सबकी खुशी। यह थीम दिखाती है कि भारत AI को इंसानियत के हित में इस्तेमाल करना चाहता है।


समिट के दौरान प्रधानमंत्री ने जियो के AI पवेलियन का भी दौरा किया। यहां जियो द्वारा विकसित कई AI आधारित मॉडल और समाधान प्रदर्शित किए गए। इनमें जियो इंटेलिजेंस, जियो संस्कृति AI, जियो आरोग्य AI, जियो शिक्षा और जियो AI होम जैसे मॉडल शामिल थे। इनका उद्देश्य व्यापारिक निर्णयों को बेहतर बनाना, भारतीय भाषाओं और संस्कृति को डिजिटल रूप में सहेजना, स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाना, शिक्षा को बेहतर करना और स्मार्ट होम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।


रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने प्रधानमंत्री को कंपनी के AI इकोसिस्टम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


एक्सपर्ट्स की राय: नौकरी जाएगी या बढ़ेगी?
समिट में कई बड़े टेक लीडर्स और उद्योगपतियों ने AI के भविष्य पर अपने विचार रखे।
ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि अमेरिका के बाद भारत चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा यूजर बेस है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में भारत सबसे आगे है।


इंफो एज के फाउंडर संजीव बिखचंदानी का कहना है कि AI नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि काम करने की क्षमता बढ़ा रहा है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे AI टूल्स सीखें और अपनाएं, ताकि वे पीछे न रह जाएं।


सिस्को सिस्टम्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर हरीश कृष्णन ने कहा कि AI समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर बना रहा है।


HCL टेक्नोलॉजीज के पूर्व CEO विनीत नायर ने माना कि AI का असर करीब 50% नौकरियों पर पड़ेगा, लेकिन उतने ही नए अवसर भी पैदा होंगे।


माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंडोक ने कहा कि AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने का तरीका बदल देगा। उनके मुताबिक, एक नौकरी कई छोटे-छोटे कामों का समूह होती है। AI उन कामों को अलग-अलग कर देगा और काम को आसान बना देगा।


CII नेशनल AI फोरम के को-चेयरपर्सन तेजप्रीत चोपड़ा ने कहा कि AI अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन जैसे क्षेत्रों में इसका असर साफ दिख रहा है।


आम लोगों के लिए क्या खास?
AI इम्पैक्ट समिट सिर्फ बड़ी कंपनियों या नेताओं तक सीमित नहीं है। आम लोगों के लिए भी यहां कई खास चीजें हैं।


सबसे पहले, 70,000 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में एक मेगा AI एक्सपो लगाया गया है। इसमें 30 से अधिक देशों की 300 से ज्यादा कंपनियां अपने AI आधारित प्रोडक्ट और तकनीक दिखा रही हैं। यहां लोग देख सकते हैं कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है।


छात्रों और युवाओं के लिए ‘YUVAi’ और ‘AI for ALL’ जैसे प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को AI टूल्स के इस्तेमाल के लिए तैयार करना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई और करियर में इसका फायदा उठा सकें।


एक्सपो में ऐसे मॉडल भी दिखाए जा रहे हैं जो खेती में फसल की बीमारी पहचानने, अस्पतालों में इलाज को बेहतर बनाने और भाषा अनुवाद को आसान करने में मदद करते हैं।


स्टार्टअप्स को भी यहां बड़ा मंच मिला है। देश-विदेश के नए उद्यमी अपने प्रोडक्ट पेश कर रहे हैं और लोगों से सीधे बातचीत कर रहे हैं। एक्सपीरिएंस जोन में लोग AI पावर्ड मशीनों और सॉफ्टवेयर को खुद इस्तेमाल करके देख सकते हैं।


100 से ज्यादा देशों की भागीदारी
इस समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज्यादा मंत्री भी हिस्सा ले सकते हैं। टेक जगत के 40 से ज्यादा CEO इसमें मौजूद हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा संस के एन. चंद्रशेखरन, इंफोसिस के नंदन नीलेकणि, भारती एंटरप्राइजेज के सुनील भारती मित्तल, टीसीएस के CEO के. कृतिवासन और एचसीएल टेक की रोशनी नादर मल्होत्रा भी समिट में भाग ले रहे हैं।


पांच दिन का विस्तृत कार्यक्रम
समिट का कार्यक्रम पांच दिनों में बांटा गया है।
16 फरवरी को विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच राउंडटेबल चर्चा हुई। इसी दिन प्रधानमंत्री ने ‘इंडिया AI एक्सपो’ का उद्घाटन किया।
17 फरवरी को खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जेंडर सशक्तिकरण और दिव्यांगजनों की मदद जैसे विषयों पर खास फोकस रहा। सरकार ने इन क्षेत्रों में AI के उपयोग पर छह विशेष रिसर्च बुक्स लॉन्च कीं।


18 फरवरी को वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने अपनी नई रिसर्च प्रस्तुत की। टेक कंपनियों ने डेमो के जरिए अपनी तकनीक दिखाई।
19 फरवरी को प्रधानमंत्री आधिकारिक उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे। इसमें AI सेक्टर में निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर बड़े फैसले हो सकते हैं।


20 फरवरी को GPAI काउंसिल की बैठक होगी, जिसमें सदस्य देश AI को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर चर्चा करेंगे।


7 चक्र और 3 सूत्रों पर आधारित सोच
इस समिट की चर्चाओं को सात चक्रों में बांटा गया है – ह्यूमन कैपिटल, सामाजिक समावेश, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, इनोवेशन, साइंस, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास।


पूरी समिट तीन सूत्रों पर आधारित है – पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस।
पीपल का मतलब है कि AI का इस्तेमाल मानवीय विकास और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान के साथ हो।


प्लैनेट का उद्देश्य जिम्मेदारी के साथ इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
प्रोग्रेस का मतलब है कि AI को समावेशी विकास का इंजन बनाया जाए, ताकि सभी को बराबर अवसर मिल सकें।


भारत-फ्रांस संबंधों का नया अध्याय?
मैक्रों का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर रही है। ऐसे में भारत और फ्रांस की साझेदारी, खासकर रक्षा और AI जैसे क्षेत्रों में, दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है।


1998 से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। अगर रक्षा डील और AI सहयोग आगे बढ़ता है, तो यह न सिर्फ दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ा संदेश होगा।


अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस दौरे के अंत में कौन-कौन से बड़े ऐलान होते हैं और भारत-फ्रांस की दोस्ती किस नए मुकाम पर पहुंचती है।