क्या मिडिल ईस्ट की जंग से फंसे भारतीय सुरक्षित लौट पाएंगे, क्या हालात और बिगड़ सकते हैं?

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत पर भी साफ दिखने लगा है। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए खास कदम उठाए हैं। Ministry of External Affairs (India) ने एक स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया है और अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।

खाड़ी देशों से लौट रहे भारतीय

मिडिल ईस्ट के कई देशों में हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय स्वदेश लौट रहे हैं। मंगलवार देर रात जेद्दा और दुबई से उड़ानें दिल्ली, अहमदाबाद और हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहुंचीं। भारत लौटे यात्रियों ने कहा कि अपने देश पहुंचकर उन्हें राहत महसूस हो रही है।

 

इस बीच दुबई और अबू धाबी से 2000 से ज्यादा भारतीय सात विशेष उड़ानों के जरिए वापस लाए गए। हालांकि एयरस्पेस बंद होने के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में 250 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। सिर्फ दिल्ली से 80 से ज्यादा, मुंबई से 100 से अधिक, बेंगलुरु से 40 से ज्यादा और चेन्नई से लगभग 30 उड़ानें प्रभावित हुईं।

 

1100 से ज्यादा भारतीय नाविक फंसे

स्थिति समुद्री मार्ग पर भी गंभीर है। ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया है। यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।

 

इस फैसले के बाद भारतीय झंडे वाले 37 जहाज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में फंस गए हैं। इन जहाजों पर 1,109 भारतीय नाविक सवार हैं। जहाजों में कच्चा तेल और एलएनजी जैसी जरूरी ऊर्जा सामग्री लदी हुई है। दुखद खबर यह भी है कि इन जहाजों पर काम कर रहे कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक घायल है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिपिंग मंत्रालय ने एक ‘क्विक रिस्पांस टीम’ बनाई है, जो चौबीसों घंटे फंसे नाविकों और उनके परिवारों से संपर्क में है।

 

तेल बाजार में उथल-पुथल

होर्मुज रूट बंद होने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई है। कच्चे तेल का भाव करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि अगर रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो कीमत 100 डॉलर तक जा सकती है।

 

U.S. Energy Information Administration के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाला अधिकतर तेल चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को जाता है। जेट ईंधन और एलएनजी की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

 

हवाई सेवाएं बुरी तरह प्रभावित

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय एयरलाइंस ने अब तक 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की हैं। कई देशों ने अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया है।

 

Air India ने यूएई, सऊदी अरब, इजराइल और कतर के लिए अपनी ज्यादातर उड़ानें 4 मार्च रात 11:59 बजे तक निलंबित कर दी हैं। एयरलाइन ने कहा है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सबसे ऊपर है। हालांकि उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के लिए उड़ानें वैकल्पिक मार्ग से जारी हैं।

 

एयर इंडिया प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड, मुफ्त तारीख बदलने या दूसरी व्यवस्था का विकल्प दे रही है। वहीं IndiGo जेद्दा से हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए 10 विशेष राहत उड़ानें चला रहा है।

 

तमिलनाडु के Tiruchirappalli International Airport पर भी असर दिखा। यहां 31 उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें 16 आगमन और 15 प्रस्थान की थीं।

 

पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन

ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर बढ़ने की कोशिश की और इस्लामाबाद के डिप्लोमैटिक क्षेत्र के बाहर पुलिस से झड़प हुई। सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में कम से कम 34 लोगों की मौत और 120 से ज्यादा लोग घायल हुए।

 

पीएम मोदी की सक्रियता

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीयों की सुरक्षा को लेकर खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बात की। उन्होंने ओमान के सुल्तान, कतर के अमीर और कुवैत के क्राउन प्रिंस से फोन पर चर्चा की और क्षेत्र में हमलों की निंदा की।

 

सरकार लगातार हालात की समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर निकासी अभियान तेज करने की तैयारी है।

 

तेहरान से छात्रों को हटाया गया

तेहरान में रह रहे अधिकांश भारतीय छात्रों को सुरक्षित इलाकों में भेज दिया गया है। भारतीय दूतावास ने बताया कि बढ़ते खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया। छात्रों के लिए यात्रा, भोजन और रहने की व्यवस्था की गई है। कुछ छात्रों ने स्थानांतरण से इनकार किया है और वे अभी भी तेहरान में हैं।

 

दूतावास ने सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वे घर के अंदर रहें, खिड़कियों से दूर रहें और किसी भी भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें।

 

आगे क्या?

मौजूदा हालात में हवाई और समुद्री दोनों मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है। हजारों भारतीय अभी भी प्रभावित हैं। सरकार कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन के जरिए संपर्क में है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है।