मार्च में ही 40°C के पार पहुंचा तापमान, कई राज्यों में लू जैसे हालात… क्या इस साल गर्मी जल्दी और ज्यादा पड़ेगी?

मार्च का महीना अभी आधा भी नहीं बीता है, लेकिन देश के कई हिस्सों में गर्मी ने तेजी से असर दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर और पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।


सोमवार को राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई शहरों में तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार मार्च के दूसरे सप्ताह में ही इतनी गर्मी दर्ज होना सामान्य से ज्यादा माना जा रहा है।


गर्मी की वजह से कई जगहों पर लोगों को लू जैसी तपिश का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर में तो स्थिति ऐसी हो गई कि तेज गर्मी के कारण एयरपोर्ट के रनवे का डामर तक पिघल गया, जिसके चलते दो फ्लाइट्स को भोपाल की ओर डायवर्ट करना पड़ा।


14 शहरों में 40 डिग्री से ऊपर पहुंचा तापमान
देश के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। सोमवार को राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कुल 14 शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।


इन शहरों में गुजरात के राजकोट, सुरेंद्रनगर, न्यू कांडला, अहमदाबाद, डीसा, केशोड, गांधीनगर, सूरत और अमरेली शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के अकोला और गुजरात के बरौडा, भुज और कांडला में भी तापमान 40 डिग्री के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया।
राजस्थान के बाड़मेर में भी पारा 40 डिग्री से अधिक रहा, जो प्रदेश का सबसे गर्म स्थान बना।


कुछ इलाकों में लू चलने लगी
गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है। कई क्षेत्रों में लू जैसे हालात बनने लगे हैं।हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं। इन हवाओं के कारण लोगों को दिन के समय काफी परेशानी हो रही है।
मौसम विभाग का कहना है कि देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 से 12 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है। यह संकेत देता है कि इस साल गर्मी जल्दी शुरू हो गई है।


इंदौर एयरपोर्ट का रनवे पिघला
मध्य प्रदेश के इंदौर में तेज गर्मी का असर बुनियादी ढांचे पर भी देखने को मिला। यहां एयरपोर्ट के रनवे पर लगा डामर गर्मी के कारण पिघल गया।
इस वजह से दो फ्लाइट्स को इंदौर की जगह भोपाल की ओर मोड़ना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी जल्दी इतनी तेज गर्मी पड़ना असामान्य माना जाता है।

India heatwave March 2026

गर्मी बढ़ने की वजह क्या है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार तापमान तेजी से बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।
सबसे बड़ा कारण यह है कि फरवरी के महीने में उत्तर और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ कम सक्रिय रहे। पश्चिमी विक्षोभ के कम होने से बादल और बारिश कम हुई।


जब बादल कम होते हैं तो सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचती हैं। इससे जमीन तेजी से गर्म होती है और आसपास की हवा भी गर्म होने लगती है।


इसके अलावा पश्चिम और मध्य भारत के ऊपर एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बना हुआ है। इस स्थिति में हवा नीचे की ओर दबती है, जिससे बादल बनने की संभावना कम हो जाती है। परिणामस्वरूप आसमान साफ रहता है और गर्मी बढ़ती जाती है।


तेज सोलर रेडिएशन का असर
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सूर्य की किरणें ज्यादा तीव्र हो रही हैं। साफ आसमान होने के कारण सोलर रेडिएशन सीधे जमीन तक पहुंच रहा है।


जमीन तेजी से गर्म हो रही है और उसी के कारण आसपास का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। राजस्थान की तरफ से आ रही गर्म और सूखी हवाएं भी तापमान बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं।


अगले कुछ दिनों में और बढ़ सकती है गर्मी
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।


राजस्थान में जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के जिलों में हीटवेव का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने बताया है कि अगले एक सप्ताह में तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।


दूसरी ओर कई राज्यों में बारिश का अलर्ट
जहां एक तरफ पश्चिम और उत्तर भारत में गर्मी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर देश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना भी जताई गई है।


मंगलवार को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और केरल में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।


नगालैंड के कोहिमा, दीमापुर, सेमिन्यू और वोखा जैसे क्षेत्रों में सोमवार को करीब 40 मिनट तक बारिश और ओलावृष्टि हुई।


पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार एक नया पश्चिमी विक्षोभ मंगलवार को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में पहुंच सकता है।
इसके प्रभाव से 13 से 15 मार्च के बीच उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है।
इस सिस्टम के असर से उत्तर-पश्चिमी राज्यों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।


अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल
देश के कई राज्यों में मौसम की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है।


मध्य प्रदेश
यहां तापमान सामान्य से करीब 4.63 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर जैसे शहरों में दिन के समय लू जैसी गर्मी महसूस की जा रही है। हालांकि सुबह और रात के समय हल्की ठंडक बनी रहती है।


उत्तर प्रदेश
राज्य में पहली बार इस मौसम में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। वहीं लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई शहरों में सुबह के समय धुंध भी देखी गई। मौसम विभाग ने पूर्वी यूपी में हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है।


बिहार
बिहार के करीब 20 जिलों में बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। अगले 24 घंटे में तेज हवाएं भी चल सकती हैं जिनकी गति लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।


झारखंड
राज्य के कई जिलों में बादल छाए हुए हैं और कुछ स्थानों पर बारिश भी हुई है। बोकारो में सबसे ज्यादा 24 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि धनबाद में करीब 10 से 11 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।


हरियाणा
हरियाणा के कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। महेंद्रगढ़ में सबसे ज्यादा 36.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।


छत्तीसगढ़
राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री ज्यादा चल रहा है। अगले चार दिनों तक मौसम में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है।


हिमाचल प्रदेश
यहां कुछ क्षेत्रों में हीटवेव जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से 11 से 14 मार्च के बीच बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।


उत्तराखंड
राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना है, जबकि कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।


कब घोषित होती है हीटवेव?
भारत में हीटवेव घोषित करने के लिए मौसम विभाग ने कुछ मानक तय किए हैं।
मैदानी क्षेत्रों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है और सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा होता है, तब इसे हीटवेव की स्थिति माना जाता है।


अगर किसी स्थान पर तापमान 45 डिग्री या उससे ज्यादा पहुंच जाए तो वहां भी हीटवेव घोषित की जा सकती है।


हीटवेव बनने की परिस्थितियां
हीटवेव बनने के लिए कुछ विशेष परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं।
सबसे पहले किसी क्षेत्र में गर्म और सूखी हवा का प्रवाह होना चाहिए। इसके साथ ही वातावरण के ऊपरी हिस्से में नमी कम होनी चाहिए।


अगर आसमान साफ हो और बादल न हों तो सूर्य की गर्मी सीधे जमीन तक पहुंचती है। इसके अलावा एंटी-साइक्लोनिक हवाओं की स्थिति भी गर्मी बढ़ाने में योगदान देती है।


हीट इंडेक्स क्या होता है?
मौसम विभाग ने हीट इंडेक्स नाम का एक पैमाना भी तैयार किया है।
इसमें तापमान और हवा में मौजूद नमी को मिलाकर यह बताया जाता है कि इंसान को वास्तव में कितनी गर्मी महसूस हो रही है।


कई बार तापमान कम होने के बावजूद नमी ज्यादा होने से लोगों को ज्यादा गर्मी महसूस होती है। हीट इंडेक्स इसी स्थिति को समझने में मदद करता है।


जून में अलनीनो आने की आशंका
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल जलवायु से जुड़े बड़े बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।
अभी ला-नीना की स्थिति कमजोर हो रही है। अगले तीन महीनों तक एनसो न्यूट्रल स्थिति रहने की संभावना है, यानी न ला-नीना और न ही अलनीनो।लेकिन अमेरिकी मौसम एजेंसी नोआ के अनुसार जून के आसपास अलनीनो की स्थिति बन सकती है।


अलनीनो का असर क्या होता है?
अगर अलनीनो सक्रिय हो जाता है तो इसका असर भारत के मौसम पर भी पड़ सकता है।
अलनीनो के समय तापमान सामान्य से ज्यादा होता है और बारिश कम होती है। इससे गर्मी लंबी खिंच सकती है और मानसून भी कमजोर पड़ सकता है।


इसके उलट ला-नीना के समय आमतौर पर सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होती है और तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।


क्या इस साल गर्मी लंबी चलेगी?
मार्च की शुरुआत में ही जिस तरह से तापमान तेजी से बढ़ा है, उसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
अगर आने वाले महीनों में अलनीनो सक्रिय हो जाता है और बारिश कम होती है, तो गर्मी का असर और ज्यादा महसूस हो सकता है।