अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी कटौती का एलान किया है। यह निर्णय दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बातचीत का सीधा परिणाम है।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाया गया शुल्क अब महज 18 प्रतिशत रह गया है, जो पहले 50 प्रतिशत के स्तर पर था। यह गिरावट एक ही झटके में 32 प्रतिशत अंकों की है, जो व्यापारिक इतिहास में एक असाधारण घटना मानी जा रही है।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने न्यूज एजेंसी ANI को स्पष्ट किया कि रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर जो 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया गया था, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इस तरह अब सिर्फ 18 प्रतिशत का मूल आयात शुल्क ही भारतीय निर्यातकों को चुकाना होगा।
दोनों नेताओं के बीच क्या हुई बातचीत?
सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच टेलीफोन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। शाम करीब साढ़े दस बजे ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की।
ट्रम्प के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री रूसी तेल की आपूर्ति बंद करने और इसकी जगह अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाने के लिए तैयार हो गए हैं। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर भारत वेनेजुएला को भी तेल आपूर्ति का विकल्प मान सकता है।
‘बाय अमेरिकन’ पहल के तहत विशाल खरीद
इस व्यापारिक सौदे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों की खरीद के लिए 500 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 46 लाख करोड़ रुपए बैठती है। यह खरीद ‘बाय अमेरिकन’ नीति के अंतर्गत की जाएगी।
इस विशाल खरीद में ऊर्जा क्षेत्र, तकनीकी उपकरण, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य आवश्यक सामान शामिल होंगे। यह कदम दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
इस घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने देश की 140 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रम्प का आभार प्रकट किया।
मोदी ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रपति से बातचीत अत्यंत सकारात्मक और संतोषजनक रही। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि भारतीय उत्पादों पर शुल्क को 18 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर बताया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश एकजुट होकर काम करते हैं, तो इससे दोनों देशों की जनता को फायदा होता है और सहयोग के नए अवसर खुलते हैं।
ट्रम्प के सोशल मीडिया पोस्ट की मुख्य बातें
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने विस्तृत संदेश में कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री से बातचीत करना उनके लिए सम्मान का विषय था। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
ट्रम्प के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल पर निर्भरता समाप्त करने की सहमति दी है। अब भारत अमेरिका से अधिक मात्रा में तेल खरीदेगा। इसके अतिरिक्त वेनेजुएला से भी तेल आयात की संभावना तलाशी जाएगी। ट्रम्प का मानना है कि यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में सहायक होगा, जहां प्रत्येक सप्ताह हजारों लोग मारे जा रहे हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मित्रता और सम्मान के कारण यह व्यापारिक समझौता संभव हो पाया। इसके अंतर्गत अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। वहीं भारत भी अमेरिकी सामानों पर लगने वाले शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को धीरे-धीरे शून्य की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कब क्या हुआ – एक नज़र में
तारीख | क्या हुआ |
2 अप्रैल 2025 | अमेरिका ने भारत पर 10% बेसलाइन टैरिफ लगाया। |
5 अप्रैल 2025 | ट्रम्प ने 26% टैरिफ का ऐलान किया। |
9 अप्रैल 2025 | अमेरिका ने 90 दिनों के लिए टैरिफ रोका। |
10 जुलाई 2025 | भारत ने WTO में ₹32,000 करोड़ की जवाबी ड्यूटी प्रस्तावित। |
31 जुलाई 2025 | अमेरिका ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान। |
1 अगस्त 2025 | भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लागू। |
6 अगस्त 2025 | रूसी तेल खरीदने की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ। |
27 अगस्त 2025 | भारत पर कुल 50% टैरिफ लागू। |
2 फरवरी 2026 | अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18% किया। |
अमेरिकी राजदूत का बयान
भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने NDTV से बातचीत में इस व्यापारिक समझौते की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कुछ तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं, लेकिन समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है।
राजदूत गोर ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच वर्षों से चली आ रही मजबूत दोस्ती को दिया। उन्होंने कहा कि यह शुल्क दर अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। पहले भारत पर बहुत अधिक टैरिफ लगता था, लेकिन अब भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्हें न्यूनतम शुल्क का लाभ मिल रहा है।
गोर के अनुसार, दोनों नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता इस समझौते को संभव बनाने में सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों में अपार संभावनाएं हैं और यह व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्तों के नए दौर की शुरुआत करेगा।
दुनिया भर में टैरिफ की तुलना
देश | टैरिफ दर |
भारत | 18% |
पाकिस्तान | 19% |
इंडोनेशिया | 19% |
बांग्लादेश | 20% |
वियतनाम | 20% |
फिलीपींस | 21% |
मलेशिया | 22% |
थाईलैंड | 23% |
साउथ कोरिया | 25% |
यूरोपीय संघ | 15% |
जापान | 15% |
चीन | 34% |
साउथ अफ्रीका | 30% |
रूस | 50% |
ब्राजील | 50% |
ट्रम्प की भारत प्रेम की झलक
दिलचस्प बात यह है कि मोदी से बातचीत से पहले ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पर भारत से संबंधित दो तस्वीरें साझा की थीं। पहली तस्वीर में दिल्ली का प्रसिद्ध इंडिया गेट था, जबकि दूसरी में एक भारतीय पत्रिका का कवर था जिस पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ ट्रम्प की तस्वीर छपी थी।
इंडिया गेट की तस्वीर के साथ ट्रम्प ने लिखा कि भारत का यह विजय द्वार बेहद सुंदर है, लेकिन उनका बनने वाला स्मारक सबसे शानदार होगा। दरअसल ट्रम्प वाशिंगटन डीसी में ‘आर्क डी ट्रम्प’ नाम से एक विशाल द्वार बनवाने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह स्मारक वर्जीनिया से राजधानी में प्रवेश का प्रतीक होगा और इसका डिजाइन पेरिस के प्रसिद्ध आर्क डी ट्रायम्फ से प्रेरित है।
दोनों नेताओं की बातचीत का इतिहास
पिछले 13 महीनों में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प ने सात बार टेलीफोन पर वार्ता की है। यह नियमित संवाद दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है।
सबसे पहली बातचीत 27 जनवरी 2025 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने पर बधाई दी थी। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ट्रम्प ने मोदी को फोन कर संवेदना व्यक्त की थी।
17 जून को ट्रम्प ने मोदी से नोबेल पुरस्कार के लिए उन्हें नामांकित करने का अनुरोध किया था। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर बधाई देने और 21 अक्टूबर को दिवाली की शुभकामनाएं देने के लिए भी ट्रम्प ने फोन किया था। 11 दिसंबर को पिछली बार दोनों नेताओं ने बातचीत की थी, जो बेहद सकारात्मक और गर्मजोशी भरी रही थी।
वेनेजुएला तेल का विकल्प
ट्रम्प ने 1 फरवरी को ही संकेत दिया था कि भारत ईरानी तेल की जगह वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगा। उन्होंने दावा किया था कि भारत ने वेनेजुएला के साथ तेल खरीद का सौदा कर लिया है।
यह बयान ट्रम्प ने वाशिंगटन डीसी से एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया था। 2 फरवरी को उन्होंने कहा कि समझौते की रूपरेखा तय हो चुकी है और भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा, ईरान से नहीं। ट्रम्प ने यह भी कहा कि चीन भी चाहे तो वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है।
निष्कर्ष:
यह व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है और अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। वहीं अमेरिका को भारत से भारी मात्रा में उत्पाद खरीद का आश्वासन मिला है। दोनों नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता और राजनयिक कौशल ने इस जटिल व्यापारिक गुत्थी को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समझौता आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
