PM मोदी का ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ और अंबानी का 10 लाख करोड़ का निवेश, क्या बदलने वाला है भारत का टेक भविष्य?

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी 2026 तक चल रहे ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ का चौथा दिन बेहद अहम रहा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर नया सुझाव दिया, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत को “इंटेलिजेंस युग” में आगे ले जाने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश का बड़ा ऐलान किया।


समिट में भारत समेत 110 से ज्यादा देशों की भागीदारी रही। करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 45 से अधिक मंत्री, लगभग 100 सीईओ और स्टार्टअप फाउंडर इस आयोजन में शामिल हुए। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनAI के सैम ऑल्टमैन, माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े बिल गेट्स, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे वैश्विक चेहरे भी मंच पर दिखे। यह पहली बार है जब किसी विकासशील देश में इस स्तर का AI समिट आयोजित हुआ।


पीएम मोदी का ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में AI के सुरक्षित उपयोग पर खास जोर दिया। उन्होंने एक आसान उदाहरण देकर समझाया कि जैसे खाने के पैकेट पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, उसी तरह डिजिटल कंटेंट पर भी साफ-साफ ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ होना चाहिए। इससे लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी सामग्री असली है और कौन-सी AI द्वारा बनाई गई है।


आज के समय में वीडियो, फोटो और टेक्स्ट को AI से आसानी से बदला जा सकता है। ऐसे में सही और गलत के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। पीएम का मानना है कि अगर कंटेंट पर स्पष्ट जानकारी दी जाए, तो फर्जी सूचना और भ्रम को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डर नहीं, भविष्य का मौका

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में AI को लेकर डर का माहौल है, लेकिन भारत इसे अवसर के रूप में देखता है। उनके अनुसार, AI भारत की विकास यात्रा का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है। उन्होंने साफ किया कि तकनीक को रोकने के बजाय उसे सही दिशा देना जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि भारत का नजरिया यह है कि AI सिर्फ ताकत या नियंत्रण का साधन नहीं, बल्कि सेवा और मानव कल्याण का माध्यम होना चाहिए। यूपीआई और कोविन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

 

M.A.N.A.V विजन: AI के लिए नया ढांचा

प्रधानमंत्री मोदी ने AI के लिए एक वैश्विक सोच भी रखी, जिसे उन्होंने M.A.N.A.V नाम दिया। इसका मतलब है –

  • Moral (नैतिक)
  • Accountable (जवाबदेह)
  • National Sovereignty (संप्रभुता का सम्मान)
  • Accessible (सभी के लिए सुलभ)
  • Valid (वैध और भरोसेमंद)

उनका कहना था कि AI को सिर्फ डेटा और एल्गोरिदम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह मानवता के हित में काम करे। इसके लिए साफ नियम, पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है।

 

‘ब्लैक बॉक्स’ नहीं, ‘ग्लास बॉक्स’ सोच

प्रधानमंत्री ने AI प्लेटफॉर्म को ‘ब्लैक बॉक्स’ के बजाय ‘ग्लास बॉक्स’ बनाने की बात कही। ‘ब्लैक बॉक्स’ का मतलब है कि अंदर क्या हो रहा है, यह किसी को पता न चले। वहीं ‘ग्लास बॉक्स’ का मतलब है कि नियम और सुरक्षा व्यवस्था इतनी साफ हो कि कोई भी उन्हें देख और समझ सके।

 

उन्होंने डेटा की गुणवत्ता पर भी जोर दिया और कहा कि अगर ट्रेनिंग डेटा गलत होगा तो नतीजे भी गलत आएंगे। इसलिए उन्होंने डेटा सुरक्षा और वैश्विक भरोसेमंद ढांचे की जरूरत बताई।

 

भारत का AI मिशन और GPU क्षमता

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत AI के क्षेत्र में अपनी ताकत तेजी से बढ़ा रहा है। इस समय देश में 38,000 GPUs उपलब्ध हैं और अगले छह महीनों में 24,000 और जोड़े जाएंगे। इससे AI रिसर्च, स्टार्टअप और इंडस्ट्री को बड़ी मदद मिलेगी।

 

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने ‘स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स’ (SML) पर ध्यान देने का फैसला किया है। ये ऐसे मॉडल हैं जो खास काम के लिए बनाए जाते हैं और स्मार्टफोन जैसे उपकरणों पर भी चल सकते हैं। इससे AI का लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा।

 

अंबानी का बड़ा दांव  –  10 लाख करोड़ रुपए का एलान

रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने समिट में एक बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि रिलायंस अगले 7 सालों में AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी। यह रकम सुनकर हर कोई चौंक गया।

 

अंबानी ने AI की तुलना महाभारत के ‘अक्षय पात्र’ से की  –  यानी एक ऐसा बर्तन जो कभी खाली नहीं होता। उनका कहना था कि AI जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतने ज्यादा मौके बनेंगे, नौकरियां नहीं जाएंगी बल्कि नई और बेहतर नौकरियां पैदा होंगी।

 

उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के जामनगर में एक बड़ा AI डेटा सेंटर बनाया जा रहा है। साल 2026 के दूसरे हिस्से तक इसकी 120 मेगावाट से ज्यादा की क्षमता चालू हो जाएगी।

 

टाटा और OpenAI का साथ  –  देश का पहला AI डेटा सेंटर

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा ग्रुप भारत का पहला बड़ा AI-केंद्रित डेटा सेंटर बना रहा है। इस काम के लिए टाटा ने OpenAI के साथ हाथ मिलाया है। पहले चरण में 100 मेगावाट की क्षमता बनाई जाएगी और आगे चलकर इसे एक गीगावाट तक बढ़ाया जाएगा।

 

सुंदर पिचाई बोले  –  अरबों लोगों की जिंदगी बदलेगी

गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने कहा कि गूगल भारत में 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.35 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है। इसके तहत एक बड़ा AI हब बनाया जाएगा जहां गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग ताकत होगी।

 

पिचाई ने कहा कि AI को सिर्फ बड़े शहरों या बड़े लोगों तक सीमित नहीं रखना है। जहां अब तक टेक्नोलॉजी नहीं पहुंची, वहां भी इसे ले जाना होगा। उनका मानना है कि AI अरबों लोगों की जिंदगी को बेहतर बना सकता है।

 

फ्रांस के मैक्रों ने भारत की तारीफ की

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि जो काम भारत ने किया है, वो दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया। 1.4 अरब लोगों को डिजिटल पहचान देना, हर महीने 20 अरब से ज्यादा लेन-देन प्रोसेस करने वाला UPI जैसा पेमेंट सिस्टम बनाना और 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को डिजिटल हेल्थ आईडी देना  –  ये सब बेहद बड़े काम हैं।

 

मैक्रों ने यह भी कहा कि भारत ने एक समझदारी भरा फैसला किया है। उसने बड़े और भारी AI मॉडल की जगह छोटे और काम के अनुसार बने ‘स्मॉल लैंग्वेज मॉडल’ को चुना जो साधारण स्मार्टफोन पर भी चल सकते हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र बोला  –  सिर्फ कुछ देश तय नहीं करेंगे AI का भविष्य

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ कहा कि AI की दिशा और नियम सिर्फ मुट्ठी भर देश नहीं तय करेंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिए 40 बड़े विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया गया है।

 

गुटेरेस ने यह भी कहा कि वो विकासशील देशों में AI की बुनियाद मजबूत करने के लिए एक ‘ग्लोबल AI फंड’ बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि AI को लेकर जो डर और अतिरंजना फैली है, उसे दूर करके असली जानकारी लोगों तक पहुंचानी होगी।

 

Anthropic के CEO बोले  –  कुछ AI मॉडल इंसानी दिमाग से भी आगे निकल गए

Anthropic कंपनी के CEO डारियो अमोदेई ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल में AI की रफ्तार हैरान करने वाली रही है। पिछले 10 साल से AI की ग्रोथ तेजी से हो रही है और अब हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां कुछ AI मॉडल ज्यादातर इंसानों से ज्यादा तेज और सटीक तरीके से सोच सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि इसके साथ बड़े मौके भी हैं और बड़ी जिम्मेदारियां भी। AI में यह ताकत है कि वो दुनिया भर से गरीबी और बीमारियां खत्म करने में मदद कर सके।

 

यह समिट इतनी खास क्यों है?

यह पहली बार हो रहा है जब इस तरह की AI समिट किसी विकासशील देश में हो रही है। इससे पहले यह समिट ब्रिटेन (2023), साउथ कोरिया (2024) और फ्रांस (2025) में हुई थी। लेकिन इस बार भारत ने इसकी मेजबानी की और थीम रखी  –  ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ यानी सबका भला, सबकी खुशी।

 

समिट में 300 से ज्यादा कंपनियों ने अपनी AI तकनीक और गैजेट दिखाए। खेती, पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में AI कैसे काम आएगी, यह आम लोग भी देख सके।

समिट 20 फरवरी तक चलेगी और आज पीएम मोदी ने 20 देशों के नेताओं के साथ एक गोलमेज बैठक भी की।

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