भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करती दिख रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश की वास्तविक (रियल) जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में तेज सुधार के कारण देखने को मिल रही है, जहां उत्पादन वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष यह 4.5 प्रतिशत थी।
यह तेजी ऐसे समय में दर्ज की जा रही है जब भारतीय निर्यात को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद, घरेलू उत्पादन और सेवाओं की मजबूती ने समग्र आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है।
हालांकि, जहां वास्तविक जीडीपी में तेजी देखी जा रही है, वहीं नाममात्र (नॉमिनल) जीडीपी वृद्धि को लेकर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है। MoSPI के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि घटकर 8 प्रतिशत रहने वाली है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। तुलना करें तो 2024-25 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत थी।
बजट के लिए अहम होगा नाममात्र जीडीपी का आंकड़ा
नाममात्र जीडीपी का अनुमान केंद्र सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी के आधार पर कर संग्रह, राजकोषीय घाटा, और ऋण-जीडीपी अनुपात जैसे प्रमुख बजटीय लक्ष्य तय किए जाते हैं। वित्त मंत्रालय आगामी 2026-27 के केंद्रीय बजट की तैयारी में इसी पहले अग्रिम अनुमान का उपयोग करेगा।
आमतौर पर 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार, मौजूदा वर्ष के अग्रिम अनुमान के ऊपर अगले वर्ष के लिए एक अनुमानित नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर मानकर चलती है। इसी से यह तय होता है कि कर राजस्व में कितनी बढ़ोतरी संभव है।
महामारी वर्ष के बाद सबसे कम नाममात्र वृद्धि
भारत में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि इससे पहले इतनी कम 2020-21 में रही थी, जब कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में 1.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
रुपये के लिहाज से देखें तो 2025-26 में भारत की नॉमिनल जीडीपी 357 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यदि बुधवार को बंद हुए 89.89 रुपये प्रति डॉलर के विनिमय दर को आधार मानें, तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 3.97 ट्रिलियन डॉलर बैठता है, जो 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े से थोड़ा कम है।
नॉमिनल और रियल ग्रोथ के बीच अंतर सबसे कम
अर्थशास्त्री के अनुसार, 2025-26 में नॉमिनल और रियल जीडीपी वृद्धि के बीच का अंतर केवल 60 बेसिस पॉइंट रहेगा, जो 2011-12 के बाद सबसे कम है।
उनका मानना है कि अगले वित्त वर्ष 2026-27 में स्थिति बदल सकती है, जहां नॉमिनल वृद्धि फिर से अपनी दीर्घकालिक औसत के करीब 10.5–11 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि वास्तविक वृद्धि लगभग 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
बजटीय गणनाओं पर असर
पहला अग्रिम अनुमान बजट निर्माण की नींव होता है। उदाहरण के तौर पर, 2025-26 के बजट में सरकार ने 2024-25 के अग्रिम अनुमान के आधार पर 10.1 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि मानकर 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य तय किया था।
हालांकि, अब जबकि 2025-26 के लिए नॉमिनल वृद्धि केवल 8 प्रतिशत आंकी गई है, यह बजट अनुमान से कम है। फिर भी, रुपये में कुल जीडीपी लक्ष्य इसलिए पूरा हो पाया क्योंकि पिछले वर्ष के जीडीपी आंकड़ों में ऊपर की ओर संशोधन किया गया।
जल्द बदलेगा जीडीपी डेटा का आधार वर्ष
2025-26 का यह पहला अग्रिम अनुमान ज्यादा समय तक प्रासंगिक नहीं रहेगा। 27 फरवरी से MoSPI द्वारा जारी किए जाने वाले सभी नए जीडीपी आंकड़े नई श्रृंखला पर आधारित होंगे, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा। वर्तमान में इस्तेमाल हो रहा आधार वर्ष 2011-12 है।
नई श्रृंखला में न केवल आधार वर्ष बदलेगा, बल्कि डेटा स्रोतों का विस्तार, कार्यप्रणाली में सुधार, और अधिक सटीक आकलन भी शामिल होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नई पद्धति के कारण पुराने अनुमानों में संशोधन होना स्वाभाविक है और उपयोगकर्ताओं को इन बदलावों को ध्यान में रखकर आंकड़ों की व्याख्या करनी चाहिए।
27 फरवरी को अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के जीडीपी आंकड़े, 2025-26 का दूसरा अग्रिम अनुमान, और पिछले तीन वर्षों का जीडीपी डेटा नई श्रृंखला के तहत जारी किया जाएगा।
आगे भी होंगे संशोधन
वर्तमान श्रृंखला के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि 2022-23 में 7.6 प्रतिशत, 2023-24 में 9.2 प्रतिशत, और 2024-25 में 6.5 प्रतिशत रही है। 2025-26 की वृद्धि दर में आगे भी संशोधन होंगे और इसका अंतिम आंकड़ा फरवरी 2028 में सामने आएगा।
दूसरी छमाही में धीमी रफ्तार
पहला अग्रिम अनुमान यह संकेत देता है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गति कुछ कमजोर हो सकती है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 और जनवरी-मार्च 2026 तिमाहियों में औसत वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहली दो तिमाहियों की 7.8 और 8.2 प्रतिशत की दर से कम है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में पूरे वर्ष की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया है। आरबीआई के अनुसार, तीसरी तिमाही में वृद्धि 7 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत रह सकती है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी पहले 6.3-6.8 प्रतिशत की बात कही थी, लेकिन दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद उन्होंने संकेत दिया कि वार्षिक वृद्धि 7 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है।
क्षेत्रों के हिसाब से प्रदर्शन
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो विनिर्माण में तेज सुधार दिख रहा है, जबकि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 4.6 प्रतिशत थी।
निर्माण क्षेत्र में भी मजबूत गतिविधि बनी हुई है, हालांकि इसकी वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह सकती है।
सेवा क्षेत्र सबसे अधिक योगदान देता नजर आ रहा है, जहां 9.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। जीएसटी दरों में सितंबर से लागू कटौती, सेवाओं के निर्यात में मजबूती और नई-उम्र की सेवाओं की मांग इसमें सहायक कारक हैं।
मांग और निवेश का रुख
व्यय पक्ष से देखें तो निजी उपभोग की वृद्धि लगभग 7 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। वहीं, स्थिर पूंजी निर्माण, जो निवेश का संकेतक है, इसके 7.8 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।
सरकारी उपभोग व्यय, जो जीडीपी का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, इसमें उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल सकती है। 2025-26 में इसकी वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत आंकी गई है, जो पिछले वर्ष 2.3 प्रतिशत थी। इसमें राज्यों की बढ़ी हुई खर्च गतिविधि की अहम भूमिका मानी जा रही है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं और कमज़ोर नॉमिनल वृद्धि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और मजबूती दिखा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुधारों की गति बनी रहती है और नीतिगत समर्थन मिलता है, तो भारत आने वाले वर्षों में भी स्थिर विकास पथ पर बना रह सकता है।
