हाल ही में, भारतीय सेना ने 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता का वर्ष” घोषित किया है, जो उन्नत डिजिटल एकीकरण की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य कनेक्टिविटी को मजबूत करना और भविष्य की चुनौतियों का सटीक और कुशलता से सामना करने के लिए चुस्त सेना तैयार करना है।
भारतीय सेना की 2026 की रणनीतिक रूपरेखा
- भारतीय सेना ने वर्ष 2026 को औपचारिक रूप से “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष” घोषित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सेना की कनेक्टिविटी, रियल-टाइम निर्णय क्षमता और युद्ध प्रभावशीलता को नए स्तर तक ले जाना है। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि सही समय पर सही जानकारी से जीते जाते हैं। इसी सोच के साथ सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बना रही है।
- यह पहल भारतीय सेना की व्यापक योजना “Decade of Transformation (2023–2032)” का एक केंद्रीय हिस्सा है। इस दशक का लक्ष्य सेना का पूर्ण आधुनिकीकरण करना और उभरते सुरक्षा खतरों के अनुरूप ढालना है। नेटवर्किंग और डेटा आधारित संचालन को सेना ने परिवर्तन की नींव माना है, क्योंकि आने वाले वर्षों में युद्ध का स्वरूप और अधिक तकनीक-आधारित होने वाला है।
- भारतीय सेना अब अलग-अलग और स्वतंत्र प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत सिस्टम आधारित संचालन की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका अर्थ है कि युद्ध क्षेत्र से जुड़ा हर डेटा सुरक्षित तरीके से और तेज गति से सभी संबंधित इकाइयों तक पहुँचे। डेटा का निर्बाध प्रवाह ही आधुनिक सैन्य अभियानों की रीढ़ बन चुका है।
- 2026 की रणनीति के तहत सेना सुरक्षित संचार नेटवर्क, एकीकृत डेटा सिस्टम और उन्नत डिजिटल टूल्स के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। इन व्यवस्थाओं से कमांडरों को युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय की तस्वीर मिलेगी। इससे स्थिति की समझ बेहतर होगी और प्रतिक्रिया क्षमता तेज होगी। यह बदलाव खास तौर पर अग्रिम मोर्चों पर तैनात इकाइयों के लिए निर्णायक साबित होगा।
- इस रोडमैप का एक महत्वपूर्ण पहलू है तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता (Jointness) को मजबूत करना। साझा डेटा नेटवर्क के माध्यम से थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय आसान होगा। यह पहल इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड की अवधारणा के अनुरूप है, जिस पर 2020 के बाद से काम चल रहा है। बेहतर तालमेल से मल्टी-डोमेन वारफेयर में भारत की सैन्य क्षमता और प्रभावी होगी।
- 2026 का यह फोकस आगे आने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकों के समावेशन की नींव है। 2027 और उसके बाद सेना इन तकनीकों का उपयोग कर विशाल युद्ध डेटा का विश्लेषण, पैटर्न पहचान और पूर्वानुमान आधारित निर्णय प्रणाली विकसित करेगी। इससे कमांड स्तर पर निर्णय और अधिक सटीक और तेज होंगे।
Decade of Transformation की चरणबद्ध योजना
भारतीय सेना की Decade of Transformation योजना को तीन स्पष्ट चरणों में बाँटा गया है। हर चरण का लक्ष्य अलग है, लेकिन दिशा एक ही है—पूर्ण नेटवर्क-केंद्रित सेना का निर्माण। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण परिवर्तन को व्यावहारिक और टिकाऊ बनाता है।
- अल्पकालिक चरण, जो मुख्य रूप से 2026 पर केंद्रित है, में सेना रियल-टाइम युद्धक्षेत्र जागरूकता, यूनिट्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और तेज निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है। इस चरण में तकनीकी आधार मजबूत किया जा रहा है, ताकि आगे की उन्नत प्रणालियाँ प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
- मध्यम अवधि (2027–2029) में सेना अपने मुख्य सैन्य सिस्टम में AI, ML और ऑटोमेशन को शामिल करेगी। इससे निगरानी, लॉजिस्टिक्स, इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल प्लानिंग अधिक स्मार्ट और कुशल होगी। यह चरण मानव और मशीन के बेहतर समन्वय की दिशा में अहम कदम होगा।
- दीर्घकालिक योजना 2030 और उसके आगे तक फैली है। इस चरण में भारतीय सेना पूर्ण नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखती है। इसका अर्थ है एक ऐसा कॉमन ऑपरेशनल नेटवर्क, जो सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं को एक साथ जोड़कर भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊँचाई तक ले जाए।
भारतीय सेना का 2026 परिवर्तन अभियान: नेटवर्क आधारित प्रणालियाँ और डेटा-संचालित युद्ध क्षमता
- बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम (BSS) सेना की नेटवर्क आधारित निगरानी क्षमता की रीढ़ है। यह प्रणाली सीमा क्षेत्रों में फैले रडार, उपग्रह, ड्रोन और जमीनी सेंसरों से प्राप्त सूचनाओं को एक साथ जोड़ती है। इससे कमांडरों को एक एकीकृत ऑपरेशनल इमेज मिलती है। इस सिस्टम को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के सहयोग से विकसित किया गया है और इसे चरणबद्ध तरीके से सैन्य इकाइयों में शामिल किया जा रहा है।
- टैक्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (TCS) सेना की संचार क्षमता में बड़ा बदलाव लाने वाला उपकरण है। वर्ष 2025 के अंत में इसका नया प्रोटोटाइप सामने आया। यह सिस्टम दुर्गम इलाकों में भी सुरक्षित और निरंतर आवाज़ व डेटा संचार सुनिश्चित करता है। आधुनिक सॉफ्टवेयर-डिफाइंड नेटवर्क पर आधारित यह प्रणाली पुराने रेडियो सिस्टम का स्थान ले रही है और हस्तक्षेप-रोधी संचार उपलब्ध कराती है।
- SAMBHAV एक स्वदेशी सुरक्षित मोबाइल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर 2025 के दौरान किया गया। यह 5G अवसंरचना पर आधारित है और इसमें मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन शामिल है। इस प्रणाली के माध्यम से सुरक्षित संदेश, कॉल और फाइल साझा की जा सकती है, बिना किसी व्यावसायिक ऐप पर निर्भर हुए। इससे संवेदनशील सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा और मजबूत होती है।
- इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) दुश्मन ड्रोन खतरों से निपटने की प्रमुख प्रणाली है। इसे पहली बार मार्च 2024 में सेना में शामिल किया गया। यह सिस्टम रडार, सेंसर और स्वचालित नियंत्रण तकनीक के माध्यम से शत्रु ड्रोन की पहचान और निष्क्रियकरण करता है। भविष्य में इसके और उन्नत संस्करण शामिल किए जाने की योजना है।
- प्रोजेक्ट ई-सिट्रेप (E-Sitrep) एक GIS आधारित सिचुएशनल रिपोर्टिंग सिस्टम है। यह कमांडरों को वास्तविक समय में मानचित्र पर युद्धक्षेत्र की स्थिति देखने की सुविधा देता है। इसकी शुरुआत जून 2023 में नॉर्दर्न कमांड से हुई और अब अन्य कमांड भी इससे जुड़ रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर को मजबूत करता है।
- भारतीय सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरणों का तेजी से विस्तार कर रही है। ये सिस्टम टेक्स्ट सारांश, असामान्यता पहचान, वॉइस-टू-टेक्स्ट और डेटा फ्यूजन जैसे कार्य करते हैं। AI की मदद से महत्वपूर्ण जानकारी को प्राथमिकता मिलती है। इससे निर्णय प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होता है और कमांड स्तर पर स्पष्टता बढ़ती है।
- Samyukta, Himshakti जैसे स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम नेटवर्क सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। ये सिस्टम दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों की पहचान और प्रतिरोध में सक्षम हैं। विवादित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वातावरण में भी ये उपकरण सुरक्षित सैन्य संचालन सुनिश्चित करते हैं।
- SAKSHAM काउंटर-ड्रोन ग्रिड जैसी प्रणालियाँ 3,000 मीटर तक की ऊँचाई पर शत्रु ड्रोन की पहचान और निष्क्रियकरण कर सकती हैं। यह प्रणाली वास्तविक समय में खतरे की जानकारी नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम से जोड़ती है। इससे टैक्टिकल एयरस्पेस सुरक्षा और मजबूत होती है।
- भारतीय सेना अपने लिए कैप्टिव डेटा सेंटर और यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। इन केंद्रों में सुरक्षित डेटा भंडारण, तेज़ एक्सेस और फ्रंटलाइन से वरिष्ठ कमांडरों तक निर्बाध सूचना प्रवाह संभव होगा। यह ढाँचा नेटवर्क आधारित युद्ध की आधारशिला है।
- पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट जैसे उच्च-सटीकता हथियार, जिनका परीक्षण दिसंबर 2025 में हुआ, अब नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम से जुड़े हैं। वास्तविक समय के डेटा के आधार पर ये हथियार सटीक लक्ष्यभेदन में सक्षम हैं। इससे सेना की स्ट्राइक क्षमता और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ती है।
भारत की रक्षा क्षमता के लिए 2026 सैन्य रोडमैप का महत्व
- वर्ष 2026 के लिए भारतीय सेना की रणनीति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को एक नई मजबूती प्रदान करती है। सेना को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली की ओर ले जाना आधुनिक संघर्षों की वास्तविक आवश्यकता है। आज के युद्ध में गति, सूचना पर नियंत्रण और समन्वय निर्णायक तत्व बन चुके हैं। सेंसर, सैनिक इकाइयों और कमांड सेंटरों के बीच सुरक्षित और तेज डेटा प्रवाह से संकट के समय प्रतिक्रिया में देरी घटेगी। इससे सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा दोनों स्तरों पर भारत की स्थिति अधिक मजबूत होगी।
- इस रोडमैप का एक प्रमुख लाभ तेज़ और सटीक सैन्य निर्णय है। डेटा आधारित प्रणालियाँ कमांडरों को वास्तविक समय की युद्धक्षेत्र जानकारी उपलब्ध कराती हैं। अब निर्णय केवल रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि लाइव इनपुट पर आधारित होंगे। इससे अनिश्चितता कम होगी और अभियान की सफलता की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, सटीक जानकारी के कारण अनावश्यक क्षति को भी रोका जा सकेगा, जो आधुनिक युद्ध में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह रोडमैप थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त अभियानों को मजबूती देता है। साझा डेटा नेटवर्क के माध्यम से कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर तैयार होती है। इससे हवाई सहायता, समुद्री सुरक्षा और सीमा संचालन जैसे संयुक्त मिशनों में बेहतर समन्वय संभव होता है। वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति के बाद से संयुक्तता राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी है। 2026 की यह पहल उसी दिशा में ठोस कदम है।
- यह सैन्य परिवर्तन आत्मनिर्भर भारत के रक्षा दृष्टिकोण के अनुरूप है। सेना स्वदेशी संचार प्रणालियों, सेंसर, डेटा प्लेटफॉर्म और साइबर उपकरणों को प्राथमिकता दे रही है। इससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी। युद्ध या संकट के समय आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा बनी रहेगी। घरेलू रक्षा उद्योग को भी इससे नई ऊर्जा और अवसर मिलेंगे।
- आगामी वर्षों में खतरे केवल पारंपरिक नहीं रहेंगे। साइबर हमले, ड्रोन झुंड, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सूचना युद्ध नई चुनौती बन चुके हैं। 2026 का रोडमैप इन सभी पहलुओं को सीधे संबोधित करता है। सुरक्षित नेटवर्क और संरक्षित डेटा प्रणालियाँ साइबर घुसपैठ की आशंका को कम करती हैं। इससे भारत ग्रे-जोन संघर्ष और हाइब्रिड युद्ध जैसे जटिल परिदृश्यों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनेगा।
